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देहरादून: ...तो क्या हाईकोर्ट को दिखाने भर के लिए कार्रवाई करता है प्रशासन और एमडीडीए?

अनिल चन्दोला, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 09 Apr 2021 02:13 AM IST

सार

  • जुलाई 2019 सहित कई बार नोटिस जारी करने की औपचारिकता कर चुका प्रशासन, आज तक नहीं हुई ऐसे मामलों में कार्रवाई
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अतिक्रमण
अतिक्रमण - फोटो : अमर उजाला

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विस्तार

देहरादून में नदी-नालों के किनारे अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश हाईकोर्ट पहले भी कर चुका है, जिस पर जिला प्रशासन और एमडीडीए केवल दिखाने भर की कार्रवाई करते हैं। कोर्ट के आदेश के बाद कई बार अतिक्रमणकारियों को नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं, लेकिन आज तक किसी भी मामले में कार्रवाई नहीं हुई। यही कारण है कि नदियों के किनारे अतिक्रमण का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
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नदी-नालों के किनारे अतिक्रमण के खिलाफ हाईकोर्ट ने पहली बार आदेश नहीं दिया है। इससे पहले भी हाईकोर्ट इस संबंध में आदेश जारी कर चुका है। इस पर जुलाई 2019 में तत्कालीन जिलाधिकारी ने कई लोगों को नोटिस भी जारी किए थे। हालांकि उसके बाद मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब से यह मामला ठंडे बस्ते में ही था। हाईकोर्ट ने जनहित याचिकाकर्ता पवन कुमार बनाम उत्तराखंड के मामले में डूब क्षेत्र (नदी श्रेणी में दर्ज भूमि) बने निर्माणों को खाली कराए जाने के आदेश दिए थे। इसमें यह जानकारी भी सामने आई की नदी क्षेत्र की भूमि की श्रेणी बदलकर प्रशासन ने ही पट्टे आवंटित किए। बाद में सरकार ने कई कार्यालयों के लिए इस जमीन का अधिग्रहण किया। 


हाईकोर्ट के आदेश के बाद जुलाई 2019 में जिलाधिकारी ने देहरादून में नदी क्षेत्र में बने 220 घरों और सरकारी दफ्तरों के स्वामियों व प्रभारियों को नोटिस जारी किए। उन्हें भवन खाली करने के लिए 12 दिन का समय दिया गया। लेखपालों के सर्वे के बाद खुद जिला प्रशासन ने माना कि मलिन बस्तियों के अलावा 1400 से ज्यादा निर्माण ऐसे हैं, जो नदी क्षेत्र में बने हुए हैं। वहीं, शहर क्षेत्र में 200 से ज्यादा निर्माण नदी क्षेत्र में हुए हैं। बाकायदा खतौनियों में तक यह निर्माण दर्ज हैं।  

उत्तराखंड: हाईकोर्ट ने दिए निर्देश, नदी नालों की भूमि पर किसी भी तरह के निर्माण पर लगाएं रोक 

नदी के खतरे की जद में 30 हजार से ज्यादा निर्माण
प्रशासन ने माना कि जिले में 30 हजार से ज्यादा निर्माण ऐसे हैं, जो नदी के खतरे की जद में हैं। इसमें मलिन बस्तियां, निजी और सरकारी भवन शामिल हैं। यह सभी भवन ऐसे हैं, जो नदी में पानी बढ़ने पर बाढ़ की जद में आ सकते हैं। सरकारी भवनों में मुख्य तौर पर राज्य विधानसभा शामिल है। इसके अलावा जिला जेल परिसर, उत्तरांचल तकनीकी विश्वविद्यालय, दून विश्वविद्यालय, मत्स्य निदेशालय, भूतत्व एवं खनिज कर्म निदेशालय, राजस्व अभिलेखागार, पुलिस थाने समेत कई अन्य कार्यालय नदी किनारे बने हुए हैं। 
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अतिक्रमणकारियों के दबाव में सरकार

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