पहाड़ी टोपी और जुड़े हाथ कह गए देहरादून के नए मेयर 'गामा' की सहज कहानी
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जो ख्वाब कभी पलकों पर नहीं सजा, जिस गुलाबी दिन की कभी कल्पना नहीं की, जिंदगी के शुरुआती दिन जीविका को किसी तरह चलाने में काटे, उसके लिए रविवार की नर्म और चमकदार सुबह एक नई सौगात लेकर आई। एक नई जिम्मेदारी को ओढ़ने और सहेजने का वक्त निकट था। राज्य के सबसे बड़े नगर निगम में लगे भगवा पांडाल में रणसिंगा की गूंज थी। ढोल दमाऊ की थाप के बीच गामा जिंदाबाद के नारे थे।
नए मेयर के इंतजार में मौजूद समर्थक, अधिकारी, सुरक्षाकर्मी और हाथ में दंड लिए निगम का खास कर्मी। पांडाल में बज रहा गीत दिल दिया है जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए..। फूलों के हार से उड़ती खुशबू अहसास करा रही थी कि दून को एक नया मेयर मिल गया। इसे वक्त की चाल ही कहेंगे कि चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री बन गया और दून में अपने जीवनयापन के लिए कभी पान की स्टाल लगाने वाला राज्य के सबसे बड़े निगम का मेयर की शपथ ले रहा था। रणसिंगा और ढोल दमाऊ की तेज होती थाप ने अहसास करा दिया कि नए मेयर के कदम पड़ चुके हैं। सिर पर पहाड़ी काली टोपी, माथे पर लाल तिलक, हल्का भगवा रंग का कुर्ता, कंधे पर ऊनी शॉल, हाथ जोड़े, होठों पर तैरती हल्की मुस्कान और पांडाल में तेज हलचल। जिंदाबाद, वंदे मातरम और भारत माता की जय के नारों के बीच समर्थक मेयर के लिए रास्ता बना रहे थे।
हाथ जोड़कर अभिवादन का सिलसिला करबी 25 मिनट तक चला
पहले से मौजूद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट, राज्यमंत्री धन सिंह रावत और नवनिर्वाचित पार्षदों का हाथ जोड़कर अभिवादन का सिलसिला करबी 25 मिनट तक चला। नए मेयर वीआईपी सर्किट से निकलकर पीछे बैठी जनता का एक-एक कर धन्यवाद करना भी नहीं भूले। जुबां खामोश थी। चेहरे की मुस्कान और जुड़े हाथ जीत का शुक्रिया अदा कर रहे थे।
शपथ के तय समय 11 बजे से ठीक पहले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत अपने पुराने साथी गामा के साथ खुशी के पल बांटने पहुंचे। दोनों की नजरें मिलीं और अधरों पर विजयी मुस्कान तैर गई। दोस्ती का हक अदा करने के बाद ऐतिहासिक दिन का यह मिलन सीएम और गामा की एक दूसरे के प्रति निष्ठा की कहानी भी कह गया। सीएम खुलकर अपनी भावनाएं व्यक्त कर रहे थे तो गामा विनम्र, कृतज्ञ और संकोची बने रहे।
मुख्यमंत्री और अजय भट्ट के बीच बैठे मेयर को सांसद रमेश पोखरियाल निशंक किताब भेंट करने से नहीं चूके। साथ मेें मंत्री मदन कौशिक, विधायक विनोद चमोली, हरबंस कपूर, उमेश शर्मा काऊ, राजेश शुक्ला, खजानदास थे। एक घंटे से सिर्फ मुस्कान के जरिये अपने भावों का इजहार कर रहे मेयर ने विश्वासपूर्वक शपथ लेने के बाद चुप्पी तोड़ी। पटाखे और नारेबाजी के शोर के बीच माइक पकड़ सीएम समेत सभी बड़े नेताओं को विनम्रतापूर्वक मंच पर बुलाया। फूलों के बड़े हार के अंदर सभी ने एकजुटता दिखाकर फोटो खिंचवाई।
सरल और सहज अभिव्यक्ति
इसके बाद परिवार और समर्थकों संग आए नवनिर्वाचित पार्षदों का मंच से पांडाल तक सेल्फी का दौर चला। मेयर मंच पर पार्षदों के साथ फोटो सेशन में शामिल हुए। अपने पहले शो में मेयर गामा गंभीर और निश्चल नजर आए। कोई तड़क-भड़क नहीं। एकदम शालीन, न कोई स्टाइल न बनावट। सरल और सहज अभिव्यक्ति। इधर, रणसिंगा और ढोल दमाऊ की गूंज भी थम गई।
सुबह से तैनात पुलिसकर्मी भी खड़े-खड़े सुस्ताने लगे। भोजन कर चुके लोगों ने भी घर की राह पकड़ी। जाड़ों की गुनगुनी धूप सर्द हवाओं के पारे में घुलने लगी। नगर निगम परिसर में सांझ ढलने लगी थी, लेकिन शहर के प्रथम व्यक्ति की जिम्मेदारियों की एक नई सुबह आकार ले रही थी। शपथ के बाद झुकी-झुकी नजर वाले गामा की पलकों में अब एक नया ख्वाब सजने लगा। एक छोटी सी आशा... सुंदर देहरादून और अपने देहरादून की।