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जिंदगियां निगल रहा सेक्स पॉवर बढ़ाने वाला कीड़ा

Sat, 28 Jun 2014 01:30 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 28 Jun 2014 01:30 AM IST
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death in uttarakhand for kirajari

उत्तराखंड के चमोली जिले के बुग्याल क्षेत्रों में कीड़ा-जड़ी (यारसागंबू) के दोहन के लिए मची मारा-मारी ग्रामीणों की जिंदगियों पर भारी पड़ रही है।

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अभी तक कीड़ा-जड़ी से जुडे़ मामलों में पांच ग्रामीण अपनी जान गंवा बैठे हैं जबकि बीती 26 जून को कीड़ा-जड़ी ढूंढने गए कलगोठ गांव के तीन युवाओं की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने की सूचना है। हालांकि इसकी अभी तक पुष्टि नहीं हो पाई है।
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कीड़ा-जड़ी को लेकर बढ़ रही घटनाओं से जिला प्रशासन और वन विभाग के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। वहीं  इन दिनों कीड़ा-जड़ी के लिए बुग्यालों में जोशीमठ, उर्गम, निजमुला घाटी के साथ ही दशोली क्षेत्रों के ग्रामीण डेरा जमाए हुए हैं।
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नेपाली युवकों और भारतीयों में झड़पें भी

death in uttarakhand for kirajari

बताया जा रहा है बुग्याल क्षेत्र में कीड़ा-जड़ी ढूंढने के लिए सीमा क्षेत्र पर भी आए दिन ग्रामीणों और नेपाली युवाओं के मध्य झड़पें भी हो रही हैं।

बीती 21 जून को कीड़ा-जड़ी लेकर लौट रहे हनुमान चट्टी और बैनाकुली के चार युवक अलकनंदा नदी में बह गए थे। जिनका अभी तक भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

इससे पूर्व अप्रैल माह में सुतोल गांव का एक व्यक्ति आकाशीय बिजली गिरने से मौत का शिकार हो गया था। बीते वर्ष जलप्रलय के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से उर्गम घाटी के नौ युवकों की मौके पर ही मौत हो गई थी।

वर्ष 2012 में भी उर्गम घाटी के सुदूर बुग्याल क्षेत्र में ठंड से जोशीमठ के दो युवक भी अपनी जान से हाथ धो बैठे थे।

कीड़ा-जड़ी के दोहन के ल‌िए बना है नियम

death in uttarakhand for kirajari

बुग्यालों में कीड़ा-जड़ी का दोहन वन पंचायत के मार्फत होता है। ग्रामीण इकटठा की हुई कीड़ा-जड़ी को विभाग तक पहुंचाते हैं तो उसे क्रय कर बाजार तक पहुंचाया जाता है। शासनादेश के तहत वन पंचायतें कीड़ा-जड़ी का दोहन कर इसका सामूहिक नीलामी करेंगी। इसका पांच फीसदी हिस्सा गांव के विकास तथा अन्य धनराशि संबंधित व्यक्ति को दी जाएगी। लेकिन वर्तमान में ऐसा हो नहीं रहा है।
-राजीव धीमान, डीएफओ, बदरीनाथ वन प्रभाग, गोपेश्वर।

कीड़ा-जड़ी के मामले में जिला प्रशासन का कोई हस्तक्षेप नहीं है। वन पंचायत ही इसका दोहन करवाती है। यदि पर्यावरण व बुग्यालों को इससे नुकसान हो रहा है तो वन विभाग इसे देखेगा।
-एसए मुरूगेशन, डीएम, चमोली।

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