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वरिष्ठ साहित्यकार-पत्रकार वीरेन डंगवाल का निधन
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 28 Sep 2015 06:32 PM IST
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सोमवार को तड़के साहित्यकार और वरिष्ठ पत्रकार वीरेन डंगवाल का निधन हो गया। बरेली निवासी डंगवाल काफी लंबे समय से कैंसर से ग्रसित थे। वह मूल रूप से टिहरी गढ़वाल के रहने वाले थे।
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सोमवार को सुबह चार बजे बरेली स्थित आरएमएस अस्पताल के आईसीयू में उन्होंने आखिरी सांस ली। विरेन डंगवाल ने बाईस साल की उम्र में अपनी पहली रचना लिखी और फिर देश की तमाम स्तरीय साहित्यिक पत्र पत्रिकाओं में लगातार छपते रहे।
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उन्होनें 1970-75 के बीच ही हिन्दी जगत में खासी शोहरत हासिल कर ली थी। विश्व-कविता से उन्होंने पाब्लो नेरूदा, बर्टोल्ट ब्रेख्त, वास्को पोपा, मीरोस्लाव होलुब, तदेऊश रोजेविच और नाज़िम हिकमत के अपनी विशिष्ट शैली में कुछ दुर्लभ अनुवाद भी किए हैं।
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वीरेन डंगवाल का पहला कविता संग्रह 43 वर्ष की उम्र में आया। इस संकलन को रघुवीर सहाय स्मृति पुरस्कार (1992) तथा श्रीकान्त वर्मा स्मृति पुरस्कार (1993) से नवाज़ा गया।
दूसरा संकलन 'दुष्चक्र में सृष्टा' 2002 में आया और इसी वर्ष उन्हें 'शमशेर सम्मान' भी दिया गया। दूसरे ही संकलन के लिए उन्हें 2004 का साहित्य अकादमी पुरस्कार भी दिया गया।
वे शौकिया तैर पर पत्रकारिता से भी जुड़े रहते थे और एक लंबे अरसे तक अमर उजाला के ग्रुप सलाहकार और बरेली के स्थानीय संपादक भी रहे।