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...तो इस बार भी प्यासी रह जाएगी जनता
अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 06 Apr 2014 11:23 AM IST
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गर्मी की दस्तक के साथ ही राजधानी देहरादून में पानी के लिए मारामारी शुरू हो जाती है। सूखे नलों से पानी की बूंदें टपकने का इंतजार करना दर्जनों मोहल्लों की हजारों आबादी की नियति बनकर रह जाती है।
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जनता की इस परेशानी से कोई वास्ता नहीं
हैंडपंपों के सहारे या टैंकरों के भरोसे किसी तरह लोग जिंदगी बसर करते हैं। यह कहानी नई नहीं, हर साल की है। इसके बावजूद हर पांच साल में मतदाताओं के दर पर पहुंचने वाले नेताओं को जनता की इस परेशानी से कोई वास्ता नहीं।
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आलम यह है कि लोकसभा चुनाव के दौरान भी बड़ी आबादी की यह समस्या अब तक किसी पार्टी, नेता का मुद्दा नहीं बन सकी है। जल ही जीवन है, पुरानी कहावत है।
लेकिन लगता नहीं कि संसद में कुर्सी पाने की प्यास पाले जनप्रतिनिधियों को आम आदमी के जीवन की आस पूरी करने में दिलचस्पी है। अमर उजाला ने शुक्रवार को दून के विभिन्न क्षेत्रों में इस समस्या पर मतदाताओं की राय ली।
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सभी जगह पेयजल किल्लत की समस्या उभरी और नेताओं की बेरुखी का दर्द भी। कई वोटर तो बोल पड़े, हमें पानी नहीं मिला तो चुनाव से किनारा कर लेंगे।
स्थान: बकरालवाला, समय: दोपहर 12:30 बजे
कमलावती अपनी सब्जी की दुकान के भीतर बैठी थी। अमर उजाला टीम पहुंची तो वह दुकान छोड़ दौड़ती चली आईं। पास ही सड़क पर बह रहे पानी की ओर इशारा करते हुए बोली, कई दिन से यहां लाइन लीक हो रही है।
हर दिन हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। घरों में नल सूखते जा रहे हैं। बताया कि इन दिनों नेता, समर्थक वोट मांगने आ रहे हैं, लेकिन पानी के सवाल पर सब चुप्पी साध जाते हैं। कमलावती ने कहा, इसकी फोटो जरूर खींचना, तभी ठीक होगी लीकेज।
स्थान: डोभालवाला, समय: दोपहर 01:00 बजे
मीना लाल सब्जी खरीदने निकली थीं। अमर उजाला ने रोककर बातचीत शुरू की तो बोली, हमारे मोहल्ले में तो लंबे समय से पानी की किल्लत बनी रहती है।
बताया कि उनका परिवार 60 साल से यहां रह रहा है, लेकिन पहली बार इस तरह की समस्या सामने आई है। आलम यह है कि घर में एक बाल्टी भरने में भी घंटे गुजर जाते हैं।
वोट मांगने आने वालों से बात की, पूछने पर मीना बोलीं, नेता आ तो रहे हैं, लेकिन पानी की समस्या दूर करने पर कोई बात नहीं करता।
स्थान: पथरिया पीर, समय: दोपहर 01:20 बजे
यहां स्थानीय निवासी राकेश रावत से मुलाकात हुई। राकेश से अमर उजाला ने चुनाव पर चर्चा शुरू की। राकेश ने बताया नेता-समर्थक प्रचार में जुट गए हैं, हर कोई अपनी बात लेकर सामने आ रहा है।
आगे बढ़ते हुए पानी का सवाल किया तो राकेश के स्वरों में नाराजगी नजर आने लगी। बोले, जनता पानी के लिए परेशान है। एक-एक बूंद के लिए जूझ रही है, लेकिन समझ नहीं आता नेता इसे मुद्दा क्यों नहीं बनाते।
वोट मांगने आते हैं, हाथ जोड़कर निकल लेते हैं। कभी जनता की समस्याएं पूछने की जहमत नहीं उठाते।
स्थान: नेशविला रोड, समय: दोपहर 01:35 बजे
नितिन फास्ट फूड की दुकान करते हैं। अमर उजाला पहुंचा तो वह दुकान में काम पर जुटे थे। पूछने पर बोले, क्षेत्र में पानी की बड़ी किल्लत है।
दुकान में दिनभर पानी चाहिए होता है, लेकिन स्थिति यह है कि ग्राहकों को भी पूरा पानी दिला दें तो काफी है। बताया कि दुकान और घर के लिए कई बार टैंकर मंगाना पड़ता है।
इसके बावजूद अब तक वोट मांगने आए किसी प्रत्याशी ने क्षेत्र को इस समस्या से निजात दिलाने के बारे में बात तक नहीं की है।
दो माह में सूख गया हैंडपंप
डोभालावाला में दो साल पूर्व हैंडपंप लगाया गया था, लेकिन अब यह सूख चुका है। स्थानीय लोगों ने बताया कि पंप लगा था तो दो महीने तक खूब पानी आया।
सीपी नैथानी बताते हैं कि अब भी कई लोग पानी के लिए यहां दौड़े आते हैं, लेकिन घंटों पंप चलाने के बाद भी जब पानी नहीं आता तो थक-हारकर लौट जाते हैं।
यहां सबसे अधिक दिक्कत
बंजारावाला, ब्रह्मपुरी, चमनपुरी, गांधी ग्राम, चोइला, मोहनपुर नई बस्ती, मन्नुगंज, चुक्खूवाला, खुड़बुड़ा, सालावाला, हाथीबड़कला गांव, राजपुर के ऊ परी हिस्से, कालिंदी एनक्लेव आदि।