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उत्तराखंड: डायबिटीज से पीड़ित मरीज की मौत, संक्रमित किडनी निकालने पर हंगामा

Tue, 22 Jan 2019 09:21 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हल्द्वानी
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हल्द्वानी Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 22 Jan 2019 09:21 AM IST
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Diabetic patient death in haldwani

साईं अस्पताल में ऑपरेशन के दो दिन बाद सोमवार सुबह एक मरीज की मौत होने पर उसकी पत्नी ने दो लोगों पर डॉक्टरों की मिलीभगत से किडनी निकलवाने का आरोप लगाकर अस्पताल में जमकर हंगामा किया।

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पत्नी का आरोप है कि किडनी निकालने की साजिश में शामिल दो लोगों ने फर्जी भाई-बहन बनकर उसके पति को अस्पताल में को भर्ती कराया था । घटना की जांच कराने के लिए परिजनों ने कोतवाली में तहरीर दी है। चूंकि घटनास्थल मुखानीथाना क्षेत्र में हैं, लिहाजा तहरीर को वहां भेजा जा रहा है। 
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 शिकायत के विपरीत अस्पताल प्रबंधन ने किड़नी निकालने की साजिश के आरोप का खारिज करते हुए का दावा किया कि  डायबिटीज के चलते मरीज की किडनी में संक्रमण हो गया था, मरीज की जान बचाने के लिए बाईं तरफ की एक किडनी निकाली गई। 
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जानकारी के मुताबिक अल्मोड़ा जिले के रानीखेत पपना निवासी नरेंद्र सिंह रावत की सोमवार सुबह साईं अस्पताल में मौत हो गई। नरेंद्र ने 2005 में देवलचौड़ बंदोबस्ती में मकान बनवाया था और परिवार के साथ रहते थे। उनकी श्यामा गार्डन के पास गारमेंट्स की दुकान है।

कुछ माह से पत्नी दीपा से उनकी दूरियां बढ़ गईं थीं। इन दिनों वे अकेले ही रहते थे। अस्पताल में मौजूद सतेश्वरी रावत ने बताया कि नरेंद्र सिंह उसके भाई सुरजीत के दोस्त थे। भाई के कहने पर उसने नरेंद्र को अस्पताल में भर्ती कराया था। ऑपरेशन से पहले नरेंद्र ने अपने परिवार से बात करने को कहा था,  मगर कोई नहीं आया। 

साईं अस्पताल के डॉ. संजय कुमार ने बताया कि शनिवार को उनके पास दो लोग नरेंद्र को लेकर गंभीर अवस्था में आए थे। भर्ती कराने वालों ने खुद को भाई-बहन बताया था। मरीज डायबिटीज के साथ सीवियर सेफ्टीशॉक से पीड़ित था। दस हजार रुपये जमा करने के बाद इलाज शुरू हुआ। जांच से पता चला कि किडनी में संक्रमण है।

अधिक देर करने पर जहर शरीर में फैल सकता था। काफी विचार करने के बाद बाईं तरफ की एक किडनी निकाली गई। ऑपरेशन से पहले परिजनों को फोन किया गया था लेकिन वे नहीं आए।  

किडनी निकालने के बाद उसे चंदन डायग्नोसिस्ट सेंटर में बायोप्सी टेस्ट के लिए भेजा गया है। अस्पताल के प्रबंध निदेशक मोहन सती ने दावा किया कि इलाज मेें किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती गई। 
 
पत्नी ने उठाए भर्ती कराने वाली महिला पर सवाल
नरेंद्र सिंह की पत्नी दीपा रावत ने पति को भर्ती कराने वाली महिला सतेश्वरी की भूमिका पर संदेह जताया है। आरोप लगाया कि सतेश्वरी नरेंद्र सिंह की बहन नहीं है। उसने फर्जी बहन बनकर दस्तखत किए हैं। दीपा ने कहा कि वह अस्पताल में रविवार को आईं थी।

बताया गया कि उसके पति की आंख का ऑपरेशन है। इस मामले में जांच कर कार्रवाई होनी चाहिए। इधर, मुखानी थानाध्यक्ष नंदन सिंह रावत का कहना है कि रजिस्टर में नरेंद्र की पत्नी दीपा ने दस्तखत किए हैं। आरोपों की जांच की जाएगी। प्रथमदृष्टया अस्पताल में अब तक कोई गड़बड़ी सामने नहीं आई है।

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