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राजधानी में तो जिले के हाकिम की नहीं सुनते विभाग

Thu, 11 Jul 2019 02:09 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 11 Jul 2019 02:09 AM IST
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Do not listen to the head of the district in the capital
राजधानी में पटरी से उतरी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में विभागों के अधिकारी ही रुचि नहीं ले रहे हैं। पिछले दिनों नए जिलाधिकारी ने कई आदेश-निर्देश बाकायदा टाइम लाइन के साथ दिए थे, लेकिन उनमें से अभी तक किसी पर भी अमल नहीं हो पाया। हालात यह है कि नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग, खाद्य सुरक्षा और पेयजल निगम पर इनके फरमान का कोई असर नहीं हुआ। कोई विभाग, अधिकारी न होने की बात कह कर अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रहा है तो कोई बरसात शुरू होने की ओट लेकर अपनी सुस्ती पर पर्दा डाल रहे हैं।
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10 जुलाई तक गिरासू भवनों पर कार्रवाई के दिए थे निर्देश
जिलाधिकारी सी रविशंकर ने चार्ज संभालते ही बरसात में संभावित खतरों को देखते हुए कई आदेश-निर्देश दिए थे। इनमें सबसे अहम गिरासू भवनों पर कार्रवाई के लिए समय सीमा निर्धारित करते हुए तीन दिन का समय निर्धारित किया था। सात जुलाई को दिए गए इन आदेशों पर नगर निगम ने न कोई कार्रवाई की और न जिला प्रशासन को रिपोर्ट प्रेषित की।
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दरअसल, पिछले दिनों डीएम के निर्देश पर एडीएम प्रशासन ने निगम से गिरासू भवनों की स्थिति की रिपोर्ट मांगी थी। निगम की ओर से बताया गया था कि शहर में 47 गिरासू भवन हैं, जिनमें से कई मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं। इसके बाद प्रशासन ने केस विशेष की स्थिति की रिपोर्ट तलब की थी, लेकिन अब तक प्रशासन को यह रिपोर्ट प्रेषित नहीं की गई है। इसके बाद सात जुलाई को जिलाधिकारी ने नौ कामों के लिए समय सीमा निर्धारित की, जिनमें से इन भवनों पर कार्रवाई के लिए तीन दिन का समय दिया था। अपर जिलाधिकारी प्रशासन रामजीशरण शर्मा ने बताया कि अभी तक निगम की ओर से कोई रिपोर्ट नहीं मिली है और न किसी कार्रवाई की सूचना प्रशासन को दी है।
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अवैध सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर कार्रवाई नहीं
शहर में अवैध रूप से बिक रही सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग को दिए थे। कोटपा का काम देख रहेे एसीएमओ डॉ. यूएस चौहान को सीएमओ ने इस कार्रवाई की जिम्मेदारी सौंपी थी। लेकिन, अधीनस्थ अधिकारियों ने इस वजह से कार्रवाई नहीं की कि डॉ. चौहान छुट्टी पर थे।
जिलाधिकारी सी रविशंकर ने इन आदेशों को करीब दस दिन पहले जारी किया था। अवैध रूप से इस तरह के उत्पादों की बिक्री का मामला अमर उजाला ने भी प्रमुखता से उठाया था, लेकिन इस पर प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की। हालांकि, इस बीच बाट माप विभाग वालों ने जरूर थोड़ी बहुत कार्रवाई कर इतिश्री की। छापा पड़ता देख कई दुकानदार मौके से भाग निकले थे। अब डॉ. चौहान छुट्टी पर गए तो स्वास्थ्य विभाग ने आदेशों को हल्के में ले लिया। मंगलवार को डॉ. चौहान ड्यूटी पर लौटे, लेकिन इन आदेशों को उन्होंने देखा तक नहीं। डॉ. चौहान का कहना है कि अब आदेशों पर कार्रवाई करेंगे। कार्रवाई कब करेंगे इसकी समय सीमा उन्होंने भी नहीं बताई।
अधिकारियों ने अब तक नहीं लिए पनीर के सैंपल
त्योहारी सीजन पर खाद्य सुरक्षा विभाग की अचानक दौड़ शुरू हो जाती है। दूध-मावे के सैंपल लेकर कार्रवाई की इतिश्री की जाती है। इससे अलग शादियों का सीजन आता है तो दो चार सैंपल लिए जाते हैं। लेकिन, इसके अलावा पूरे साल खाद्य सुरक्षा विभाग कागजों में उलझा रहता है। पिछले दिनों जिलाधिकारी ने एक शिकायत पर पनीर के सैंपल लेने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की।
डीएम को की एक शिकायत में बताया गया था कि शहर में मिलावटी पनीर की खेप पहुंच रही है। डीएम ने इसे प्राथमिकता में रखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग को तत्काल सैंपलिंग करने के निर्देश दिए थे। बात एक सप्ताह पहले की हो गई है। बावजूद इसके विभाग ने अब तक इस पर कार्रवाई नहीं की। विभाग दूध के सैंपल जरूर ले रहा है। बताया जा रहा है कि अगले माह हरियाली तीज और रक्षा बंधन को मद्देनजर रखते हुए यह कार्रवाई की जा रही है। सूत्र ने बताया कि पनीर की सैंपलिंग शादियों के सीजन पर की जाती है। इधर, इस मामले में जिला अभिहीत अधिकारी जीसी कंडवाल ने बताया कि पनीर की सैंपलिंग जल्द की जाएगी।
72 घंटे बाद भी सड़कों पर फैला मलबा नहीं हटाया
समय सीमा पेयजल निगम को भी दी थी। बात सड़कों पर पाइपलाइन बिछाए जाने के बाद फैले मलबे को लेकर थी। जिलाधिकारी ने 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन 72 घंटे बाद भी स्थिति जस की तस है। कई जगहों पर मलबे ने कीचड़ का रुप ले लिया है।

सोमवार को जिलाधिकारी ने सड़कों पर फैले मलबे का संज्ञान लिया था। यह मलबा अमृत योजना के तहत बिछाई जाने वाली पेयजल लाइनों के बाद फैला हुआ था। ठेकेदार मनमाने तरीके से मलबा उठाते हैं और कई बार इसे फैला ही छोड़ जाते हैं। सड़कों पर गड्ढों को पाटने का काम भी ठीक ढंग से नहीं किया जाता। बरसात हुई तो यह मलबा कीचड़ बन गया। अब यहां से जो गुजरा कीचड़ में सन गया। बावजूद इसके ठेकेदारों का रवैया नहीं बदला। उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम के अधिशासी अभियंता केंद्रीय भंडार शाखा जीपी सिंह ने बताया जिन जगहों से मलबा नहीं हटाया है वहां बरसात आने के कारण काम देर से शुरू हुआ है। ठेकेदारों को आदेशों से अवगत कराया है, अमल न होने पर कार्रवाई करेंगे।
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