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Dehradun News: विकासनगर के मंदिरों में उमड़े भक्त, आज माता कात्यायनी का होगा पूजन

Sun, 14 Apr 2024 03:56 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 14 Apr 2024 03:56 AM IST
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Devotees gathered in the temples of Vikasnagar, Mata Katyayani will be worshiped today
चैत्र नवरात्र के पांचवें दिन मंदिरों और घरों में मां दुर्गा के ममतामयी स्वरूप स्कंदमाता का पूजन किया गया। व्रतियों ने मां को धूप, अक्षत, पुष्प, फल, बताशा, पान, लौंग, इलायची अर्पित किए। उसके बाद आरती की। माता के दर्शन और पूजन के लिए पछवादून और जौनसार बावर के मंदिरों में दिनभर भक्तों की भीड़ उमड़ती रही।
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व्रतियों ने सुबह स्नान के बाद ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते।। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः का जाप कर माता का ध्यान किया। माता की आरती कर परिवार में सुख, चैन, समृद्धि और आरोग्य की कामना की।
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विकासनगर स्थित सनातन धर्म मंदिर, काली माता मंदिर, भोजावाला स्थित दुर्गा मंदिर, गुडरिच स्थित हनुमान मंदिर, सहारनपुर रोड स्थित वैष्णो देवी मंदिर, कैनाल रोड स्थित प्राचीन गणेश मंदिर आदि जगहों पर भक्त सुबह से शाम तक माता के दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते रहे।
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कालसी स्थित महाकाली मंदिर में भी माता के दर्शन और पूजन के बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। सेलाकुई स्थित बाला सुंदरी, सुद्धोवाला स्थित डाटकाली, धूलकोट स्थित ज्वाला माता, शाकुंभरी देवी, हरिपुर स्थित मां वैष्णो देवी मंदिर में दिनभर भक्तों का तांता लगा रहा। मंदिरों और घरों में दिनभर कीतर्न-भजन का दौर चलता रहा।

सेलाकुई स्थित ज्वाला जी मंदिर के पुजारी पंकज गोदियाल ने बताया कि मां स्कंदमाता अत्यंत ही ममतामयी हैं। जैसे एक माता अपनी संतान का ध्यान रखती है, वैसे ही मां स्कंदमाता की कृपा सदैव अपने भक्तों पर रहती है। बताया कि माता के पूजन से खासकर विद्यार्थियों को बुद्धि और ज्ञान मिलता है।
मां कात्यायनी ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं। मान्यता है कि श्रीकृष्ण भगवान को प्राप्त करने के लिए गोपियों ने मां कत्यायनी का पूजन किया था। मान्यता के अनुसार मां कत्यायनी के पूजन से सुखी वैवाहिक जीवन की प्राप्ति होती है।

सुबह स्नान के उपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजन का संकल्प लें। पीले वस्त्र धारण कर माता का पूजन करें। मां को रोली, कुमकुम, अक्षत, पीले पुष्प और पीले मिष्ठान का भोग चढ़ाएं। कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी।। ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥ 2- कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरी। नन्दगोपसुतं देवी, पति में कुरु ते नमः का जाप करें। उसके माता की आरती करें।
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