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करार खत्म, रविवार से झेलिए ‘अस्वच्छ दून'

Sun, 02 Mar 2014 10:49 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 02 Mar 2014 10:49 AM IST
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doon valley management

जगह-जगह कूड़े के ढेर और गंदगी से उठती दुर्गंध। रविवार से देहरादून की गलियों, सड़कों पर कुछ यही नजारा दिखेगा।

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निगम के हाथ-पांव फूले
शहर के विभिन्न वार्डों में डोर टू डोर कूड़ा उठान का काम कर रही कंपनी दून वैली वेस्ट मैनेजमेंट ने नगर निगम से कचरा निस्तारण का करार खत्म कर दिया है। कूड़ा उठान बंद होते ही निगम के हाथ-पांव फूल गए।

अफसरों ने कंपनी प्रतिनिधियों से पुनर्विचार का अनुरोध किया, लेकिन कंपनी ने अब काम करने से साफ इनकार कर दिया। निगम से कंपनी को मिली 42 गाड़ियां और 248 रिक्शे भी लौटा दिए गए।
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सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने का दावा
हालांकि, नगर निगम अब भी सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने का दावा कर रहा है। दावा है कि अपने सफाई कर्मियों की मदद से हालात बिगड़ने नहीं दिए जाएंगे।

लेकिन, निगम के पिछले अनुभव बताते हैं कि जल्द कोई हल नहीं निकला तो दूनवासियों को अगले कई दिन गंदगी से जूझना होगा।

पहले सोए रहे अफसर
नगर निगम ने दून वैली वेस्ट मैनेजमेंट के साथ करीब तीन साल पहले एमओयू किया था। तब ‘स्वच्छ दून, सुंदर दून’ का नारा दिया गया।

पिछले कुछ महीने से बकाया भुगतान और टिपिंग राशि बढ़ाने पर नगर निगम और कंपनी में रार चल रही थी। कंपनी ने घाटे का हवाला देते हुए दो माह पूर्व नगर निगम को एक मार्च से काम बंद करने का नोटिस दिया था।
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लेकिन निगम अफसरों ने बीच का रास्ता निकालने की कोई कोशिश नहीं की। शुक्रवार को शहरी विकास सचिव की अध्यक्षता में जिला प्रशासन, नगर निगम और कंपनी के सीईओ सिद्धार्थ जैन के बीच वार्ता हुई।

सचिव ने अनुबंध बढ़ाने के लिए नगर निगम को कंपनी से समन्वय बनाने और जायज मांगों पर विचार का निर्देश दिया। लेकिन निगम अफसरों ने कोई सकारात्मक रुख नहीं दिखाया।

यहां से शुरू हुआ विवाद
कंपनी प्रतिनिधियों का कहना है कि नगर निगम ने कचरा निस्तारण के लिए रिसाइकिलिंग प्लांट बनाने का दावा किया था। लेकिन अब तक इसके लिए कंपनी को जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई।

दूसरी ओर, कूड़ा उठान का शुल्क और यूजर चार्ज बढ़ाने की मांग पर भी कई दौर की वार्ता के बावजूद कंपनी और निगम में सहमति नहीं बनी।

शासन भी निगम से खफा
सफाई व्यवस्था पर नगर निगम की लचर कार्यप्रणाली से शासन भी खफा है। शहरी विकास सचिव डीएस गर्ब्याल ने शनिवार को मुख्य नगर अधिकारी अशोक कुमार को पत्र भेज नाराजगी व्यक्त की है। कहा कि सफाई गंभीर मसला है।

कंपनी के नोटिस पर निगम को प्रभावी कदम उठाने चाहिए थे। वक्त रहते कंपनी के नोटिस पर ठोस निर्णय लिया जाता तो दिक्कत नहीं होती। शासन ने एमएनए को मेयर से चर्चा कर बोर्ड बैठक में जरूरी निर्णय लेने के लिए कहा है।

दूसरी ओर, आपात स्थिति देखते हुए डीएम और एमडीडीए वीसी को भी सफाई व्यवस्था में निगम के सहयोग के लिए कहा गया है।

एमएनए शासन से ही लें निर्देश
मुख्य नगर अधिकारी अशोक कुमार और मेयर विनोद चमोली के बीच निगम में कार्यों पर लंबे समय से छत्तीस का आंकड़ा चल रहा है। मेयर के कई आदेश एमएनए टाल चुके हैं। कई बार वह सीधे शासन से निर्देश लेते रहे हैं।

इस पर मेयर ने समय-समय पर सवाल भी उठाए हैं। सफाई व्यवस्था में भी मेयर ने निगम अफसरों को सुस्ती पर घेरा था। अब कंपनी के काम बंद करने के बाद शासन से पत्र आया तो एमएनए ने जानकारी देने के लिए इसे मेयर को अग्रेषित कर दिया।

एमएनए के इस कदम ने मेयर को फिर भड़का दिया है। उनका कहना है कि जनहित से जुड़े किसी भी मुद्दे पर एमएनए ने पहले कभी उनसे या बोर्ड से विचार विमर्श करना जरूरी नहीं समझा है।


अब स्थिति अत्यंत गंभीर स्थिति में पहुंचने के बाद मामला उनके संज्ञान में लाने का कोई औचित्य नहीं। मेयर का साफ कहना है कि एमएनए इस मामले पर भी पहले की तरह शासन से ही दिशा निर्देश लें।

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