{"_id":"696138499f213cf432062232","slug":"e-buses-will-improve-rishikeshs-traffic-plans-for-25-buses-are-being-prepared-dehradun-news-c-5-drn1043-875384-2026-01-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dehradun News: ई-बसों से ऋषिकेश का यातायात सुधरेगा, 25 बसों की योजना हो रही तैयार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dehradun News: ई-बसों से ऋषिकेश का यातायात सुधरेगा, 25 बसों की योजना हो रही तैयार
विज्ञापन
-उत्तराखंड शहरी क्षेत्र विकास एजेंसी केएफडब्ल्यू जर्मन बैंक के वित्तपोषण से करेगी काम
-पहले चरण में सात मीटर लंबी 22 सीट क्षमता की 10 से 12 किमी परिक्षेत्र में होगा संचालन
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। ऋषिकेश में जल्द ही ई-बसों से सफर का मौका मिलेगा। इससे यातायात में सुधार हो सकेगा। उत्तराखंड शहरी क्षेत्र विकास एजेंसी केएफडब्ल्यू जर्मन बैंक के वित्तपोषण से यहां बसें चलाने जा रहा है, जिसके तहत प्रथम चरण में 25 ई-बसें संचालित की जाएंगी।
एजेंसी की ओर से शुक्रवार को देहरादून में ई-बस और इंटिग्रेटेड यूनिट कंपनियों के लिए बिडर्स कॉन्क्लेव कराया गया। ऋषिकेश शहर में एकीकृत नगर विकास परियोजना के माध्यम से नगर निगम क्षेत्र के अतिरिक्त पौड़ी जिले के स्वर्गाश्रम और टिहरी के तपोवन एवं मुनि की रेती में भी पेयजल, सीवरेज, सड़क, वर्षाजल-बाढ़ प्रबंधन सहित नगरीय यातायात प्रबंधन की भी कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
ऋषिकेश नगर मोबिलिटी परियोजना शहर और फुटहिल में संकरी सड़कों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसके लिए यह बस सात मीटर लंबी और 22 सीटर क्षमता की होगी। प्रथम चरण में 10 से 12 किमी के क्षेत्र के तहत प्रारम्भिक कॉरिडोर नेपाली फार्म, आईएसबीटी, रेलवे स्टेशन और त्रिवेणी घाट को लिया गया है। प्रथम चरण में कुल 25 ई-बसों के साथ डिपो विकास, एएमसी, तकनीकी और सूचना प्रौद्योगिकी के साथ इंटिग्रेशन किया जाएगा।
विज्ञापन
उत्तराखंड परिवहन निगम के तकनीकी उप महाप्रबन्धक भूपेश आनन्द कुशवाह ने कहा कि निगम की ओर से एजेंसी को पूर्व में ही इस काम की अनुमति दे दी गई है। ऋषिकेश में यातायात को बेहतर करने के प्रयास में निगम एजेंसी के साथ है।
अपर कार्यक्रम निदेशक विनय मिश्रा ने कहा कि ऋषिकेश तीर्थनगरी, योग नगरी, पर्यटन के साथ-साथ ही गढ़वाल पहाड़ का प्रवेश द्वार भी है। यह साहसिक पर्यटन नगरी में भी विकसित हो चुका है। पहाड़ी क्षेत्रों के लिए ऋषिकेश पूर्व से ही व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र भी रहा है। नगर निगम बनने के साथ ही इसके भौगोलिक क्षेत्रफल में विस्तार हो रहा है। निरन्तर जारी रहने वाली विभिन्न गतिविधियों जैसे चारधाम यात्रा, साहसिक पर्यटन, कुम्भ और कांवड़ का केंद्र होने के कारण यातायात को सुचारू रखना भी स्थानीय प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण है। ई-बसों से काम काफी आसान होगा। कॉन्क्लेव में यूयूएसडीए के वित्त नियंत्रक आनंद सिंह, परियोजना प्रबंधक जतिन सैनी, गुरप्रीत सिंह देओल, अमित सैनी, सहायक अभियंता लोकेश कुमार, परिवहन निगम के सहायक अभियंता पीके दीक्षित, विनय राठी मौजूद रहे।
विज्ञापन
-पहले चरण में सात मीटर लंबी 22 सीट क्षमता की 10 से 12 किमी परिक्षेत्र में होगा संचालन
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। ऋषिकेश में जल्द ही ई-बसों से सफर का मौका मिलेगा। इससे यातायात में सुधार हो सकेगा। उत्तराखंड शहरी क्षेत्र विकास एजेंसी केएफडब्ल्यू जर्मन बैंक के वित्तपोषण से यहां बसें चलाने जा रहा है, जिसके तहत प्रथम चरण में 25 ई-बसें संचालित की जाएंगी।
एजेंसी की ओर से शुक्रवार को देहरादून में ई-बस और इंटिग्रेटेड यूनिट कंपनियों के लिए बिडर्स कॉन्क्लेव कराया गया। ऋषिकेश शहर में एकीकृत नगर विकास परियोजना के माध्यम से नगर निगम क्षेत्र के अतिरिक्त पौड़ी जिले के स्वर्गाश्रम और टिहरी के तपोवन एवं मुनि की रेती में भी पेयजल, सीवरेज, सड़क, वर्षाजल-बाढ़ प्रबंधन सहित नगरीय यातायात प्रबंधन की भी कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
विज्ञापन
ऋषिकेश नगर मोबिलिटी परियोजना शहर और फुटहिल में संकरी सड़कों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसके लिए यह बस सात मीटर लंबी और 22 सीटर क्षमता की होगी। प्रथम चरण में 10 से 12 किमी के क्षेत्र के तहत प्रारम्भिक कॉरिडोर नेपाली फार्म, आईएसबीटी, रेलवे स्टेशन और त्रिवेणी घाट को लिया गया है। प्रथम चरण में कुल 25 ई-बसों के साथ डिपो विकास, एएमसी, तकनीकी और सूचना प्रौद्योगिकी के साथ इंटिग्रेशन किया जाएगा।
विज्ञापन
उत्तराखंड परिवहन निगम के तकनीकी उप महाप्रबन्धक भूपेश आनन्द कुशवाह ने कहा कि निगम की ओर से एजेंसी को पूर्व में ही इस काम की अनुमति दे दी गई है। ऋषिकेश में यातायात को बेहतर करने के प्रयास में निगम एजेंसी के साथ है।
अपर कार्यक्रम निदेशक विनय मिश्रा ने कहा कि ऋषिकेश तीर्थनगरी, योग नगरी, पर्यटन के साथ-साथ ही गढ़वाल पहाड़ का प्रवेश द्वार भी है। यह साहसिक पर्यटन नगरी में भी विकसित हो चुका है। पहाड़ी क्षेत्रों के लिए ऋषिकेश पूर्व से ही व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र भी रहा है। नगर निगम बनने के साथ ही इसके भौगोलिक क्षेत्रफल में विस्तार हो रहा है। निरन्तर जारी रहने वाली विभिन्न गतिविधियों जैसे चारधाम यात्रा, साहसिक पर्यटन, कुम्भ और कांवड़ का केंद्र होने के कारण यातायात को सुचारू रखना भी स्थानीय प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण है। ई-बसों से काम काफी आसान होगा। कॉन्क्लेव में यूयूएसडीए के वित्त नियंत्रक आनंद सिंह, परियोजना प्रबंधक जतिन सैनी, गुरप्रीत सिंह देओल, अमित सैनी, सहायक अभियंता लोकेश कुमार, परिवहन निगम के सहायक अभियंता पीके दीक्षित, विनय राठी मौजूद रहे।