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उत्तराखंड CM और हरक के बीच निकली 'तलवारें'

Wed, 03 Sep 2014 03:17 PM IST
Updated Wed, 03 Sep 2014 03:17 PM IST
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dispute between harish and harak singh rawat

उत्तराखंड के दो क्षत्रपों के बीच एक बार फिर तलवारें म्यान से बाहर आ गई हैं। मुख्यमंत्री हरीश रावत और मंत्री हरक सिंह रावत के बीच मंगलवार को हुई तल्ख बयानबाजी ने एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति को गरम कर दिया है।

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वहीं अब तक अपनी बारी के इंतजार में बैठे सीएम कैंप के विधायक भी सरकार की कार्यप्रणाली और आपदा से जुड़े कामों पर सवाल उठा रहे हैं। अभी तक विरोधी कैंप के बयानों को हंसकर टालने और गोलमोल जवाब देने वाले मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मंत्री हरक सिंह रावत के बयानों पर सीधी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
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दरअसल केदारनाथ की विधायक शैला रानी रावत के इस बयान पर कि सीएम को कैबिनेट की बैठक केदारघाटी में नहीं बुलाई जानी चाहिए। इस पर मंत्री हरक सिंह रावत ने मीडिया में बयान दिया है कि केदारघाटी में कैबिनेट की बैठक का कोई औचित्य नहीं है।
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ऐसा लगेगा कि सारे मंत्री वहां पर्यटक के तौर पर जा रहे हैं। हमें देहरादून में ही कैबिनेट की बैठक बुलानी चाहिए थी जिसका एजेंडा और पूरा फोकस केदारघाटी से जुड़ी योजनाओं पर होना चाहिए।

फैसला तो सीएम को ही करना है'

dispute between harish and harak singh rawat

हरक सिंह के बयान पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मीडिया से कहा मंत्री हैं सलाह दे सकते हैं लेकिन फैसला तो सीएम को ही करना है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि केदारघाटी में कैबिनेट हर हाल में होकर रहेगी। ताकि वहां के लोगों को भी पता चले कि सरकार उनके लिए कितनी गंभीर है।

हम वहां के लोगों के साथ खड़े होकर उनके समस्याओं को देखना चाहते हैं। वहां की जमीनी हकीकत जानकर ही योजनाओं को मूर्त रूप दिया जाएगा। दूसरी ओर हरीश रावत की मुश्किलें अब अपने बढ़ाने लगे हैं।

'मुख्यमंत्री को देना चाहिए इस्तीफा'
सीएम खेमे के कहे जाने वाले विधायक मयूख महर ने तो अपने इलाके में विकास कार्य ठप होने को लेकर दो अक्तूबर से धरने पर बैठने की धमकी दी है। सीएम का कहना है कि उनके इलाके की समस्याएं होंगी लोगों कहते होंगे तभी विधायक ऐसा करने को मजबूर हैं। हम बात कर उनकी समस्याएं दूर करेंगे।

इसी बीच भाजपा सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने केंद्रीय महामंत्री संगठन रामलाल के बयान को सही ठहराते हुए कहा कि सीएम ने बिना बात भाजपा पर आरोप लगा तूल दिया था। सरकार के मंत्री और विधायकों की नाराजगी चरम पर है। मुख्यमंत्री को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए।

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