कस्टडी में हेडफोन लगाकर पेशी पर आया कुख्यात
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वैसे तो किसी कैदी को पेशी पर जाने के दौरान एक कप चाय और एक ग्लास पानी तक पीने की इजाजत नहीं है, लेकिन देहरादून जेल में बंद कुख्यात बदमाश पीपी को बख्तर बंद गाड़ी के अंदर आईपॉड से गाने सुनने और रास्ते में एटीएम से पैसे निकालने की खुली छूट दी गई थी।
सोमवार को पेशी के दौरान हल्द्वानी पहुंचा पीपी गाड़ी में हेडफोन लगाकर बैठा था। शायद किसी से फोन पर बात कर रहा था, मगर पुलिस को कहना है कि वह आईपॉड से गाने सुन रहा था।
पुलिस अधिकारियों का कहना था कि उसे कोर्ट ने उसे पेशी पर जाने के दौरान एक आईपॉड, हेडफोन और दो एटीएम कार्ड रखने की अनुमति दी है।
मगर ये नहीं बताया कि किसी कोर्ट ने और कहां कहां पेशी पर जाने के लिए ये इजाजत दी है। जबकि जेल मैनुअल्स में भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
ऐसी परमिशन कोर्ट किसी कैदी को नहीं देता
प्रकाश पांडे को शुक्रवार सुबह हल्द्वानी कोतवाली की हवालात से निकालकर बख्तरबंद गाड़ी में बैठाया गया। गाड़ी के अंदर वह हेडफोन लगाकर बैठा था। डीआईजी जीएस मर्तोलिया को जानकारी मिली कि पीपी हैडफोन लगाकर मोबाइल से बात कर रहा है। उन्होंने तुरंत एसपी सिटी यशवंत चौहान और सीओ राजेंद्र ह्यांकी को जांच के लिए कहा।
सीओ तुरंत कोतवाली पहुंचे और पीपी को पेशी पर लाए दून पुलिस के अधिकारियों से बात की। उन्होंने सीओ को बताया कि पीपी को कोर्ट से सफर के दौरान गाने सुनने के लिए एक आईपॉड और दो एटीएम कार्ड रखने की परमिशन मिली है। इस पर सीओ ने गाड़ी की तलाश तक करवाई, उसके पास आईपॉड, एक हेडफोन और दो एटीएम कार्ड मिले।
सूत्रों का कहना है कि इस तरह की परमिशन कोर्ट किसी कैदी को नहीं देता। क्योंकि हैडफोन या एटीएम से वह खुद या दूसरों की जान खतरे में डाल सकता है। साथ ही एटीएम से पैसे निकालने के दौरान भी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
पीपी को हत्या के दो मामलों में उसके खास गुर्गे भूपेंद्र उर्फ भूपी के साथ एडीजे नैनीताल की कोर्ट में पेश किया गया था, लेकिन वकीलों की हड़ताल के चलते सुनवाई नहीं हो पाई, जिस पर भारी सुरक्षा के बीच उसे वापस दून जेल ले जाया गया।
‘पीपी को पेशी पर जाने के दौरान एटीएम कार्ड, आईपॉड और हेडफोन रखने की परमिशन कोर्ट ने दी है। जांच में फोन पर किसी से बातचीत करने की बात नहीं आई।’
- जीएस मर्तोलिया, डीआईजी