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देहरादूनः वोटर सत्यापन में जिले की ‘मशीनरी’ फेल, 40 दिन में महज 8.5 फीसदी वोटरों का सत्यापन
Fri, 11 Oct 2019 12:18 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Fri, 11 Oct 2019 12:18 PM IST
सार
- बीएलओ को चलाना नहीं आता स्मार्ट फोन, कई ने शुरू ही नहीं किया काम
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मतदान (सांकेतिक तस्वीर)
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विस्तार
निर्वाचन आयोग के वोटर सत्यापन में जिले की सरकारी ‘मशीनरी’ फेल हो गई। आलम ये है कि सत्यापन की जिम्मेदारी संभालने वाले ज्यादातर बीएलओ को स्मार्ट फोन तक चलाना नहीं आता। लिहाजा, उन्होंने काम भी शुरू नहीं किया। यह सच्चाई बृहस्पतिवार को हुई समीक्षा बैठक में सामने आई है। ऐसे में 40 दिन बीत जाने पर भी केवल 8.5 फीसदी वोटरों का सत्यापन हो पाया है, जबकि 91.5 फीसदी के लिए महज पांच दिन का समय बचा है।
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दरअसल, आयोग की ओर से एक सितंबर से 15 अक्तूबर तक वोटर सत्यापन कार्यक्रम चलाया जा रहा है। जिले के 14 लाख वोटरों के सत्यापन के आधार पर ही एक जनवरी 2020 को नई वोटर लिस्ट का प्रकाशन होना है। इसके लिए पूर्व में अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया, जिसके बाद उन्होंने बीएलओ को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। वोटर हेल्पलाइन, मोबाइल एप, इलेक्शन कमीशन की वेबसाइट, वोटर पोर्टल, टोल फ्री नंबर 1950 आदि के माध्यम से यह सत्यापन किया जाना था। इस बार वोटर सत्यापन का काम पूरी तरह ऑनलाइन होना था।
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लिहाजा, जिस बीएलओ को अपने स्मार्ट फोन से इस काम को अंजाम देना था। इसके लिए कुल 1797 बीएलओ को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इनमें से ज्यादातर बीएलओ जो कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं उन्हें स्मार्ट फोन ही चलाना नहीं आता है। ऐसे में उन्होंने काम ही शुरू नहीं किया। इस मामले को लेकर कई बार जिलाधिकारी ने भी नाराजगी जताई है। बावजूद इसके इस कार्यक्रम में तेजी नहीं लाई जा सकी। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी पीएस रावत ने बताया कि बीएलाओ को कहा गया है कि वे बचे हुए पांच दिन में ज्यादा से ज्यादा लोगों का सत्यापन करें।
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काम न करने वाले बीएलओ पर कार्रवाई होगी
बृहस्पतिवार को जिले की सभी सात विधानसभाओं के वोटर सत्यापन कार्यक्रम की सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी ने समीक्षा की। इस दौरान पता चला कि बहुत से बीएलओ ने अभी तक सत्यापन शुरू भी नहीं किया है। ऐसे में उनके खिलाफ जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
कई बार ट्रेनिंग देने का भी फायदा नहीं
सत्यापन कार्यक्रम के लिए एक सितंबर से पहले कई बार ट्रेनिंग प्रोग्राम भी चलाए गए। इनमें सभी बीएलओ को ट्रेनिंग दी गई कि वे किस किस माध्यम से सत्यापन करा सकते हैं, लेकिन अब पता चल रहा है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बीएलओ को तो मोबाइल तक चलाना नहीं आता है।