{"_id":"ee9587c00b4e3509703e416a655c7c18","slug":"death-of-mother-and-fetus-in-hospital-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"महिला और गर्भस्थ शिशु की मौत, हंगामा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महिला और गर्भस्थ शिशु की मौत, हंगामा
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 12 Feb 2015 11:22 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देहरादून स्थित जिला महिला अस्पताल में भर्ती गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई।
विज्ञापन
परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में जमकर हंगामा किया। परिजनों ने आरोपी डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग की है। स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल में पुलिस तैनात करनी पड़ी। देर रात तक हंगामा जारी था।
अधोईवाला निवासी 36 वर्षीय आयशा बानो पत्नी रोज अली को परिजन नौ फरवरी को अस्पताल लाए थे। परिजनों का कहना है कि प्रसव पीड़ा न होने के बावजूद डॉक्टरों ने आयशा को भर्ती कर लिया। इस दौरान आयशा की मां सायरा बानो ने डॉक्टरों से आपरेशन का अनुरोध किया, लेकिन डॉक्टरों ने इनकार कर दिया।
विज्ञापन
मंगलवार को आयशा को अलग वार्ड में रख परिजनों को भी उससे मिलने नहीं दिया। आरोप है कि आयशा को नर्सों के भरोसे छोड़ दिया गया था। बुधवार शाम साढ़े छह बजे नर्सों ने परिजनों को बताया कि आयशा और गर्भस्थ शिशु की मौत हो चुकी है।
विज्ञापन
यह सुनते ही परिजन भड़क उठे। उन्होंने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें जानकारी नहीं दी। गर्भस्थ शिशु की मौत के बावजूद डाक्टर नहीं आई, जिससे आयशा की भी मौत हो गई। परिजन आरोपी डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग पर अस्पताल में धरने पर बैठ गए।
हंगामा बढ़ा तो अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस बुला ली। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. बीएस जंगपांगी और अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चंद्रा पंत भी अस्पताल पहुंचे।
परिजनों ने दोनों अधिकारियों का भी घेराव किया। परिजनों की लिखित शिकायत पर अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन दिया। लेकिन परिजन देर रात तक अस्पताल में जमे हुए थे।
साख पर सवाल
जच्चा-बच्चा की मौत की घटनाओं से जिला महिला अस्पताल की साख पर सवाल उठने लगे हैं। सात फरवरी को भी अस्पताल में एक महिला के गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई थी। बड़े अस्पताल रेफर करने के बाद किसी तरह महिला की जान बची।
अक्तूबर 2014 में महिला अस्पताल में दो दिन के भीतर चार शिशुओं की मौत हुई थी। तब भी डॉक्टरों और अस्पताल कर्मियों पर लापरवाही के आरोप साबित हुए थे। लेकिन अब तक आरोपी डॉक्टरों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
सुलगते सवाल
- महिला को दो दिन तक परिजनों से अलग क्यों रखा गया?
- महिला की हालत खराब थी तो परिजनों को जानकारी क्यों नहीं दी?
- पानी कम हो गया था तो तुरंत आपरेशन क्यों नहीं किया गया?
- परिजनों के मुताबिक बच्चे की मौत के बाद कुछ देर तक महिला जीवित थी। ऐसा था तो डाक्टर सूचना मिलते ही उसे देखने क्यों नहीं पहुंचे?
- बुधवार को घटना के वक्त महिला के साथ डाक्टर क्यों नहीं थीं?
- महिला की मौत के बाद भी परिजनों को वार्ड में क्यों नहीं जाने दिया?
- अस्पताल में पुराने मामलों में अब तक क्यों नहीं हो रही कार्रवाई?
- महिला अस्पताल में क्यों बढ़ रहे जच्चा-बच्चा की मौत के मामले?
महिला के शरीर में पानी की कमी से इंफेक्शन बढ़ गया था। इससे उसकी तबीयत ज्यादा बिगड़ रही थी। डॉक्टर के मौजूद न होने या लापरवाही की जांच की जाएगी।
- डॉ. चंद्रा पंत, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक