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देहरादून: उत्तराखंड वन विभाग के दफ्तरों में हाथी दांत के ढेर, फाइलों में नियम... अब तक शुरू नहीं हुआ पालन

Thu, 05 Nov 2026 06:24 AM IST
दुष्यंत शर्मा विजेंद्र श्रीवास्तव, देहरादून
विजेंद्र श्रीवास्तव, देहरादून Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 05 Nov 2026 06:24 AM IST
सार

हैरानी की बात यह है कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने तीन साल पहले वन्यजीव अंगों के निपटान के लिए वन्यपशु वस्तु का वन्यजीव निपटान नियम-2023 बनाया था, लेकिन अब तक इसका पालन शुरू नहीं हुआ।

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Dehradun: Piles of ivory in Uttarakhand forest department offices, rules in files
फाइल चित्र - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लैंसडौन वन प्रभाग में हाथी दांत चोरी का मामला सामने आने के बाद वन महकमे में खलबली मची है। हैरानी की बात यह है कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने तीन साल पहले वन्यजीव अंगों के निपटान के लिए वन्यपशु वस्तु का वन्यजीव निपटान नियम-2023 बनाया था, लेकिन अब तक इसका पालन शुरू नहीं हुआ। हाल ही में वन मुख्यालय ने वन प्रभागों से हाथी दांतों की जानकारी मांगते हुए इस दिशा में कार्रवाई शुरू की है।

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वन विभाग तस्करों से बरामद वन्यजीव अंगों को अपने कार्यालयों में सुरक्षित रखता है। इसके अलावा आपसी संघर्ष में मरने वाले वन्यजीवों, मृत मिले पशुओं और पेड़ आदि से टकराने या अन्य कारणों से टूटकर गिरे हाथी दांतों को भी कार्यालयों में रखा जाता है। स्थिति यह है कि वन विभाग के विभिन्न कार्यालयों में सैकड़ों हाथी दांत जमा हैं। इनमें कुछ मामले करीब ढाई दशक पुराने भी बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, राजाजी टाइगर रिजर्व के विभिन्न कार्यालयों में करीब 215 हाथी दांत रखे हैं। वहीं, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) में भी 140 से अधिक हाथी दांत होने की बात कही जा रही है।
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लैंसडौन वन प्रभाग की लालढांग रेंज में 15 हाथी दांत रखे थे, जिनमें से पांच चोरी हो गए। इसी तरह अन्य वन प्रभागों में भी हाथी दांत रखे होने की संभावना है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वन्यपशु वस्तु का वन्यजीव निपटान नियम-2023 में कमेटी गठित कर वन्यजीव अंगों के निपटान की प्रक्रिया तय की थी। इसके बावजूद तीन साल तक नियमों पर अमल नहीं हुआ। अब चोरी की घटना के बाद वन महकमे ने इस दिशा में कार्रवाई तेज की है।
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दो प्रारूपों पर मांगी गई जानकारी
प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव कार्यालय ने प्रभागों और टाइगर रिजर्व में दो प्रारूपों में हाथी दांत की जानकारी मांगी है। इसमें एक मामले में हाथी दांत के उन मामलों की जानकारी देनी है, जो प्रकरण कोर्ट से जुड़े नहीं हैं। दूसरे प्रारूप में कोर्ट से जुड़े मामले की जानकारी देनी है। यह जानकारी मिलने के बाद मौके पर टीम को भेजकर सत्यापन कराया जाएगा। इसके बाद निपटान से जुड़ी आगे की कार्रवाई तय कमेटी बनाते हुए की जाएगी।


इस कमेटी में राजस्व विभाग व अन्य लोग भी शामिल होंगे। इस संबंध में अपर प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव विवेक पांडे ने बताया कि वनाधिकारियों से उनके कार्यालयों में कितने हाथी दांत हैं, उसकी सूचना दो प्रारूपों में मांगी गई है। सूचना आने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई अमल में लायी जाएगी।

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