प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में संवेदनाएं खत्म, एक हफ्ते से फर्श पर पड़ी है 70 साल की बुजुर्ग
उत्तराखंड के सबसे बड़े अस्पताल दून अस्पताल में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि यहां मरीज फर्श पर पड़ा रहता है, लेकिन कोई देखने-पूछने वाला नहीं है। ऐसी एक मरीज हैं 70 वर्षीय रानी। शनिवार को अमर उजाला संवाददाता अस्पताल पहुंचा तो वायरल से पीड़ित रानी इधर-उधर भटकती नजर आईं। भर्ती करना तो दूर की बात है उसे दवा तक नहीं मिल पाई। इलाज की उम्मीद में उसने फर्श पर ही लेटी हुई है। नर्सें और वार्ड बॉय रानी को कई बार अस्पताल परिसर से खदेड़ चुके हैं।
रानी मूल से टिहरी निवासी रानी के पति बाबूलाल का साल भर पहले निधन हो गया था। दोनों पति-पत्नी मजदूरी करते थे। उनकी एक बेटी है, जिसकी शादी हो चुकी है। पति की मौत के बाद रानी अकेली हो गई। उम्र के इस पड़ाव में शरीर में मजदूरी करने की ताकत भी नहीं बची।
रानी दून की गलियों में भीख मांगकर पेट भर रही है। रानी एक हफ्ते से वायरल से पीड़ित है। इलाज के लिए दून अस्पताल पहुंची लेकिन, डॉक्टर उसे भर्ती करने को तैयार नहीं हैं। बुखार से तप रही रानी रोजाना अस्पताल में एक कोने से दूसरे कोने में फर्श पर पड़ी रहती है। नर्सें और वार्डबॉय उसके साथ गाली-गलौज कर अमानवीय व्यवहार तक करते हैं। रात में उसे अस्पताल के बाहर खदेड़ दिया जाता है। फर्श पर लेटी रानी के आगे से रोजाना डॉक्टर, नर्सें और तीमारदार गुजरते हैं, लेकिन उसकी हालत देखकर किसी का दिल नहीं पसीजता।
सीएम ही हिदायत भी बेमानी
उल्लेखनीय है कि दून अस्पताल में बदहाली और लापरवाही का मुद्दा अमर उजाला कई बार उठा चुका है। हाल ही में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। लापरवाही पर उन्होंने दो जूनियर रेजीडेंट डॉक्टर और एक नर्स को सस्पेंड करने का आदेश भी दिया था। सीएम ने अस्पताल में गंदगी और स्टाफ के रवैये पर भी नाराजगी जताई थी। हालांकि, अस्पताल में मरीजों की परेशानियां बिल्कुल भी कम नहीं हुई हैं।
निदेशक चिकित्सा एवं शिक्षा डा. आशुतोष सयाना ने बताया कि अस्पताल पहुंचने वाले हर बीमार का इलाज करना डॉक्टरों की जिम्मेदारी है। अस्पताल में नर्सें और वार्डबॉय किसी भी मरीज से अभद्र व्यवहार नहीं कर सकते हैं। रानी को भर्ती कराने के आदेश दे दिए हैं। इसकी जांच की जाएंगी कि उसे अब तक भर्ती क्यों नहीं किया और किस कर्मचारी ने अभद्रता की।