उत्तराखंड: प्रतिबंध क्षेत्र में ड्रोन उड़ाया तो दर्ज होगा मुकदमा, लेनी होगी डीजीसीए की अनुमति
प्रदेश में ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए की अनुमति जरूरी होगी। अनुमति मिलने के बाद 24 घंटे के भीतर पुलिस को भी ड्रोन उड़ाने के बारे में सूचना देनी होगी। प्रतिबंध जोन में ड्रोन उड़ाने पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
आम लोगों को ड्रोन के इस्तेमाल के संबंध में जागरूक करने के लिए अभिसूचना एवं सुरक्षा मुख्यालय उत्तराखंड ने दिशा निर्देश जारी किए हैं। जिसमें ड्रोन को खरीदने से पहले केंद्र सरकार की निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य होगा।
ड्रोन संचालन से पहले नियमानुसार डीजीसीए से यूनिक आईडेंटिफिकेशन नंबर (यूआईएन) और स्वचालित एयरक्राफ्ट ऑपरेटर परमिट (यूएओपी) लेना होगा। ड्रोन ऑपरेटर करने वाला पायलट केंद्र के अधिकृत संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त होना चाहिए। अभिसूचना एवं सुरक्षा मुख्यालय के निर्देशानुसार प्रतिबंध जोन में ड्रोन को नहीं उड़ाया जाएगा।
ड्रोन की प्रत्येक उड़ान से पहले डिजिटल स्काई प्लेटफार्म के माध्यम से अनुमति लेना आवश्यक है। डीजीसीए से ड्रोन उड़ाने की अनुमति लेने के बाद संबंधित पुलिस थाने को 24 घंटे पहले सूचना देना जरूरी है।
सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट (सीएआर) का गहनता से अध्ययन कर निर्देशों का पालन न करने पर कार्रवाई का प्रावधान किया है। प्रतिबंध क्षेत्र में ड्रोन उड़ाने पर आईपीसी की विभिन्न धारों व एएआई एक्ट मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
ये हैं प्रतिबंध जोन
ड्रोन उड़ाने के लिए प्रदेश सरकार भी रेड जोन चिन्हित कर रही है। लेकिन डीजीसीए की गाइडलाइन के अनुसार एयरपोर्ट, सचिवालय समेत अन्य सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण स्थानों के आसपास ड्रोन को नहीं उड़ाया जा सकता है।