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कोर्ट का फैसला, तलाक के बाद भी दर्ज हो सकता आर्थिक और घरेलू हिंसा का मुकदमा

Mon, 22 Apr 2019 10:10 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागेश्वर Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 22 Apr 2019 10:10 PM IST
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Domestic violence lawsuit can be registered even after divorce

महिलाएं तलाक के बाद भी घरेलू हिंसा का मुकदमा दर्ज कर परिवार के भरण पोषण का दावा अदालत में कर सकती हैं। ऐसे ही एक मामले में जिला न्यायालय की न्यायिक मजिस्ट्रेट सुमन ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए 12 साल से मायके में रह रही और चार साल पूर्व तलाक ले चुकी महिला को 1500 रुपये प्रतिमाह अदा करने का आदेश दिया है। अदालत ने मायके में रह रही पत्नी के साथ हो रहे व्यवहार को आर्थिक हिंसा के दायरे में रखते हुए यह आदेश दिया है।

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बागेश्वर की एक महिला अपने पति से 12 साल से अलग रह रही थी। 2015 में वह एकतरफा तलाक भी ले चुकी थी। अदालत ने पति को 1200 रुपये प्रतिमाह अदा करने के आदेश दिए थे लेकिन, इस बीच बेटी की उम्र 17 साल होने पर महिला को परिवार चलाने के लिए 1200 रुपये प्रतिमाह कम लगे।
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निर्भया प्रकोष्ठ की अधिवक्ता इंदिरा दानू ने तलाक व धारा 125 में भरण पोषण का आदेश होने के बाद भी घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दावा पेश किया। कहा कि यह आर्थिक हिंसा का मामला बनता है। न्यायिक मजिस्ट्रेट सुमन ने पति को 1500 रुपये प्रतिमाह भरण पोषण देने का आदेश दिया। ताजा आदेश के बाद अब पति को अब 2700 रुपये प्रतिमाह पत्नी व बेटी को अदा करने होंगे।
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सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के फैसले बने नजीर
न्यायालय में बहस के दौरान निर्भया अधिवक्ता इंदिरा दानू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने शबाना बनाम मो. तालिब अली के केस में तलाक के बाद भी महिला घरेलू हिंसा का मुकदमा दर्ज करते हुए भरण पोषण का आदेश दिया था। इसी तरह दिल्ली हाईकोर्ट ने सोम निखिल ध्यानी बनाम तान्या ध्यानी के केस में भी तलाक व 125 के भरण पोषण लेने के बाद भी महिला घरेलू हिंसा का मुकदमा दर्ज कर धारा 20 के तहत राहत प्रदान की थी। 


यह अपने तरह का पहला मामला है। जब 12 साल से पति से अलग रह रही व चार साल पूर्व तलाक ले चुकी महिला ने घरेलू हिंसा का मामला दर्ज करते हुए धारा 20 के तहत भरण पोषण (धनी अनुतोष) का दावा कर उसे अपने पक्ष में किया हो। यह एक नजीर है। सुप्रीम कोर्ट व दिल्ली हाईकोर्ट के पिछले आदेशों के क्रम में यह भी कहा गया है कि घरेलू हिंसा का कानून बनने से पूर्व भी यदि हिंसा हुई हो तो वह भी घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करने की अधिकारिणी होंगी। 
-इंदिरा दानू, वरिष्ठ अधिवक्ता, निर्भया बागेश्वर

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