{"_id":"219e4e77166cb3f0ec25bbba37d853d7","slug":"disaster-put-the-burden-on-the-shoulders-of-children","type":"story","status":"publish","title_hn":"आपदा ने डाला बच्चों के कंधों पर बोझ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आपदा ने डाला बच्चों के कंधों पर बोझ
संदीप थपलियाल
Updated Tue, 23 Jul 2013 08:54 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मंदाकिनी, मधुगंगा और कालीगंगा (सरस्वती नदी) की बाढ़ से गुप्तकाशी-कालीमठ-चौमासी मोटर मार्ग तहस-नहस हो गया है। कुछ स्थानों पर मोटर पुल का ढांचा खड़ा है।
विज्ञापन
उत्तराखंड आपदा की हर अपडेट के लिए क्लिक करें
रास्ता टूटने के कारण लोग कालीमठ घाटी के कालीमठ, जग्गी बगवान, बेडूला, कुणजेठी, चौमासी, स्यांसू, कोटमा, कविल्ठा, जाल तल्ला, जाल मल्ला, चौमासी और चिलौंड गांव से पैदल 10 से 40 किमी पहाड़ी चढ़कर, नदी-गदेरे पार कर गुप्तकाशी से राहत सामग्री ढो रहे हैं।
विज्ञापन
कालीमठ कुणजेठी गांव की अर्चना और अंजली गुप्तकाशी से राहत सामग्री ला रही हैं। अर्चना कक्षा 10 में पढ़ती है। उसके पिता का केदारनाथ में लॉज था। पिता घर पर थे। 20 वर्षीय भाई पवन लॉज चला रहा था, लेकिन केदारनाथ जलप्रलय के बाद से वह लापता चल रहा है। वहीं अर्चना कक्षा आठ में पढ़ती है। केदारनाथ हादसे में पिता पशुपतिनाथ और लॉज बह गए। अंजली बताती है कि उसका बड़ा भाई दिल्ली रहता है। उससे छोटे दो भाई हैं।
विज्ञापन
गुप्तकाशी जाना पड़ रहा है
घर में सबसे बड़ी होने के कारण उसे राहत सामग्री के लिए गुप्तकाशी जाना पड़ रहा है। चिलौंड गांव के दीपक का चयन भारतीय सेना में हुआ है। इसके लिए उसे 28 जुलाई को गढ़वाल रेजीमेंट सेंटर लैंसडौन में फिजीकल टेस्ट देने जाना है, लेकिन ऐसी स्थिति में टेस्ट कैसे दें, कुछ समझ में नहीं आ रहा है।
खबर पर राय देने के लिए यहां क्लिक करें