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IAS नहीं, चिकित्सा संवर्ग से ही होगा DG हेल्थ, ये नाम रेस में

Wed, 18 Jan 2017 10:25 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 18 Jan 2017 10:25 PM IST
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DG health will be from Medical cadre.
मुख्य सचिव एस. रामास्वामी

उत्तराखंड के महानिदेशक चिकित्सा एवं परिवार कल्याण (डीजी) के पद पर चिकित्सा संवर्ग के अधिकारी को ही बैठाया जाएगा। इस संबंध में मुख्य सचिव एस. रामास्वामी से प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ को आश्वासन मिला है। वरिष्ठता के आधार पर चार निदेशकों में से किसी एक को डीजी बनाया जाएगा। इस संबंध में डॉ. आरएस असवाल और डॉ. डीएस रावत के नाम पर विचार किया जा रहा है।

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महानिदेशक डॉ. कुसुम नरियाल का स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का आवेदन स्वीकृत होने के बाद किसी आईएएस संवर्ग के अधिकारी को डीजी बनाए जाने का प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ पुरजोर विरोध कर रहा है। बुधवार को संघ का प्रतिनिधिमंडल अध्यक्ष डॉ. एसके गोस्वामी की अगुवाई में मुख्य सचिव एस. रामास्वामी से मिला और चिकित्सा संवर्ग के अफसर को डीजी बनाए जाने की मांग की।
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डॉ. गोस्वामी ने बताया कि मुख्य सचिव ने आश्वासन दिया है कि चिकित्सा संवर्ग के अफसर को ही डीजी बनाया जाएगा। संघ ने शासन को नोटिस भी दिया है, जिसमें कहा गया कि संघ के संज्ञान में आया है कि किसी आईएएस संवर्ग के अफसर को डीजी बनाया जा रहा है।
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अगर कोई आईएएस संवर्ग का अफसर डीजी बनता है तो संघ आंदोलन छेड़ेगा। मुख्य सचिव से भेंट के बाद चिकित्सा संघ की महानिदेशालय में बैठक हुई। बैठक में मुख्य सचिव हुई वार्ता के संबंध में बताया गया। मुख्य सचिव से मिले प्रतिनिधिमंडल में डॉ. आरएस असवाल, डॉ. नरेश नपलच्याल, डॉ. मेघना असवाल, डॉ. डीएस रावत आदि शामिल रहे।

छह महीने रहना होगा कार्यवाहक महानिदेशक

DG health will be from Medical cadre.
ऑफिस - फोटो : demo pics

हाल ही में पदोन्नत हुए चार स्वास्थ्य निदेशकों में से अगर किसी को महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण बनाया जाएगा तो उसे छह महीने कार्यवाहक डीजी रहकर काम करना पड़ेगा।

सेवा नियमावली के मुताबिक पदोन्नति के बाद अगली डीपीसी के लिए छह महीने तक अधिकारी को उसी पद पर रहकर काम करना जरूरी होता है। इसी महीने शासन ने इन चार अपर निदेशकों को निदेशक के पद पर प्रोन्नत किया है।

वरिष्ठता क्रम को देखें तो सिर्फ डॉ. आरएस असवाल को ही निदेशक के पद पर पदोन्नत हुए छह महीने पूरे हुए हैं। अगर डॉ. डीएस रावत को डीजी बनाया जाता है तो उन्हें छह महीने कार्यवाहक के रूप में रहना होगा। इसके बाद डीपीसी हो पाएगी।

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