देव भूमि के आपदा पीड़ितों के लिए ‘देव कुटी’
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आईआईटी रुड़की के पासआउट इंजीनियरों ने ऐसी कुटी तैयार की है जो आपदा में बेघर हो चुके लोगों के पुनर्वास जैसे कठिन काम को बेहद आसान कर सकती है। इंजीनियरों ने इसे देव कुटी नाम दिया है। खास बात यह है कि यह कुटी भूकंपरोधी है और बेहद कम खर्च में कुछ ही घंटों में तैयार हो जाती है। इसे पहाड़ पर ले जाना भी बेहद आसान है।
आईआईटी स्टूडेंट एल्युमिनाई एसोसिएशन ने यह कुटी कुंआवाला स्थित दून वैली डिस्टिलरी में मीडिया के सामने पेश की। एसोसिएशन के प्रधान डा. जवाहर लाल गैंधर ने बताया कि इस कुटी की खास बात यह है कि रेडीमेड मैटेरियल से इसे जोड़कर खड़ा करना आसान है। इसे आसानी से पहाड़ के दुर्गम इलाकों में भेजा जा सकता है।
कीमत करीब 1 लाख
एक कुटी करीब 90 हजार से एक लाख रुपये में तैयार हो जाती है, जिसमें खाद्य सामग्री और बर्तन भी शामिल हैं। यह मॉडल कुटी पहाड़ के एक परिवार की सहायता के लिए भेजी जाएगी। उन्होंने स्वयंसेवी संस्थाओं से पुनर्वास कार्यों में इस कुटी के इस्तेमाल की अपील की है।
एसोसिएशन के पदाधिकारी और ऊर्जा पुरुष के नाम से मशहूर डा. भूपिंदर सिंह ने इस कुटी को ऊर्जावान भी बना दिया है। इसमें सोलर पैनल लगाया है, जिससे जहां भी यह कुटी रखी जाएगी, वहां बिजली कनेक्शन की आवश्यकता नहीं होगी। इस मौके पर दून वैली डिस्टिलर्स के मालिक गोपाल हवेलिया और एसोसिएशन के सदस्य दिनेश सिंह पंवार मौजूद रहे।
यह है खासियत
- कुटी में एक सोलर पैनल लगाया गया है, जो कि एक लाइट और एक पंखा चला सकता है।
- एक सोलर लालटेन भी दी जा रही है, जिसमें ऊपर छोटा सा सोलर पैनल है और नीचे एक जेनरेटर लगा है। इस घुमाते ही बैटरी चार्ज हो जाती है।
- पानी इकट्ठा करने के लिए इसमें 200 लीटर पानी की टंकी दी गई है।
- कुटी 10 फिट लंबी और 12 फिट चौड़ी है। कुटी दस वर्षों तक मजबूती से खड़ी रह सकती है।