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अंदरखाने के कांटे ठीक करने में जुटी कांग्रेस

Fri, 11 Apr 2014 09:04 AM IST
अनूप वाजपेयी/अमर उजाला, देहरादून
अनूप वाजपेयी/अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 11 Apr 2014 09:04 AM IST
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damage control in uttarakhand congress

उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा के बाद कांग्रेस अपने कील-कांटे दुरुस्त करने में जुट गई है। प्रदेश के नए प्रदेश प्रभारी राजीव शुक्ला भी शुक्रवार को देहरादून पहुंच गए।

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प्रदेश प्रभारी पांचों लोकसभा सीटों को लेकर शुक्रवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक करेंगे। कांग्रेस के सभी उम्मीदवारों ने अपने-अपने इलाके में कमान संभाल ली है।
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करीब एक साल से उत्तराखंड कांग्रेस में घमासान मचा रहा है। विजय बहुगुणा को हटाने और हरीश रावत की ताजपोशी को लेकर कांग्रेस कई खेमों में बंटी दिखी है। ऐसे में लोकसभा चुनाव में कार्यकर्ताओं को एकजुट करना सबसे अहम होगा।

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बहुगुणा गुट का फोकस टिहरी सीट पर

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टिकट बंटवारे में लगभग सभी गुटों के संतुष्ट हो जाने के बाद कांग्रेस में खींचतान कुछ कम होने की संभावना है।

हरीश रावत के मुख्यमंत्री बनने के बाद बहुगुणा गुट के विधायक और नेता घरों में बैठ गए थे, पर अंदरखाने में हरीश रावत को कमजोर करने के प्रयास जारी रहे।

अब टिहरी सीट से साकेत बहुगुणा का टिकट होने के बाद कांग्रेस का यह गुट सक्रिय दिखने लगा है। बहुगुणा गुट के विधायक और नेताओं का पूरा फोकस टिहरी की जीत पर हो गया है।

हरिद्वार और अल्मोड़ा के फेर में हरक पड़े अकेले

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हरिद्वार सीट अगर हरीश रावत के परिवार में ना जाकर किसी अन्य को मिलती तो वहां भी गुटबाजी हावी होती। अल्मोड़ा सीट पर हरीश रावत समर्थक प्रदीप टम्टा मैदान में हैं। हरीश रावत समर्थक नेता या तो हरिद्वार में जुटेंगे या फिर अल्मोड़ा में दिखेंगे।

हरीश रावत के लिए हरिद्वार के साथ अल्मोड़ा और नैनीताल सीट सीधे प्रतिष्ठा से जुड़ेगी। ऐसे में पौड़ी सीट पर हरक सिंह रावत की मुश्किलें सतपाल महाराज के समर्थकों के चलते बढ़ने वाली है।

महाराज के चुनाव न लड़ने के ऐलान के बाद जिस तरह हरक सिंह ने अपनी दावेदारी पेश की थी उससे समर्थकों के बीच अच्छा मैसेज नहीं गया था। हालांकि हरक सिंह ने महाराज की पत्नी मंत्री अमृता रावत को साथ लेकर चलने की तैयारी की है लेकिन यह नतीजे ही बताएंगे कि उन्हें इसका कितना लाभ मिला।

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