हवाला से युवाओं की नस में पहुंच रहा 'जहर'
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उत्तराखंड में नशीले पदार्थों का धंधा हवाला के जरिये चल रहा है। हेरोइन, सुरफा आदि पदार्थों की खरीद-फरोख्त पर भुगतान हवाला से किया जाता है।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने नशे के कारोबार की रिपोर्ट तैयार की है। सूत्रों के मुताबिक नशीले पदार्थों के तस्करों का मकड़जाल उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और यूपी में फैला है। उत्तराखंड की सरहद से लगे यूपी के जिलों में हेरोइन बनाने का काम हो रहा है। मामला हवाला से जुड़ा होने की वजह से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ब्यूरो से रिपोर्ट मांगी है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने ड्रग तस्करों के रूट की निशानदेही की है। सूत्रों का कहना है कि हिमाचल की तरफ से तस्कर उत्तराखंड में आ रहे हैं। अंदेशा जताया जा रहा है कि तस्करों ने अपने अड्डे हरियाणा में भी बना रखे हैं।
ब्यूरो ने पश्चिमी यूपी के रामपुर समेत आसपास के जिलों में हेरोइन बनाने की फैक्ट्रियों की भी तस्दीक की है। सूत्रों ने बताया कि वर्ष-2012 में भी नारकोटिक्स ब्यूरो ने रामपुर में हेरोइन बनाने की फैक्ट्री पकड़ी थी।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के मुताबिक उत्तराखंड में जिन नशीले पदार्थों का इस्तेमाल अधिक है, उनमें सियुडो इफेड्रीन और इफेड्रीन केमिकल है। सूत्रों का कहना है कि वैसे इन दो केमिकलों का दवाओं में भी इस्तेमाल होता है, लेकिन नशे के सौदागार इसमें अन्य केमिकल मिलाकर नशीले पदार्थ बना देते हैं।
स्कूलों के आसपास, मेडिकल स्टोरों पर निगाह
युवाओं में बढ़ रही नशे की लत पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने चिंता जताई थी। इस पर डीएम रविनाथ रमन ने शहर और तहसीलों में सिटी मजिस्ट्रेट, एसडीएम की अगुवाई में ड्रग और पुलिस विभाग के अधिकारियों की टीम गठित कर दी है। स्कूलों के आसपास और मेडिकल स्टोरों पर निगाह रखी जा रही है।
बंद हो चुकी दवा दुकानों के नाम का इस्तेमाल
ड्रग माफिया नशीले पदार्थों का कारोबार बंद हो चुकी दवा की दुकानों के नाम पर कर रहे हैं। कुछ लोगों ने पहले मेडिकल स्टोर खोले थे, लेकिन बाद में दूसरा कारोबार करने लगे।
इन लोगों ने ड्रग विभाग को दुकान बंद करने की सूचना नहीं दी। माफिया इन्हीं दुकानों के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं। ड्रग इंस्पेक्टर अनीता भारती का कहना है कि ऐसी शिकायतें आई हैं। बंद हो चुके मेडिकल स्टोरों का पता किया जा रहा है।