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उत्तराखंडः नदी का जलस्तर बढ़ने से लोगों में दहशत, आधे दर्जन गांव से कटा संपर्क

Sat, 03 Aug 2019 09:36 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून/उत्तरकाशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून/उत्तरकाशी Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 03 Aug 2019 09:36 AM IST
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due to rain river level increased in dehradun and uttarkashi
इस तरह सुपिन नदी को पार कर रहे हैं ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला

रिस्पना और बिंदाल नदी का जलस्तर बढ़ने से बस्तियों के किनारे रहने वाले लोगों में दहशत का माहौल है। उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से पुश्ता बनाने और जाल लगाने की मांग की है। उधर, बरसात के चलते सड़कों पर मौजूद गड्ढे जानलेवा बने हुए हैं। वहीं उत्तरकाशी में भी सूपिन नदी में उफान के चलते कई गांव अलग-थलग हो गए हैं।

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देहरादून में रिस्पना नदी के किनारे बसे काठ बंगला, वीर गब्बर सिंह, राजीव नगर, आर्यनगर, भगत सिंह कॉलोनी आदि के साथ ही बिंदाल किनारे की बस्तियों चुक्खूवाला, जोहड़ी, कांवली रोड, खुड़बुड़ा, राजीवनगर बस्ती, ब्रह्मपुरी, लोहिया नगर आदि क्षेत्र में मकानों के गिरने का खतरा पैदा हो गया है। ब्रह्मपुरी के पार्षद सतीश कश्यप ने राजीव नगर बस्ती में जाकर नदी किनारे मौजूद मकानों का निरीक्षण किया। उसके बाद उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से फोन पर वार्ता की। धर्मपुर विधायक विनोद चमोली से सुरक्षा जाल लगाने की मांग की।
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इसके अलावा बीते बृहस्पतिवार रात से हुई बारिश के चलते सुबह गांधी रोड, राजपुर रोड, सहारनपुर रोड, पटेलनगर, निरंजनपुर मंडी, आईएसबीटी, मोथरोवाला, ट्रांसपोर्टनगर, रायपुर, बंगाली कोठी, मन्नूगंज, कांवली रोड आदि जगहों पर सड़कों पर पानी भरा रहा। इससे सड़कों पर मौजूद गड्ढों में भरे पानी में चालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। नगर निगम में बनाए गए आपदा कंट्रोल नंबर (01352652571) पर जलभराव संबंधी दो शिकायतें रायपुर क्षेत्र से भी पहुंची। जिसे टीम भेजकर ठीक कराया गया।

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सूपिन नदी में उफान आने से अलग-थलग पड़े आधा दर्जन गांव 

पुरोला (उत्तरकाशी) में बीते दिनों हुई मूसलाधार बारिश से सूपिन नदी में उफान के चलते जखोल-लिवाड़ी मोटर मार्ग पर यातायात ठप हो गया है। यहां खेड़ाघाटी में अस्थाई लकड़ी का पुल खतरे की जद में आने और इसकी एप्रोच रोड बहने के कारण प्रशासन ने यहां वाहनों की आवाजाही रोक दी है। ऐसे में क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों के ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नदी पार कर पैदल आवाजाही करनी पड़ रही है।

बता दें कि मोरी ब्लॉक के दूरस्थ फिताड़ी, राला, कांसला, रेक्चा, हरिपुर व लिवाड़ी गांवों को जोड़ने वाले जखोल-लिवाड़ी मोटर मार्ग के खेड़ा घाटी क्षेत्र में लकड़ी सूपिन नदी पर लकड़ी का अस्थाई पुल बना हुआ है। जिसके सहारे इन छह गांवों तक वाहनों की आवाजाही होती है।

पुल की एप्रोच रोड बह गई है

बीते कुछ दिनों से क्षेत्र में हो रही बारिश से सूपिन नदी में उफान आने के कारण इस पुल की एप्रोच रोड बह गई है और पुल खतरे की जद में आ गया है। जिसे देखते हुए प्रशासन ने यहां वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है।

जिस कारण ग्रामीणों को 10 से 15 किमी की पैदल दूरी तय कर गांवों तक पहुंचना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि पुल के बांए छोर से बह रही नदी को पार करने के लिए ग्रामीणों ने बल्लियां लगाई हुई हैं। जिन्हें पकड़ कर ग्रामीण जान जोखिम में डालकर उफनती नदी को पार करने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है

क्षेत्र के प्रहलाद रावत, दुर्गेश लाल आदि लोगों ने बताया कि वाहनों की आवाजाही बंद होने से ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में अगर नदी के प्रवाह से बचा हुआ पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया तो हालात और गंभीर हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि उक्त स्थान पर पीएमजीएसवाई विभाग की तरफ से 54 मीटर स्पान का गार्डर पुल बनाया जाना था।

लेकिन सालों बाद भी पुल का निर्माण नहीं हो सका है। जिसके चलते स्थानीय ग्रामीणों को हर बरसात सीजन में परेशानी झेलनी पड़ती है। मोरी के तहसीलदार बीआर सरियाल ने बताया कि खतरे को देखते हुए गाड़ियों की आवाजाही पर रोक लगाई गई है। हालात सामन्य होते ही आवाजाही दोबारा सुचारू करा दी जाएगी।

खेड़ा घाटी क्षेत्र में खतरे की जद में आए अस्थाई पुल से कुछ किमी की दूरी पर ही दूसरा पुल मौजूद है। जिसके सहारे सुगम आवाजाही हो रही है। वहीं पीएमजीएसवाई की तरफ से प्रस्तावित पुल का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। हालांकि ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए स्थानीय राजस्व अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करने के लिए भेज दिया गया है।
- अनुराग आर्य, एसडीएम बड़कोट/पुरोला

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