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देवभूमि की व्यथा कथा: नशे के लिए दांव पर लगा दिया करियर, बिखर गए मां-पिता के सपने

Wed, 22 Jan 2020 02:50 PM IST
अलका त्यागी गंगादत्त थपलियाल, अमर उजाला, नई टिहरी
गंगादत्त थपलियाल, अमर उजाला, नई टिहरी Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 22 Jan 2020 02:50 PM IST
सार

  • उत्तराखंड के टिहरी जिले में चरस और स्मैक ने शराब को भी पछाड़ा

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Drug Addiction in youth High in tehri uttarakhand, They Do not care even Job

विस्तार

उत्तरखंड के टिहरी जिले में नशे के लिए युवाओं ने अपने करियर को भी दांव पर लगा दिया है। चरस, गांजा, स्मैक और अफीम जैसे खतरनाक नशे ने शराब, सिगरेट और बीड़ी को बहुत पीछे छोड़ दिया है। जिले में दो वर्ष में एनडीपीएस एक्ट के तहत 60 से अधिक ऐसे मामले में दर्ज हो चुके हैं। नशा करने वालों में अधिकतर 20 से 35 की आयु वर्ग के युवा शामिल हैं।   

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जिले में चरस, स्मैक, गांजा और अफीम का नशा करने वाले युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। नशे के तस्करों के तार उत्तर प्रदेश के बरेली, मुरादाबाद और सहारनपुर से जुड़े हुए है। पुलिस रिकार्ड में दर्ज आंकड़े इस बात की तस्दीक कर रहे है।
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जिले के अलग-अलग स्थानों से पिछले दो साल में चरस, स्मैक और अफीम की तस्करी करने के आरोप में गिरफ्तार नौ लोग बरेली, मुरादाबाद और सहारनपुर के रहने वाले है, जबकि गांजा, भांग पत्ती और डोडा पाउडर की उत्तरकाशी और विकासनगर क्षेत्र से तस्करी हो रही है।

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नशे के लिए पैसा नहीं मिलने पर जला डाला बिस्तर

केस: 1- नई टिहरी के निकटवर्ती गांव का एक युवक नशे का इतना आदी हो गया कि घर से पैसा नहीं मिलने पर एक दिन उसने बिस्तर पर आग लगाकर रजाई, गद्दे सब जला दिए। पिता सरकारी सेवा में है। तीन भाई-बहनों में युवक सबसे छोटा है।

बड़ा भाई और बहन के सर्विस पर होने के कारण मां-बाप को छोटे बेटे पर इतना भरोसा था कि बिजली, पानी, बीमा पालिसी, बैंक संबंधी सभी काम उसी से करवाते थे। घर के खर्चे का हिसाब किताब उसी के पास रहता था।

दोस्तों के साथ वह कब नशे का आदी हो गया, परिजनों को भनक तक नहीं लगी। युवक जब अपनी मौज मस्ती पर अधिक खर्च करने लगा तो परिजनों से उसे पैसा देना बंद कर दिया। इसी दौरान एक दिन युवक ने घर के अंदर ही बिस्तर पर आग लगा दी। परिजनों ने युवक को तीन माह तक नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराया। घर लौटने के बाद भी उसकी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं आया, जिसके बाद परिजनों ने उसे बेदखल कर दिया है।

नशे की लत ने छुड़ाई नौकरी

केस: 2- बौराड़ी क्षेत्र के एक युवक के पिता का चार साल पहले देहांत हो गया था। मां निजी स्कूल में अध्यापन कार्य कर परिवार का गुजर बसर कर रही है। मां पर दो बेटियों के साथ युवक की जिम्मेदारी भी है। इंटर पास करने के बाद युवक मेरठ में किसी कंपनी में दो साल तक नौकरी करता रहा।

 

करीब साल भर तक वह घर के लिए पैसा भी भेजता रहा और घर आना-जाना भी लगा रहता था। एक साल बाद जब युवक ने पैसे भेजने और घर आना जाना बंद किया तो परिजनों ने वही कंपनी में पहुुंचकर संपर्क किया। पता चला कि युवक नशे की गिरफ्त में है। उसने कंपनी से दो माह का एडवांस भी ले रखा है। उसके बाद परिजन उसे घर ले आए। लगभग छह माह से वह नशा मुक्ति केंद्र में है।

ये है अधिकारियों का कहना

बच्चों को नशे से बचाने के लिए मां-बाप को उनकी हर गतिविधि पर पैनी नजर रखनी होगी। आज बच्चे शराब, बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू के अलावा अफीम, गांजा, चरस और स्मैक जैसा खतरनाक नशा भी करने लगे हैं। जब कोई बच्चा नशे का आदी हो जाता है तो उसे मुख्य धारा में वापस लाना काफी कठिन हो जाता है, क्योंकि उसकी सोचने व समझने की शक्ति कमजोर पड़ जाती है।
-मालती रावत, सोशल वर्कर, मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम, टिहरी

दूसरे राज्यों से स्मैक, चरस और अफीम पहाड़ी क्षेत्रों में छोटी-छोटी मात्रा में पहुंच रहा है, जिस पर नजर रखना आसान नहीं है। पुलिस लगातार मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अभियान चला रही है। एक साल के भीतर टिहरी पुलिस ने साढ़े सात किलो चरस, 29 ग्राम स्मैक और 800 ग्राम अफीम के साथ 12 लोगों को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है।
-डा. योगेंद्र सिंह रावत, एसएसपी, टिहरी

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