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हरिद्वार: बाल सुधार गृह की दीवार फांदकर भागे आठ बच्चे, प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप

Mon, 16 Oct 2017 08:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार Updated Mon, 16 Oct 2017 08:34 PM IST
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Eight children ran out from haridwar juvenile home
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रोशनाबाद में बाल सुधार गृह से रविवार देर रात दीवार में सेंध लगाकर आठ किशोर फरार हो गए। सिडकुल पुलिस की सक्रियता से सात किशोर हत्थे पकड़े गए, जबकि एक का पता नहीं चल सका। बच्चों ने बाल सुधार गृह प्रबंधन पर गंभीर आरोप जड़े हैं।  

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देर रात सिडकुल पुलिस चेकिंग में जुटी थी। किरबी कंपनी के पास सड़क किनारे कुछ बच्चों को देखकर पुलिस को संदेह हुआ। पुलिस ने जब बच्चों को आवाज लगाई, तब वे भागने लगे। पुलिस ने पीछा कर सात किशोर पकड़ लिए, जबकि एक हाथ नहीं आ सका।
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थाने लाकर की गई पूछताछ में बच्चों ने बताया कि वे सभी बाल सुधार गृह में रहते हैं और रात करीब ग्यारह बजे दीवार में सेंघ लगाकर फरार हुए थे। पूछने पर बच्चों ने आरोप लगाया कि बाल सुधार गृह में बेहद ही बुरा बर्ताव उनके साथ किया जाता है।
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मारपीट करने के साथ ही अच्छा खाना भी नहीं दिया जाता है। थानाध्यक्ष कमल मोहन भंडारी ने बताया कि किशोरों के नाम धीरज जोशी पुत्र नवीन चंद्र जोशी निवासी लालकुंआ नैनीताल, मनोज पंडित पुत्र कृपाल पंडित निवासी गांव मटलटव लोहाघाट चंपावत, पंकज बेलवाल पुत्र त्रिलोचन बेलवाल निवासी लक्ष्मपुर चौराहा थाना चोर गलिया उधमसिंह नगर हैं।

प्रबंधन की खुली पोल

Eight children ran out from haridwar juvenile home

साथ हीअभिषेक यादव पुत्र लल्ल यादव निवासी चंद्रभागा ऋषिकेश, संदीप पुत्र मनमोहन निवासी अंतरहेडी बिसातगंज बरेली, सूरज कुमार पुत्र रवि कुमार निवासी भैरव मंदिर ऋषिकेश और एक किशोर मूकबघिर है।  बताया कि फरार हुए किशेार का नाम महेश है। थानाध्यक्ष ने बताया कि बच्चों समझाबुझाकर बाल सुधार गृ़ह भेजा गया है।  

प्रबंधन की खुली पोल
हरिद्वार। बाल सुधार गृह से आठ किशोर फरार हो गए, लेकिन प्रबंधन को इसकी भनक सुबह दिन निकलने पर हुई। तब दौड़कर प्रबंधन से जुड़े लोग थाने पहुंच गए।  वहां बच्चों को देखकर वे हैरान हो गए। उनकी जान में जान आई लेकिन उनके निकम्मेपन की पोल खुल गई थी।  

हमें बाल सुधार गृह नहीं जाना
हरिद्वार। पुलिस अभिरक्षा में मौजूद सभी किशोर बार- बार बोलते रहे कि उन्हें फिर उस जगह यानि बाल सुधार गृह नहीं जाना है। उन्हें वहां अच्छा नहीं लगता है। न ही उनसे अच्छा व्यवहार होता है। लेकिन पुलिस ने बच्चों को काफी समझाया तब वे जाने के लिए मान गए। 

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