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संभलकर चलें दून-हरिद्वार हाईवे पर, दो माह में 9 मरे
अमर उजाला, डोईवाला
Updated Sat, 22 Feb 2014 10:58 AM IST
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दून-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की धीमी गति लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। अधूरे निर्माण से आए दिन हादसे हो रहे हैं। विगत दो माह में नौ लोगों की जान जा चुकी है बावजूद कार्यदायी संस्था खनन सामग्री का भंडारण नहीं होने और कार्य में कई पेच फंसने का रोना रो रही है।
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केवल 18 माह का समय
कार्यदायी संस्था 24 महीने में करीब 40 प्रतिशत ही निर्माण कर सकी है जबकि बचे हुए करीब 60 प्रतिशत निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए अनुबंध के आधार पर केवल 18 माह का समय बचा है।
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बता दें फरवरी 2012 से निर्माणाधीन दून-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग का कार्य अब तक मात्र 40 प्रतिशत ही निर्माण हो पाया है। अनुबंध के आधार पर कार्यदायी संस्था को दिसंबर 2015 तक निर्माण पूरा कराना है, लेकिन निर्माण कार्य की धीमी गति देखकर नहीं लगता कि तय समय सीमा में पूरा हो पाएगा।
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सहयोग नहीं मिलने का रोना
राजधानी के लिए महत्वपूर्ण हाईवे पर भानियावाला, माजरी, लालतप्पड, कुआंवाला क्षेत्र दुर्घटनाओं के लिहाज से डेंजर जोन बने हैं। कार्यदायी संस्था शासन-प्रशासन की ओर से पर्याप्त सहयोग नहीं मिलने का रोना रो रही है।
महंगी खनन सामग्री की रायल्टी की बढ़ी दरों और खनन सामग्री का भंडारण नहीं होने से निर्माण को गति नहीं मिल पा रही है, जिसका खामियाजा सभी को झेलना पड़ रहा है।
आधे-अधूरे हाईवे से हादसों में कई लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा है। जनवरी में संकरे हाईवे पर सेना का वाहन पलटने से उसकी चपेट में आकर स्कूटी सवार अजबपुर के दंपति प्रेमलाल और उनकी पत्नी शकुंतला की मौत हो गई।
इसी दिन भानियावाला निर्माणाधीन ब्रिज के पास डोईवाला बाजार से जौलीग्रांट आ रहे बुजुर्ग महेंद्र सिंह पुंडीर की ट्रक ने जान ले ली। शेरगढ़ के छात्र और खैरी की एक विवाहिता की मौत भी हाईवे पर हुए हादसे में हो चुकी है। 14 जनवरी को भानियावाला में ट्रक ने बाइक सवार युवक को रौंद दिया था। इसके अलावा एक और युवक की इसी हाईवे में दुर्घटना में जान चली गई थी।
भंडारण की अनुमति निरस्त होने से आई समस्या
नैनीताल हाईकोर्ट के अग्रिम आदेश तक जेडएएलआर एक्ट के अंतर्गत कृषि भूमि पर खनिज भंडारण पर रोक लगा दी गई है। कार्यदायी संस्था ने जो प्लाट लिए थे उसमें से अधिकांश कृषि भूमि पर थे।
आदेश होने पर भी खनन सामग्री एकत्रित नहीं किए जाने से हाईवे निर्माण कार्य मंद हो गया है। हाईवे निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था ने 15 से 20 लाख घन मीटर पत्थर की जरूरत बता रही है, इसके भंडारण के लिए कई बीघा भूमि की आवश्यकता है। व्यावसायिक उपयोग दिखाने पर अधिक धनराशि व्यय हो रही है, जिससे कार्यदायी संस्था का बजट गड़बड़ा रहा है। लिहाजा किसी तरह काम चलाया जा रहा है।
डेंजर जोन
भानियावाला, माजरी, लालतप्पड, कुआंवाला में दुर्घटनाएं बढ़ी