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देहरादून में साइंस सिटी के लिए मिलेंगे 190 करोड़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 22 Jan 2018 09:37 AM IST
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केंद्र सरकार देहरादून में साइंस सिटी के लिए 190 करोड़ रुपये देगी। इसके साथ ही अन्य शहरों में जनसंख्या के अनुसार दस से तीस करोड़ रुपये की लागत से साइंस सिटी की स्थापना के लिए केंद्र ने सकारात्मक रुख दिखाया है।
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रविवार को मुख्यमंत्री आवास पर केंद्रीय संस्कृति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. महेश शर्मा के साथ वन, पर्यावरण एवं संस्कृति विभागों के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में राज्य में तीन नए संग्रहालयों के निर्माण को भी हरी झंडी दी गई।
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बैठक में पौड़ी जनपद में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के जीवन पर 11 करोड़ की लागत से संग्रहालय, टिहरी में भागीरथी नदी के निकट 20 करोड़ की लागत से गंगा संग्रहालय तथा अल्मोड़ा में उदय शंकर अकादमी में संग्रहालय निर्माण पर केंद्रीय मंत्री ने सैद्धांतिक सहमति प्रदान की है। इसके साथ ही देहरादून में केंद्र सरकार ने शत प्रतिशत वित्त पोषित एक विशाल साइंस सिटी की सहमति भी प्रदान की है। राज्य सरकार ने साइंस सिटी के लिए भूमि का चयन कर लिया है।
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बैठक में वन विभाग के विभिन्न मुद्दों पर भी व्यापक चर्चा हुई। केंद्रीय राज्यमंत्री के समक्ष कोटद्वार-रामनगर कंडी मार्ग का विषयउठाया गया। इस पर उन्होंने सकारात्मक रुख दिखाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कंडी मार्ग के लिए ग्रीन रोड सहित सभी पर्यावरण अनुकूल विकल्पों पर काम कर रही है। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट सहित अन्य विशेषज्ञ संस्थाओं की सलाह भी ली जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कंडी मार्ग को उत्तराखंड की जनता और यहां के पर्यटन के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। वहीं, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (वास्तविक नियंत्रण रेखा) के 100 किमी के भीतर वन क्षेत्र से संबंधित विषय पर निर्णय लेने के लिए राज्य सरकार को अधिकार प्रदान किए जाने पर विचार किया जा रहा है। उत्तराखंड के संदर्भ में भी इस विषय पर शीघ्र ही दिशा-निर्देश भेजा जाएगा। राज्य सरकार ने एक हेक्टेयर तक की वन भूमि हस्तांतरण के अधिकार को अगले पांच वर्ष के लिए विस्तारित करने की मांग की।
इसके साथ ही आपदा प्रभावित जनपदों में पांच हेक्टेयर तक की वन भूमि हस्तांतरण का अधिकार जो वर्ष 2016 में समाप्त हो गया था, उसे भी अगले पांच वर्ष के लिए राज्य सरकार को पुन: प्रदान करने की मांग की। केंद्रीय राज्यमंत्री ने दोनों ही मुद्दों पर सकारात्मक रुख दिखाया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव वन एवं पर्यावरण डॉ. रणवीर सिंह, प्रमुख वन संरक्षक आरके महाजन, अपर सचिव मुख्यमंत्री आशीष श्रीवास्तव एवं निदेशक संस्कृति बीना भट्ट सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
इको सेंसिटिव जोन को लेकर मांगी राहत
वन विभाग के अधिकारियों ने केंद्रीय राज्यमंत्री को भागीरथी इको सेंसिटिव जोन के उन प्रावधानों से भी अवगत कराया, जिन पर राज्य की आवश्यकता के अनुरूप लचीला रुख अपनाते हुए संशोधन की आवश्यकता है। कैंपा एक्ट-2016 की विचाराधीन नियमावली में पर्वतीय प्रदेशों की समस्या और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नियम बनाने का अनुरोध किया गया। वन विभाग की ओर से बताया गया कि विचाराधीन नियमावली में जल संरक्षण के कार्य, भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों का उपचार और मानव-वन्य जीव संघर्ष जैसे विषयों को सम्मिलित नहीं किया गया है। बैठक में बताया गया कि एक हजार मीटर से अधिक की ऊंचाई पर स्थित चीड़ के घने जंगलों में सूर्य की किरणें नीचे तक नहीं पहुंच पा रही है। इससे कार्बन सीक्वेस्ट्रशन (कार्बन पृथक्करण) प्रभावित हो रहा है। इसके लिए ऊंचाई पर स्थित पेड़ों की नियंत्रित छटाई की आवश्यकता है। हालांकि, 1986 से एक हजार मीटर से अधिक ऊंचाई पर पेड़ कटान की अनुमति नहीं है।