चीन से ज्यादा खराब है भारत के इस शहर की हवा
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उत्तराखंड की राजधानी देहरादून कभी अपने साफ वातावरण के लिए जानी जाती थी, लेकिन अब दून की हवा चीन से भी ज्यादा खराब हो चुकी है।
यह दावा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने किया है। एंबिएंट एयर पाल्यूशन पर हाल ही में जारी आंकड़ों पर भरोसा करें तो दून में 2.5 माइक्रोमीटर के डायमीटर में फाइन पर्टिकुलेटेड मैटर की मात्रा 77 माइक्रोग्राम/क्यूबिक मीटर आंकी गई है, जो बीजिंग से भी ज्यादा है।
अभी तक बीजिंग ही हवा को सर्वाधिक प्रदूषित माना जाता रहा है।
औद्योगिक इकाईयों और वाहनों ने किया शहर का ये हाल
बीजिंग में फाइन पर्टिकुलेटेड मैटर की मात्रा 56 माइक्रोग्राम/क्यूबिक मीटर है। दून की इस स्थिति पर प्रख्यात पर्यावरणविद चंडी प्रसाद भट्ट चिंतित दिखाई देते हैं।
वर्ष 2005 में पद्मभूषण से नवाजे जाने वाले चंडी कहते हैं कि संभवत: बढ़ती औद्योगिक इकाईयों और वाहनों की संख्या ने शहर की आब-ओ-हवा को प्रदूषित करने का काम किया है।
डब्लूएचओ ने 91 देशों के 1600 शहरों के आउटडोर एयर पाल्यूशन लेवल को मापा था। उसने पाया कि दुनिया के 20 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में 13 हिंदुस्तान के हैं।
बीजिंग को मात देने वाले मुख्य शहरों पर एक नजर
शहर - एफपीएम (माइक्रोग्राम/क्यूबिक मीटर)
दिल्ली- 153
लखनऊ- 96
फिरोजबाद- 96
कानपुर- 93
अमृतसर- 92
आगरा- 88
नोएडा- 58
...तो ऑक्सीजन बॉक्स लेकर चलेंगे
उत्तराखंड के तकरीबन 65 फीसदी हिस्सा वन क्षेत्र है, लेकिन चिकनी सड़क बनाने के नाम पर पेड़ों पर आरी चलाई जा रही है।
स्थिति कुल मिलाकर अपना गला खुद घोंटने जैसी है। शंघाई को लें या बीजिंग को वहां लोग ऑक्सीजन बॉक्स साथ लेकर चलने लगे हैं।
पांच किलोमीटर चलने के बाद उन्हें फिर भी ताजा हवा लेनी ही होती है। कहीं दून में भी लोगों को ऑक्सीजन बॉक्स लेकर न चलना पडे़।
- अनिल प्रकाश जोशी, मशहूर पर्यावरणविद्
हमारी रीजनल लैब पर्यावरण प्रदूषण से जुड़े आंकड़े देखती है। सैंपलिंग भी उसी के जिम्मे है। रिपोर्ट का अध्ययन करना होगा।
- चंदन सिंह, पर्यावरण अधिकारी, उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं नियंत्रण बोर्ड
घंटाघर या रायपुर रोड, हवा कहीं भी शुद्ध नहीं
उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूईसीपीसीबी) दून में कुछ स्थानों का रेस्पिरेबल सस्पेंडेट पर्टिकुलेटेड मैटर (आरएसपीएम), सस्पेंडेड पर्टिकुलेटेड मैटर (एसपीएम), सल्फर डाई आक्साइड और नाइट्रोजन आक्साइड का माप लेता है।
बोर्ड के इसी साल जनवरी और फरवरी माह के आंकड़े देखें तो हवा की स्थिति साफ हो जाती है।
घंटाघर :
माह - RSP - SPM - सल्फर डाई आक्साइड - नाइट्रोजन आक्साइड
जनवरी - 183.05 - 543.7 - 25.86 - 29.61
फरवरी - 150.88 - 313.35 - 25.5 - 29.64
रायपुर रोड :
जनवरी - 161.52 - 489.73 - 24.95 - 28.7
फरवरी - 122.56 - 277.95 - 25.2 - 29.37
आईएसबीटी :
जनवरी - 229.38 - 453.21 - 25.85 - 29.25
फरवरी - 330.11 - 674.94 - 26.41 - 29.25