जानते हैं, पसलियों से भी सुन सकते हैं आप
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हल्द्वानी में एसटीएच के प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने पहली बार पसली की हड्डी से कृत्रिम कान बनाने की कोशिश की है।
पहले चरण का ऑपरेशन कुशलतापूर्वक कर दिया गया है। प्लास्टिक सर्जन डॉ. हिमांशु सक्सेना ने बताया कि हल्द्वानी तीनपानी निवासी 11 वर्षीय अभिषेक को लेकर उसके अभिभावक उनके पास पहुंचे थे।
बच्चे का जन्म से ही दांयी तरफ का कान नहीं था।
कृत्रिम अंगों को कम ग्रहण करते हैं शरीर
इस पैदाइशी विकृति दूर करने के लिए कुछ विकल्प थे, इसमें पसली की हड्डी (सातवीं और आठवीं) निकालकर कान बनाना, दूसरा बना बनाया कान ही फिट कर देना, जिसे रात में निकाला भी जा सकता था।
लेकिन दूसरे मैटेरियल से बने कृत्रिम अंगों को शरीर ग्रहण कम ही करते हैं।
ऐसे में बच्चे की पसली से कान बनाने का फैसला किया। यह ऑपरेशन तीन चरणों में होता है।
पसली की हड्डी से ऐसे बनाया कान
पहले चरण में पसली की हड्डी निकालना और उसको एक तरह से फ्रेम की तरह फिट करना होता है।
इसके बाद दूसरे चरण में मांस में छेद कर फ्रेम को पहुंचाना और तीसरे में कान को आकार देना होता है।
इसी के तहत फर्स्ट फेज में पसली की हड्डी निकालकर कान का आकार तैयार कर लिया गया है।
इस तरह का ऑपरेशन हुआ पहली बार
यह ऑपरेशन करीब पांच घंटे चला। यह ऑपरेशन सबसे महत्वपूर्ण होता है। जल्द ही दूसरे-तीसरे चरण की सर्जरी कर कान पूरी तरह तैयार कर लिया जाएगा।
इस तरह का ऑपरेशन कुमाऊं के किसी भी सरकारी अस्पताल में संभवत: पहली बार हुआ है। पसली की हड्डी निकालने से शरीर पर कोई भी दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा।