मृत्युंजय मिश्रा प्रकरण: 132 दिन के रिकार्ड समय में पूरी हुई जांच, बैंक खाते से खुल सकते हैं कई राज
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उत्तराखंड के इतिहास में विजिलेंस ने आयुर्वेद विश्वविद्यालय के निलंबित कुलसचिव मृत्युंजय मिश्रा के खिलाफ खुली जांच रिकार्ड समय में पूरी की है। वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी यह जांच न केवल 132 दिन में पूरी हुई, बल्कि आरोपी को भी जेल की सीखचों के पीछे पहुंचा दिया गया। सरकार की प्राथमिकता के चलते राजपत्रित अधिकारी मिश्रा के खिलाफ मुकदमेे की अनुमति मिलने में देरी नहीं हुई। अन्यथा विजिलेंस को खुली जांच में शासन की अनुमति पाने को लंबा संघर्ष करना पड़ता है।
आयुर्वेद विवि के निलंबित कुलसचिव मिश्रा के खिलाफ आरोपाें की लंबी फेहरिस्त के मद्देनजर शासन ने 24 जुलाई को विजिलेंस को उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं को लेकर खुली जांच के आदेश दिए थे। शासन की प्राथमिकता के हिसाब से विजिलेंस ने खुली जांच को पूरी करने में देरी नहीं की। त्वरित कार्रवाई करते हुए वित्तीय अनियमितताआें से जुड़े काफी साक्ष्य जुटा लिए।
वित्तीय अनियमितताओं के प्रथमदृष्टया आरोप सही पाए जाने के बाद मिश्रा के खिलाफ मुकदमे की अनुमति को पत्रावली को आगे बढ़ा दिया गया। शासन स्तर पर बेहद गोपनीय तरीके से मुकदमे की अनुमति प्रदान कर दी गई। विजिलेंस ने गोपनीयता बनाए रखने को थाने के बजाए सीधे अपने यहां मृत्युंजय मिश्रा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। फिर अन्य औपचारिकता पूरी करने के बाद सोमवार तीसरे पहर ईसी रोड से मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया गया। अपर पुलिस महानिदेशक विजिलेंस राम सिंह मीणा ने बताया कि खुली जांच में साक्ष्याें के संकलन में ज्यादा समय नहीं लग पाया। इसी वजह से विवेचक प्रकाश दानू तेजी से कार्रवाई को आगे बढ़ाते गए। शासन ने भी मुकदमे की अनुमति देने में किसी तरह की देरी नहीं की।
50 खुली जांच विचाराधीन
विजिलेंस के पास फिलहाल 50 के करीब खुली जांच लंबित चल रही हैं। इनमें कई महकमों के अधिकारियाें के नाम भी शामिल हैं। हालांकि राज्य गठन से लेकर अब तक शासन स्तर से 160 खुली जांच के आदेश हुए, इनमें से 110 को पूरा किया गया। इसके अलावा सात गोपनीय जांच भी लंबित बताई गई हैं। इस अवधि में रिश्वत लेने के 208 मामलों में 220 अधिकारियों और कर्मचारियों की गिरफ्तारी का दावा किया गया है।
बैंक खाते में भी नूतन रावत का गलत पता
भ्रष्टाचार के आरोप में पकड़े गए मृत्युंजय मिश्रा की करीबी नूतन रावत के रहस्य से पर्दा नहीं उठ पाया है। विजिलेंस ने देहरादून के उसके सभी ठिकानों पर पड़ताल की, लेकिन उसके बारे में कोई अहम जानकारी नहीं मिली। उसके बैंक खातों से लेकर फर्म पंजीकरण के दस्तावेजों में दर्ज पते पर अब कोई और ही निवास कर रहा है।
मृत्युंजय मिश्रा ने क्रिएटिव इलेक्ट्रॉनिक नाम की फर्म से विश्वविद्यालय के लिए लाखों रुपये की खरीददारी की थी। विश्वविद्यालय के खातों से इस फर्म के चालू खातों में पैसे ट्रांसफर किए गए। इसके बाद इस फर्म के खातों से मृत्युंजय मिश्रा, उनकी पत्नी श्वेता मिश्रा, चालक अवतार सिंह व करीबियों के बैंक खातों में तकरीबन 33 लाख रुपये ट्रांसफर हुए। मृत्युंजय के साथ अब तक जुड़े अन्य लोगों से पुलिस पूछताछ कर चुकी है, लेकिन नूतन रावत का रहस्य अभी बरकरार है।
एसपी विजिलेंस प्रमोद कुमार ने बताया कि नूतन रावत की फर्म का बैंक ऑफ बड़ौदा की हर्रावाला शाखा में चालू खाता है। इस खाते की केवाईसी (नो योर कस्टमर) में उसने जो पता दर्ज कराया है वहां उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। इसके अलावा क्रिएटिव इलेक्ट्रॉनिक नाम की फर्म का पता फव्वारा चौक बताया गया है, लेकिन वहां अब कोई और फर्म चल रही है।
उन्होंने बताया कि अभी तक जो जानकारी मिली है उसके अनुसार क्रिएटिव इलेक्ट्रॉनिक नाम की फर्म तो सही है, लेकिन अब यह बंद हो चुकी है। माना जा रहा है कि वह फर्म बंद कर देहरादून से फरार हो चुकी है। उधर, एक टीम नूतन रावत के मूल निवास स्थान पौड़ी में भी छानबीन कर रही है। विजिलेंस को यह भी लग रहा है कि कहीं नूतन रावत कोई काल्पनिक किरदार तो नहीं ?
आयुर्वेद विश्वविद्यालय में फिर चला तलाशी अभियान
मृत्युंजय मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद बुधवार को दूसरी बार विजिलेंस की टीम आयुर्वेद विश्वविद्यालय पहुंची। यहां तकरीबन छह घंटे तक विजिलेंस के पांच अधिकारियों ने दफ्तरों में तलाशी अभियान चलाया। इसके अलावा कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ भी की गई। विजिलेंस ने कुछ दस्तावेज और फाइलें कब्जे में ली हैं। बृहस्पतिवार को विजिलेंस फिर से मृत्युंजय मिश्रा के परिजनों से पूछताछ कर सकती है।
विजिलेंस ने सोमवार को मृत्युंजय मिश्रा को ईसी रोड स्थित एक कैफे से गिरफ्तार किया था। मिश्रा पर आरोप है कि उन्होंने साल 2013 से 2017 तक आयुर्वेद विश्वविद्यालय में कुलसचिव पद पर रहते एक करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला किया है। इसके बाद विजिलेंस ने उनके कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। सोमवार को एक टीम आयुर्वेद विवि में भी गई थी, लेकिन उस समय कोई अहम जानकारी हासिल नहीं हुई थी। हालांकि, उनके घर से पांच लाख रुपये और कुछ फाइलें बरामद हुई थीं।
विजिलेंस अधिकारियों के मुताबिक इन फाइलों से संबंधित दस्तावेजों को तलाशने के लिए एक पांच सदस्यीय टीम बुधवार को भी विवि भेजी गई थी। यहां टीम ने कुलसचिव कार्यालय और अन्य स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। सूत्रों के मुताबिक यहां से कई दस्तावेज विजिलेंस ने कब्जे में लिए हैं। इसके अलावा वहां कर्मचारियों और अधिकारियों से भी पूछताछ की गई है। एसपी विजिलेंस प्रमोद कुमार ने बताया कि वहां मुकदमे से संबंधित कुछ नहीं मिला है। जो दस्तावेज वहां से लिए गए हैं उनका अवलोकन किया जा रहा है।
खातों की चल रही है जांच
नूतन रावत और शिल्पा त्यागी की फर्मों से मिश्रा और उनके परिवार के सदस्यों के खातों में पैसे ट्रांसफर किए गए हैं। इसके बाद यह रकम कहां गई या कहां निवेश की गई इसके बारे में अभी जांच चल रही है। अभी तक किसी एफडी या संपत्ति के बारे में ब्योरा हासिल नहीं हुआ है। एसपी विजिलेंस प्रमोद कुमार ने बताया कि उनके खातों के बारे में बैंक अधिकारियों से भी जानकारी ली जा रही है। अगले दो से तीन दिनों में सारी तस्वीर साफ हो जाएगी।