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उत्तराखंड: यहां बेमौसमी सब्जी से किसानों की आर्थिकी हुई मजबूत
महिपाल पटवाल, अमर उजाला, बैजरो
Updated Fri, 26 Oct 2018 11:45 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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पूरे प्रदेश में जहां पलायन का शोर है, वहीं पहाड़ में पलायन, जंगली जानवरों से हो रहे नुकसान समेत तमाम मुश्किलों का रोना रो रहे लोगों को विकासखंड बीरोंखाल के अंतर्गत रसिया महादेव क्षेत्र के ग्रामीणों ने आइना दिखाया है।
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सीली मल्ली गांव के काश्तकार आधुनिक खेती, उद्यान और बागवानी को अपनाकर अपनी आर्थिकी को मजबूत करने के साथ ही अन्य काश्तकारों के लिए नजीर बन गए हैं। बेमौसमी सब्जी और फल उत्पादन से गांव के 170 काश्तकारों की आर्थिकी मजबूत हो गई है।
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सीली मल्ली के प्रधान व आधुनिक कृषक सुरेंद्र रावत का कहना है कि वर्तमान में उनके गांव में 170 परिवार रहते हैं। गांव के सभी काश्तकारों ने आधुनिक खेती, उद्यानीकरण और बागवानी को रोजगार का जरिया बनाया, जिसके चलते आज गांव का हर परिवार संपन्न है। उनके गांव के लोग हर वर्ष लाखों रुपये की लखोरी मिर्च बेच रहे हैं। टमाटर, मटर, गोभी, शिमला मिर्च आदि बेमौसमी सब्जी उगाकर अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं। इसके अलावा गांव में सेब, अखरोट, नींबू, माल्टा, खुमानी व मौसमी आदि फलों का भी अच्छा खासा उत्पादन किया जा रहा है।
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काश्तकार मंगल सिंह चौधरी, बीरेंद्र सिंह, विजयपाल सिंह ने बताया कि आधुनिक खेती से वह डेढ़ से दो लाख रुपये सालाना कमाई कर रहे हैं। गांव में विपणन की समस्या भी नहीं है। व्यापारी काश्तकारों से उनके उत्पादों को खेतों से ही खरीद लेते हैं। गांव में बेमौसमी सब्जियों के उत्पादन के लिए छह परिवारों ने अपने पॉली हाउस भी लगाए हैं, जबकि चार काश्तकार मत्स्य पालन से जुड़ चुके हैं। अन्य ग्रामीण भी मत्स्य पालन को अपनाकर अपनी आर्थिकी और भी मजबूत करने की तैयारी में हैं। उनका मानना है कि पहाड़ में रह कर भी कृषि, उद्यान और बागवानी में आधुनिक तकनीकी को अपनाकर विकास संभव है।