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कार नंबर ने नौ शातिर ठगों को पहुंचाया जेल

Thu, 29 Dec 2016 01:23 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 29 Dec 2016 01:23 PM IST
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thug arrested by car number.
पकड़े गए ठग - फोटो : AmarUjala

एक कार नंबर के जरिए पुलिस ने लिफ्ट देकर बुजुर्ग को ठगने वाले गिरोह के नौ सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें गैंग का सरगना जगत सिंह बिष्ट भी शामिल हैं। इन लोगों के पास से पुलिस ने 34 हजार की नगदी और पांच लाख कीमत के सोने के जेवरात बरामद किए हैं।

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इनकी निशानदेही पर पुलिस ने घटना में प्रयुक्त चार गाड़ियां भी पकड़ी हैं, जिन्हें सीज करने की कार्रवाई की जाएगी। इन लोगों ने नेहरू कॉलोनी, डोईवाला की पांच घटनाएं स्वीकार की हैं। इनमें से अधिकांश आरोपी दिल्ली और गाजियाबाद के रहने वाले हैं, जबकि सरगना चमोली का है।
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वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक स्वीटी अग्रवाल ने बताया कि नेहरू कॉलोनी, डोईवाला और रायवाला में काफी समय से लिफ्ट देकर बुजुर्गों को ठगने वाला गिरोह सक्रिय था। दो दिसंबर और 17 दिसंबर को ठगी की वारदातों के बाद बुजुर्गों को जागरूक करने के लिए बोर्ड लगाने के साथ सादी वर्दी में पुलिस टीम लगाई गई थी।

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फुटेज से मिले महत्वपूर्ण सुराग

thug arrested by car number.

घटनास्थल के आसपास के फुटेज से कुछ महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे, जिसके आधार पर एसओजी, डोईवाला और नेहरू कॉलोनी की संयुक्त टीम ने बुधवार को गिरोह के सरगना समेत नौ आरोपियों को दबोच लिया। इनमें जगत विष्ट निवासी बांसवाड़ा चमोली (हाल आनंद विहार गाजियाबाद), संजू कुमार निवासी खैर अलीगढ़, राजेश गुप्ता निवासी फाजलपुर सरपंच वाड़ा मंडावली दिल्ली, पंकज मिश्रा निवासी विनोद नागर दिल्ली नेहरू कालोनी और रायवाला की घटना में शामिल रहे।

इसी गिरोह के विनोद कुमार निवासी सुल्तानपुर के कन्नौज, राशिद निवासी अजमेरी गेट दिल्ली, मोहम्मद कासिब निवासी भजनपुरा दिल्ली, सुनील कुमार और उमेश कुमार उर्फ टिंक निवासी दिल्ली डोईवाला की दो वारदातों में पकडे़ गए हैं।

एसएसपी स्वीटी अग्रवाल ने बताया कि गिरोह के सदस्य कोडवर्ड में बात करते थे, ठगी के लिए इनका कोड ‘डीसी भरना’ है। यह शब्द मुंबई में काफी प्रचलित है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि बरामद वाहनों से असली और नकली नंबरों की प्लेट भी मिली है।

फर्जी नाम से गया जेल

thug arrested by car number.
पु‌लिस - फोटो : अमर उजाला

एसपी देहात श्वेता चौबे ने बताया कि गिरोह का सरगना जगत विष्ट मेरठ के दिल्ली गेट थाने से ठगी में जेल जा चुका है। उस समय जगत सिंह ने अपना नाम विक्रम बताया था। पुलिस ने इसी नाम से उसे जेल भेजा था। बाद में उसके असली नाम का खुलासा हुआ। 

ऐसे करते थे वारदात 
पकड़े गए ठग विशेषकर उम्र दराज पुरुषों और महिलाओं को बातचीत कर अपने चार पहिया वाहनों में बैठा लेते थे। कुछ दूरी पर ले जाकर यह लोग वाहन में सरकारी कैश या पार्सल होने की बात कहकर यात्रियों का सारा कैश और ज्वैलरी पीले रंग के लिफ ाफे  में रखवा लेते थे और धोखे से लिफ ाफे बदलकर यात्रियों को दूसरे स्थान से अन्य सरकारी कैश और पार्सल लेने के नाम पर वाहन से उतार देते थे। उन्हें कुछ देर इंतजार करने की बात कहकर फ रार हो जाते थे। पीड़ित कार से उतरकर लिफाफा देखता था तो उन्हें ठगी का पता चलता था।   

पुलिस टीम को पुरस्कार
डीआईजी पुष्पक ज्योति और एसएसपी स्वीटी अग्रवाल ने पुलिस टीम में शामिल एसओजी प्रभारी अशोक राठौर, नेहरू कालोनी एसओ विनोद गुंसाई, रायवाला एसओ चंद्रचंद्रांकर नैथानी, उप निरीक्षक वीपी सिंह, प्रवीण रावत, धर्मेन्द्र रोतेला, योगेश पांडेय, कांस्टेबल राकेश पंवार, प्रमोद, अरशद, प्रमोद बुटोला, रविन्द्र टम्टा, मोनू कुमार, विक्रम, विपिन सैनी, सुरेश रमोला को पुरस्कृत करने की घोषणा की। 

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