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Dehradun News: टौंस नदी में सीधे नहीं गिरेंगे नाले, एसटीपी से साफ कर आसन में छोड़ा जाएगा पानी
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टपकेश्वर मंदिर के आसपास के इलाकों से निकलने वाले कई गंदे नाले अब टौंस नदी में सीधे नहीं गिर सकेंगे। नालों के पानी को सीवर लाइन के जरिए एसटीपी तक लाकर शोधित किया जाएगा। इसके बाद शोधित जल को आसन नदी में प्रवाहित किया जाएगा। इससे गढ़ी कैंट समेत आसपास के सभी इलाकों के जल निस्तारण की समस्या का निदान हो जाएगा। जल निगम ने इसकी डीपीआर तैयार कर गढ़ी कैंट बोर्ड को भेज भेज दी है।
गढ़ी कैंट समेत टपकेश्वर मंदिर के आसपास के इलाकों से निकलने वाला गंदा पानी नालों के जरिये टौंस नदी में छोड़ा जाता है, जो कई बार टपकेश्वर मंदिर के आसपास बड़ी समस्या का कारण बनता है। डीएम सोनिका के निर्देश पर पिछले दिनों समस्या के समाधान के लिए सीवर लाइन बिछाकर एसटीपी लगाने के निर्देश दिए गए थे। इसकी डीपीआर भी जल निगम ने तैयार कर ली है। प्रारंभिक खर्च 56 करोड़ रुपए निर्धारित किया गया है, लेकिन इसमें क्षेत्र विस्तार के कारण यह खर्च बढ़कर 70 करोड़ से अधिक जाने की उम्मीद है।
जल निगम के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर हेमचंद्र जोशी ने बताया कि डीपीआर गढ़ी कैंट बोर्ड को भेजी है, इसमें जिस स्थान पर एसटीपी का निर्माण किया जाना है, वह प्राइवेट लैंड है, इसलिए कुछ बाधा आ रही है। भूमि स्वामी से वार्ता कर समस्या का निस्तारण किया जाएगा, इसके बाद प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जाएगा।
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आगे जाकर यमुना में मिलेगी आसन
पानी को एसटीपी से साफ करने के बाद उसे आसन नदी में छोड़ा जाएगा, जो आगे जाकर यमुना में मिल जाएगी। इस प्रोजेक्ट से टौंस नदी के प्राकृतिक स्वरूप को लौटाया जा सकेगा, वहीं अब तक उस क्षेत्र में सीवर लाइन का निर्माण भी किया जा सकेगा।
सीडीओ ने कहा, तेज करें कार्य
मुख्य विकास अधिकारी झरना कमठान की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में जिला गंगा सुरक्षा समिति की बैठक में टपकेश्वर से सीवर लाइन व ट्रीटमेंट प्लांट पर चर्चा हुई। सीडीओ ने डीपीआर और कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने पेयजल निगम के कार्यों की समीक्षा करते हुए जर्मन बैंक पोषित परियोजना की जानकारी ली। उन्हें बताया गया कि दो कार्यों पर टेंडर प्रक्रिया हो चुकी है, अन्य पर शासन को प्रस्ताव गया है, जल्द ही टेंडर प्रक्रिया कराई जाएगी। सीडीओ ने कहा, नये क्षेत्रों में सीवर लाइन को लेकर कार्ययोजना बनाई जाए।
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गढ़ी कैंट समेत टपकेश्वर मंदिर के आसपास के इलाकों से निकलने वाला गंदा पानी नालों के जरिये टौंस नदी में छोड़ा जाता है, जो कई बार टपकेश्वर मंदिर के आसपास बड़ी समस्या का कारण बनता है। डीएम सोनिका के निर्देश पर पिछले दिनों समस्या के समाधान के लिए सीवर लाइन बिछाकर एसटीपी लगाने के निर्देश दिए गए थे। इसकी डीपीआर भी जल निगम ने तैयार कर ली है। प्रारंभिक खर्च 56 करोड़ रुपए निर्धारित किया गया है, लेकिन इसमें क्षेत्र विस्तार के कारण यह खर्च बढ़कर 70 करोड़ से अधिक जाने की उम्मीद है।
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जल निगम के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर हेमचंद्र जोशी ने बताया कि डीपीआर गढ़ी कैंट बोर्ड को भेजी है, इसमें जिस स्थान पर एसटीपी का निर्माण किया जाना है, वह प्राइवेट लैंड है, इसलिए कुछ बाधा आ रही है। भूमि स्वामी से वार्ता कर समस्या का निस्तारण किया जाएगा, इसके बाद प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जाएगा।
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आगे जाकर यमुना में मिलेगी आसन
पानी को एसटीपी से साफ करने के बाद उसे आसन नदी में छोड़ा जाएगा, जो आगे जाकर यमुना में मिल जाएगी। इस प्रोजेक्ट से टौंस नदी के प्राकृतिक स्वरूप को लौटाया जा सकेगा, वहीं अब तक उस क्षेत्र में सीवर लाइन का निर्माण भी किया जा सकेगा।
सीडीओ ने कहा, तेज करें कार्य
मुख्य विकास अधिकारी झरना कमठान की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में जिला गंगा सुरक्षा समिति की बैठक में टपकेश्वर से सीवर लाइन व ट्रीटमेंट प्लांट पर चर्चा हुई। सीडीओ ने डीपीआर और कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने पेयजल निगम के कार्यों की समीक्षा करते हुए जर्मन बैंक पोषित परियोजना की जानकारी ली। उन्हें बताया गया कि दो कार्यों पर टेंडर प्रक्रिया हो चुकी है, अन्य पर शासन को प्रस्ताव गया है, जल्द ही टेंडर प्रक्रिया कराई जाएगी। सीडीओ ने कहा, नये क्षेत्रों में सीवर लाइन को लेकर कार्ययोजना बनाई जाए।