देहरादून नारी निकेतन यौन शोषण मामला: मुख्य आरोपी गुरदास को 7 साल कैद की सजा
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उत्तराखंड के चर्चित नारी निकेतन यौन शोषण मामले में अपर जिला जज षष्ठम धर्म सिंह की अदालत ने सोमवार को नारी निकेतन में मूक बधिर संवासिनी से दुष्कर्म, गर्भपात और साक्ष्य मिटाने के नौ दोषियों को सजा सुना दी। दुष्कर्म के मुख्य आरोपी सफाई कर्मचारी गुरुदास को सात साल के कारावास के साथ अर्थदंड की सजा सुनाई गई। दुष्कर्म के प्रयास में होमगार्ड ललित बिष्ट, केयर टेकर हाशिम, जबरन गर्भपात करने में चार महिला कर्मियाें को चार-चार साल की सजा हुई।
जबकि साक्ष्य मिटाने की दोषी अधीक्षिका मीनाक्षी पोखरियाल और एक अन्य सफाई कर्मचारी कृष्णकांत उर्फ कांछा को दो-दो साल की सजा दी गई है। तीन साल से कम की सजा होने के कारण दोनों को जमानत दे दी गई।
नारी निकेतन प्रकरण में फैसला सुनने के लिए सोमवार को कोर्ट परिसर खचाखच भरा था। कोर्ट ने मामले में सभी नौ आरोपियों को शुक्रवार को दोषी करार दिया था। सोमवार दोपहर 1:19 बजे दोषियों को अपर जिला जज षष्ठम की कोर्ट में पेश किया गया। 1:25 बजे सजा पर बहस शुरू हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता संजीव सिसौदिया ने कहा कि संवासिनी को अत्याचार से बचाने के लिए नारी निकेतन भेजा गया था, लेकिन वहां चहारदीवारी के अंदर उसका शारीरिक शोषण और उत्पीड़न होता रहा।
सरकारी संस्थाओं में इस तरह की घटनाएं होंगी तो जनमानस का विश्वास उठ जाएगा। उन्होंने कहा कि इसलिए दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, ताकि यह केस नजीर बन सके। बचाव पक्ष के अधिवक्ताआें ने कई तर्क देते हुए कम से कम सजा दिए जाने की वकालत की। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद तीन बजे सजा सुनाने के आदेश दिए।
पौने तीन बजते ही एक बार फिर कोर्ट परिसर में लोगों का जमावड़ा लग गया। अधिवक्ताओं के अलावा केस से जुड़े आरोपियाें के परिजन भी काफी संख्या में अदालत में मौजूद थे। 4:16 बजे आरोपियाें को पुलिस अभिरक्षा में कोर्ट में पेश किया गया। 4:22 बजे अपर जिला जज षष्ठम धर्म सिंह की अदालत ने सजा का ऐलान किया। सभी को उनके जुर्म के हिसाब से एक-एक कर कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
2015 में हुआ था घटना का खुलासा
अक्तूबर 2015 में अमर उजाला ने नारी निकेतन में मूक बधिर संवासिनी के साथ अनहोनी की घटना का खुलासा किया था। सूचना पुख्ता थी इसके आधार पर पुलिस भी हरकत में आई और नेहरू कॉलोनी थाने में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। इसके बाद 24 नवंबर 2015 को मुख्यमंत्री के आदेश पर तत्कालीन एसपी सिटी अजय सिंह के नेतृत्व में एक एसआईटी का गठन किया गया।
एसआईटी की जांच में एक-एक कर सभी परतें खुलती चली गईं और संवासिनी पर जुल्म ढाने वाले दरिंदे सलाखों के पीछे जाते रहे। इस मामले में पुलिस ने नारी निकेतन की तत्कालीन अधीक्षिका मीनाक्षी पोखरियाल, कर्मचारी अनिता मंदोला, क्राफ्ट टीचर शमा निगार, किरण नौटियाल, टीचर चंद्रकला क्षेत्री, संविदाकर्मी कृष्णकांत शाह उर्फ कांछा, होमगार्ड ललित बिष्ट, केयर टेकर हाशिम और मुख्य आरोपी सफाई कर्मचारी गुरदास को गिरफ्तार किया था।
संवासिनी का गर्भपात कराया और भ्रूण को जंगल में दबा दिया
गुरदास पर आरोप था कि उसने संवासिनी से दुष्कर्म किया, जिसके बाद वह गर्भवती हो गई थी। जबकि, होमगार्ड ललित बिष्ट और केयर टेकर हाशिम ने भी संवासिनी से दुष्कर्म का प्रयास किया था। इस बात का कहीं पता न चले इसके लिए बाकी सभी ने आपराधिक षडयंत्र रचते हुए संवासिनी का गर्भपात कराया और भ्रूण को जंगल में दबा दिया। एसआईटी ने दुधली के जंगल से भ्रूण भी बरामद कर लिया था।
इसका डीएनए मिलान गुरदास के साथ हुआ, जिससे केस को और मजबूती मिल गई। शासकीय अधिवक्ता संजीव सिसौदिया ने बताया कि अभियोजन की ओर से इस मुकदमे में कुल 23 गवाह पेश किए गए। जबकि, न्यायालय ने डीएनए रिपोर्ट को महत्वपूर्ण तथ्य माना और सभी पहलुओं पर गौर करते हुए सभी नौ आरोपियों को दोषी करार दे दिया। सिसौदिया ने बताया कि सजा पर सोमवार को बहस होगी। सभी दोषियों को न्यायालय परिसर से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
किसे किस धारा में कितनी सजा
होमगार्ड ललित बिष्ट और केयर टेकर हाशिम : आईपीसी 376/511 (किसी संस्था या संस्थान के संरक्षण में रह रही महिला या युवती से दुष्कर्म का प्रयास करना) में पांच-पांच साल के कारावास और 10-10 हजार रुपये का जुर्माना।
क्राफ्ट टीचर समा निगार, किरण नौटियाल, अनिता मंदोला और चंद्रकला क्षेत्री : आईपीसी 313 (स्त्री की मर्जी के बगैर गर्भपात कराना), आईपीसी 201 (अपराध के बाद साक्ष्य मिटाना) और आईपीसी 120बी (आपराधिक षड़यंत्र रचना) के तहत चार-चार साल के कारावास और 10-10 हजार रुपये का जुर्माना।
तत्कालीन अधीक्षिका मीनाक्षी पोखरियाल और कृष्णकांत उर्फ कांछा : आईपीसी 201 (अपराध के बाद साक्ष्य मिटाने) में दो-दो साल के कारावास और पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा।
संवासिनी की इंसाफ की लड़ाई में अग्रणी रहा ‘अमर उजाला’
नारी निकेतन में दुष्कर्म और गर्भपात का शिकार मूक बधिर संवासिनी को इंसाफ दिलाने की लड़ाई में ‘अमर उजाला’ अग्रणी रहा। संवासिनी पर हुए अत्याचार के संबंध में गोपनीय पत्र मिलने के बाद ‘अमर उजाला’ ने अक्तूबर 2015 में इस मामले का खुलासा किया था।
शुरुआत में मामले को दबाने की भरसक कोशिश हुई, लेकिन सूचनाएं पुख्ता हुईं तो फजीहत से बचने को सरकार को मामले की जांच के लिए 24 नवंबर 2015 को एसआईटी गठित करनी पड़ी। तत्कालीन एसएसपी सदानंद दाते और एसपी सिटी अजय सिंह के नेतृत्व में जांच हुई तो एक-एक कर आरोपी सलाखों के पीछे पहुंच गए।