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जो बंदर भगाएगा, वोट हमारा पाएगा
अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 09 Apr 2014 04:35 PM IST
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जब भी किसी नेता के आने की आहट मिलती है तो पेशे से राज मिस्त्री राजधानी देहरादून में क्लेमेंटाउन के राजेश कुमार अपने दो साथी अनुपम और सुरेश के साथ गली के नुक्कड़ पर खड़े हो जाते हैं।
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भाजपा और कांग्रेस के नेता जैसे ही वोट मांगते हैं तो उनका एक जवाब होता-‘नेताजी बंदर भगवा दीजिये। वोट आपका।’
क्लेमेंटाउन रेजीडेंसियल वेलफेयर सोसाइटी ने मांग की है कि राजनीतिक दलों को अपने घोषणा पत्र में बंदरों का मामला शामिल करना चाहिए।
रोज किसी न किसी को बंदर काटता है
नेताओं को भले ही यह समस्या छोटी लगे लेकिन क्लेमेंटाउन, सेवला खुर्द, सुभाषनगर समेत कई क्षेत्रों में बंदरों का आतंक है। हर रोज किसी न किसी को बंदर काटता है। बंदरों की समस्या के बाबत सोसाइटी के महामंत्री महेश पांडेय ने हाईकोर्ट को पत्र भी लिखा था।
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सेवला खुर्द के मनोज गुप्ता और बिंदेश्वरी का कहना है कि बंदरों की वजह से बच्चे बाहर खेल नहीं पाते। बंदर पानी की टंकियों का कवर तोड़ डालते हैं। शाम को बंदरों का झुंड आता है तो लोग डर से अंदर दुबक जाते हैं।
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उनका कहना है कि जिसे वोट लेना है, वह बंदरों को पकड़वाए। जो इस समस्या से निजात दिलवाएगा, वही उनका नेता है। शिक्षिका अंजना देवी का कहना है कि उनकी बेटी को बंदर ने काटा था। उनकी कालोनी नेताओं से यही सवाल करती है।