एक कमरा, एक शिक्षक और कक्षाएं 5
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शिक्षण व्यवस्था बेहतर करने का लाख दावे
सरकार भले ही देहरादून में एसी कमरों में बैठकर शिक्षण व्यवस्था बेहतर करने का लाख दावे कर ले, लेकिन धरातल पर ऐसा कुछ नजर नहीं आता।
बागेश्वर जिले की कांडा तहसील के दूरस्थ सेरी गांव का प्राइमरी स्कूल एक कमरे में चल रहा है। पहली से पांचवीं तक के 26 विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए यहां मात्र एक शिक्षा मित्र है।
ऐसे में स्कूल में पढ़ रहे इन 26 बच्चों का भविष्य कैसा होगा सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। कांडा से 25 किमी. दूर स्थित इस विद्यालय में लापरवाही का सिलसिला भवन निर्माण से ही शुरू हो गया था।
2003 में दो कमरों का स्कूल भवन बनाया गया। भवन बनने के बाद ही फर्श और दीवारों में दरार आ गई। 2013 की आपदा में दरार और अधिक चौड़ी हो गई।
बैठने लायक नहीं बचा कमरा
नतीजतन एक कमरे को छोड़कर कोई भी कमरा बैठने लायक नहीं बचा। स्कूल की पांच कक्षाओं के 26 बच्चों को एक ही कमरे में बैठना पड़ रहा है।
इसी कमरे में कंप्यूटर, अलमारी और अन्य सामान रखा गया है। कई बार आंगनबाड़ी के बच्चों को भी यहां बैठाया जाता है।
सर्व शिक्षा अभियान के संकुल समन्वयक गणेश पाठक ने बताया कि विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने 2010 में ही जर्जर भवन की सूचना राजस्व विभाग के माध्यम से विभाग को भेज दी थी।
एसडीएम ने भवन का निरीक्षण भी किया था। बावजूद इसके अब तक इसकी मरम्मत नहीं की गई है।