'यमदूतों' पर नहीं चल रहा कानून का जोर
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पिछले दिनों देहरादून की सड़कों पर हुई दुर्घटनाएं बताती हैं कि यमदूत बनकर दौड़ने वाले रफ्तार के सौदागरों पर लगाम कसने में कानून कितना लाचार है।
रफ्तार के रोमांच के खिलाड़ी पकड़े तो जाते हैं लेकिन थाने ही छूट जाते हैं। मुकदमा दर्ज होता है, मगर धारा जमानती होती है। ऐसे में रफ्तार के शौकीन एक बार फिर सड़कों पर मौत का खेल खेलने के लिए आजाद हो जाते हैं।
केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे की सड़क हादसे में मौत के बाद कानून की इसी कमजोरी को देखते हुए केंद्र सरकार ने सख्त कानून की पैरवी की थी।
दरअसल, सड़क हादसे में मौत के मामलों में पुलिस आईपीसी की धारा 304-ए (तेजी और लापरवाही से वाहन चलाकर मौत का कारण बनना) के तहत मुकदमा दर्ज करती है।
यह धारा जमानती है और आरोप साबित होने पर तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। गंभीर चोट पर 338 और साधारण चोट पर 337 के तहत मुकदमा दर्ज होता है। यह धाराएं भी जमानती हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून के अनुसार ऐसे मामले में यही व्यवस्था है। पुलिस इन्हीं के तहत कार्रवाई करती है।
यह है कुछ घटनाएं
16 जुलाई की रात चंडीगढ़ के एक आला अफसर के बेटे और एमबीबीएस छात्र की तेज रफ्तार कार मोहकमपुर में यमदूत बनकर दौड़ी।
एक मजदूर को टक्कर मारने के बाद फरार होने की कोशिश में युवक ने कई वाहनों में टक्कर मारी। कैंट विधायक हरबंश कपूर समेत कई लोग चपेट में आने से बाल-बाल बचे।
आरोपी छात्र पकड़ा तो गया, लेकिन अपराध जमानती होने से कुछ देर बाद रिहा कर दिया गया।
25 जून को मसूरी घूमने आए जालंधर के चार रहीसजादों ने शराब के नशे में दून की सड़कों पर खूब तांडव किया। कार हवा से बातें कर रही थी और इसमें सवार लोग सड़क पर बीयर की बोतलें फेंक रहे थे।
कार को रोकने के प्रयास में एक पुलिस कर्मचारी भी चपेट में आने से बाल-बाल बचा। पुलिस ने जैसे-तैसे दिलाराम चौक पर कार को रोका। कार तो सीज हुई, लेकिन आरोपियों को जमानत मिलने में देरी नहीं लगी।
20 जून को इंडिका कार में सवार पांच युवकों ने नशे में सड़कों पर मौत का खेल खेला था। टक्कर मार कर वाहनों को क्षतिग्रस्त करने के साथ सड़कों पर खूब हुड़दंग किया।
पुलिस ने रोकने का प्रयास किया, लेकिन ईसी रोड पर कार सवार घेराबंदी तोड़कर भाग गए। पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद कार सवारों को दबोच लिया था। इंडिका कार को सीज करने के बाद पुलिस को थाने से ही उन्हें जमानत देनी पड़ी थी।
धारा 304 से बचती है पुलिस
हादसे में किसी की मौत पर धारा 304 यानी गैर इरादतन हत्या का प्रयोग किया जा सकता है। लेकिन पुलिस इससे बचती है।
हालांकि, हादसे के बाद बवाल होने पर इस धारा का इस्तेमाल पुलिस करती भी है। गैर जमानती इस धारा में आरोपी को 10 साल तक की सजा का प्रावधान है।
कानून के जानकारों के अनुसार सड़क हादसे के मामले में गैर इरादतन हत्या का आरोप साबित करना पुलिस के लिए आसान नहीं होता है। इसलिए इस धारा का इस्तेमाल कम किया जाता है।
सख्त कानून की जरूरत
रैश ड्राइविंग और हादसों पर रोक लगाने के लिए कानून को सख्त करने के साथ जुर्माने की राशि और बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही यातायात नियमों के बारे में पुलिस के अधिकार और बढ़ाए जाने की जरूरत है।
- प्रदीप राय, एसपी ट्रैफिक
हादसों में मौत के बढ़ते आंकड़ों के मद्देनजर एक्सीडेंट की धारा को गैर जमानती बनाने की जरूरत है। क्योंकि ऐसे मौके पर यह तय कर पाना मुश्किल होता है कि हादसा लापरवाही से हुआ है या फिर जानबूझकर किया गया।
- संजीव शर्मा, अधिवक्ता