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इस ऐतिहासिक आम के पेड़ पर मंडरा रहा खतरा, चमत्कारी नहीं बल्कि इस वजह से है खास

Wed, 29 Nov 2017 11:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग Updated Wed, 29 Nov 2017 11:47 AM IST
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Danger on this historic mango tree
mango tree
रुद्रप्रयाग का एतिहासिक आम का पेड़ कोई चमत्कारी पेड़ नहीं है और ना ही आस्था का प्रतीक, लेकिन इस पेड़ के बारे में जान आप भी हैरत में पड़ जाएंगे। तभी तो पूरा प्रशासन इसे बचाने में जुटा है। पढ़िए पूरी कहानी...
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ऑलवेदर रोड परियोजना से ऐतिहासिक धरोहरों पर भी संकट मंडरा रहा है, जिसमें रुद्रप्रयाग के गुलाबराय स्थित आम का पेड़ भी है। यह वहीं पेड़ है जिस पर मचान बनाकर प्रसिद्ध शिकारी जिम कार्बेट ने वर्ष 1925 में आमदखोर गुलदार को ढेर किया था।
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ऋषिकेश-बदरीनाथ राजमार्ग पर मुख्य बाजार से दो किमी पहले हाईवे पर स्थित यह पेड़  धरोहर है। इसी पेड़ के नीचे जिम कार्बेट पार्क बनाया गया है, जिसमें प्रतिवर्ष उनकी जयंती पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, लेकिन ऑलवेदर रोड से पार्क और पेड़ पर खतरा मंडरा रहा है क्योंकि चिह्नित पेड़ों में इस धरोहर को भी शामिल किया गया है।
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राज्य निर्माण के बाद से इस ऐतिहासिक पेड़ को संरक्षित करने की मांग होती आ रही है। डेढ़ सौ साल से अधिक उम्र के इस पेड़ की कई शाखाएं सूख चुकी हैं। रेंजर आलोकी ने बताया कि आम के पेड़ का चिह्नीकरण हो रखा है, लेकिन कटान को लेकर अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं हैं। विभागीय स्तर से पेड़ के संरक्षण के लिए प्रस्ताव प्रशासन को दिया जाएगा।
 

2 मई को मारा था जिम कार्बेट ने आमदखोर

Danger on this historic mango tree
guldar - फोटो : demo
जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि इस ऐतिहासिक पेड़ को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। इस संबंध में परियोजना से जुड़े आला अधिकारियों और एनएच से वार्ता की जाएगी।

 2 मई 1925 को गुलाबराय में इसी आम के पेड़ पर मचान बनाकर जिम कार्बेट ने 125 लोगों को मारने वाले आदमखोर गुलदार को ढेर किया था। उन्होंने अपने जीवन में 33 आदमखोर गुलदारों को मौत के घाट उतारा था।

वर्ष 1918 से 1925 (8 वर्ष) तक बच्छणस्यूं, धनपुरी के गांवों सहित रुद्रप्रयाग, भाणाधार, पुनाड़, बर्सू, रतूड़ा, गौचर के ऊपरी तरफ के गांवों से लेकर कर्णप्रयाग तक आदमखोर गुलदार की दहशत थी।
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