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इनसे पूछिए, एक वोट की कीमत

Wed, 07 May 2014 12:47 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 07 May 2014 12:47 PM IST
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election story of uttarakhand

किसी भी चीज का महत्व तब समझ में आता है, जब जीवन में उसकी कमी होने लगती है। बीते पंचायत चुनाव में यही हुआ पोखरी ब्लॉक की ग्राम पंचायत खाल के ग्रामीणों के साथ।

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यहां चुनी गई ग्राम प्रधान सुनीता अपनी प्रतिद्वंदी सपना देवी से मात्र एक मत के अंतर से जीती। सुनीता का कहना है कि जीत से पूर्व एक मत का महत्व कभी समझ में नहीं आया था। लेकिन जब एक मत से उनकी जीत की घोषणा हुई तो उसी क्षण एक वोट का महत्व समझ में आया।
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कुछ ऐसा ही हुआ दशोली ब्लॉक के ग्राम पंचायत दिगोली के ग्रामीणों के साथ। यहां निवर्तमान ग्राम प्रधान किशन सिंह ने पांच मतों से जीत हासिल की। जबकि ग्राम पंचायत में 451 मतदाताओं में से 328 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।

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जब 71 वोट से हारे विधानसभा चुनाव

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हरिद्वार में ऐसे कई उदाहरण हैं जब दहाई के अंक में वह प्रत्याशी भी हार गया जिसे लोग दिल से जीताना चाहते थे। वोट न डालने पर कई समर्थकों को बाद में पछताने के सिवाय कुछ हाथ नहीं लगा।

वर्ष 1985 का विधानसभा चुनाव बाहरी बनाम स्थानीय प्रत्याशी के नाम पर लड़ा गया था। कांग्रेस का टिकट न मिलने पर तब अम्बरीष कुमार ने निर्दलीय मैदान में उतरकर स्थानीयता के नाम पर चुनाव लड़ा था।

गली-गली नारा गूंजा था ‘मंगलवार का दिन होगा, ‘शेर चुनाव चिह्न होगा। लेकिन अम्बरीष कुमार 71 वोट से कांग्रेस के महावीर राणा से हार गए।

इस नतीजे के बाद बहुत लोग रोए। शहरी क्षेत्र में कम मतदान इसका कारण माना गया था। वर्ष 1989 के लोकसभा चुनाव में जनता दल के धर्म सिंह मौर्य मात्र 2200 वोट से चुनाव हार गए थे और कांग्रेस के जगपाल सिंह जीत गए थे।

यहां 1 वोट से जीते 9 पंचायत प्रतिनिधि

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7 मई को लोकतंत्र का महायज्ञ है। हम सबके पास इस यज्ञ में आहुति के लिए एक वोट हैं। इस वोट को जरूर दें। हरेक के लिए एक वोट की कीमत है। इस बेशकीमती वोट का महत्व पंचायत चुनाव में वे जानते हैं, जिनका नतीजा सिर्फ एक वोट से तय हुआ है। जिले में 9 पंचायत प्रतिनिधि एक वोट से जीत जनता की नुमाइंदगी के हकदार बनें।

पिछले त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव में सीलिंग की कमला देवी, कानाकोट की हेमा और रायकोट कुंवर के हरीश राम एक वोट की कीमत जान सके। ये तीनों बीडीसी (क्षेत्र पंचायत सदस्य) बने उम्मीदवार अपने विरोधियों से महज इसी एक वोट से जीत सके।

इसी तरह जिले में ग्राम प्रधान के सात सीटों पर एक वोट ने निर्णायक भूमिका अदा की। छतकोट की जीवंती, निलौटी के नंद किशोर, गोलडांडा के त्रिलोक, भिंगराड़ा की हीरा, झिरकुनी के प्रकाश और कामाज्युला के केशर ने मात्र एक वोट से जीत दर्ज की।

पहले चुनाव में दो, दूसरे में एक मत की बढ़त

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बहुली ग्राम पंचायत में प्रधान पद के पिछले दोनों चुनावों में दो परिवारों के बीच कांटे का मुकाबला हुआ।

2003 के चुनाव में मोहन सिंह परिहार ने गोविंद सिंह परिहार को  दो मतों से, 2008 में मोहन सिंह की पत्नी हीरादेवी ने गोविंद सिंह की पत्नी निर्मला देवी को एक मत से हराया।

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