नानकमत्ता मर्डरः गिरफ्त में आए निशा-विजय के कातिल
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उत्तराखंड में बहुचर्चित दोहरे नानकमत्ता हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इस मामले में धस्माना अस्पताल के संचालक आशीष धस्माना और वाहन चालक कानपुर निवासी इदरीस अहमद को गिरफ्तार कर लिया है।
साथ ही उनकी निशानदेही पर हत्या से पूर्व बेहोश करने के लिए प्रयुक्त की गई सुई और इंजेक्शन के अलावा उनके शरीर के टुकड़े करने वाले औजार छुरा और चापड़ भी बरामद कर लिया गया है।
पुलिस के मुताबिक धस्माना के दिल में ये बात बैठ गई थी कि उसके अस्पताल की बदनामी के पीछे डा. एचपी सिंह और उसके दोनों साथी विजयपाल, निशा हैं। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ धारा 302 और 201 के तहत दर्ज किए गए मुकदमे को डा. धस्माना और इदरीस के खिलाफ तरमीम कर दिया है।
धारा 302 व 201 के तहत मुकदमा दर्ज
मंगलवार शाम पांच बजे एसएसपी आवास कार्यालय में दोहरे हत्याकांड का खुलासा करने का दावा करते हुए एसएसपी रिद्धिम अग्रवाल ने बताया कि आठ सितंबर को नानकमत्ता के जंगल जोगीढेर निवासी संजय कुमार ने सूचना दी कि हाथ पैर कटे महिला और पुरुष के शव नानकसागर डैम के किनारे पड़े हैं।
इस मामले में पुलिस ने नौ सितंबर को अज्ञात लोगों के खिलाफ धारा 302 व 201 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज किया और दोनों लाशों के सिर बरामद कर लिए। इनकी शिनाख्त 16 सितंबर को बरेली निवासी निशा और विजय के रूप में हुई।
साथ ही पता चला कि दोनों ही बनबसा स्थित धस्माना अस्पताल में कार्यरत थे और छह सितंबर की शाम से गायब थे। जांच दो राज्यों में चली और काफी उलझी हुई थी। तफ्तीश के दौरान घटनास्थल पर एक मुर्गी के दाने का बोरा और मृतका निशा के सिर पर एक मुर्गी का पंख भी मिला।
यही नहीं बनबसा-नानकमत्ता रोड पर लगे सीसीटीवी कैमरे में छह सितंबर की रात एक अर्टिगा कार के आने-जाने की भी फुटेज पुलिस को मिली। इस पर जांच की तो पता चला कि धस्माना अस्पताल के संचालक आशीष धस्माना के पास अर्टिगा कार है। यही नहीं उसके फार्म हाउस में पोल्ट्री फार्म भी है। जिस पर आशीष धस्माना पर शक की सुई टिक गई।
हत्या करना कबूल किया
एसएसपी ने बताया कि शक के आधार पर जब आशीष धस्माना से सख्ती से पूछताछ की तो उसने हत्या करना कबूल किया। साथ ही बताया कि हत्या उसने अपने चालक इदरीस अहमद के साथ मिलकर की। इस पर पुलिस ने इदरीस को भी गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आशीष धस्माना ने बताया कि बरेली निवासी डा. एचपी सिंह को उसने नियुक्त किया था। बाद में डा. एचपी सिंह ने निशा और विजयपाल को भी अस्पताल में ओटी असिस्टेंट और वार्ड ब्वॉय के रूप में नियुक्त कराया।
डा. एचपी सिंह ने उससे अपने कार का लोन चुकाने और बरेली से धस्माना अस्पताल के लिए डॉक्टर लाने के लिए 12.65 लाख रुपए ले लिए। दो माह बाद भी डा. एचपी सिंह न तो कोई डॉक्टर लाया और न रुपए ही वापस किए। इस बीच, उसने निशा और विजय को भी नौकरी छोड़ने के लिए प्रेरित किया।
दूसरे अस्पताल में शिफ्ट कराना पड़ा
एसएसपी ने बताया कि पूछताछ में आशीष धस्माना ने बताया कि डा. एचपी सिंह के चलते उसके अस्पताल की साख खराब हो रही थी। वह मरीजों का इलाज गंभीरता से नहीं करता था जिससे उसे अपने रुपयों से उन मरीजों को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट कराना पड़ा।
यही नहीं डा. सिंह के निशा और एक अन्य पूर्व महिला कर्मी से अवैध संबंध भी थे। उसने अस्पताल को पूरी तरह से अय्याशी का अड्डा बना दिया था। इन सब बातों ने उसे मानसिक रूप से परेशान कर दिया। छह सितंबर को डा. एचपी सिंह के बरेली जाने के बाद निशा और विजय ने भी छुट्टी पर जाने की बात कही।
इस पर उसने दोनों को पांच सौ और तीन सौ रुपए दिए। एसएसपी ने बताया कि जब वे दोनों अपने कमरे से बैग लेकर जाने लगे तो आशीष धस्माना चालक इदरीस अहमद को साथ लेकर निशा और विजय को अपने साथ किसी काम से अपने अस्पताल से डेढ़ किलोमीटर दूर पैंटल फार्म ले गया।
इस दौरान उन्होंने निशा से पूछताछ की तो पता चला कि डा. एचपी सिंह का इरादा आशीष धस्माना के अस्पताल को नुकसान पहुंचाने का था। यही नहीं उसके 12.65 लाख रुपए भी हड़प लेना चाहता था। बताया कि डॉक्टर जानबूझकर मरीजों के उपचार में लापरवाही कर रहा है जिसमें निशा उसकी प्रेमिका होने के कारण और विजय रुपयों के लालच में साथ दे रहा था।
ऐसे की हत्या
इससे आक्रोशित आशीष धस्माना ने इदरीस के साथ मिलकर पहले निशा को और फिर विजय को फिनारगन और फोर्टविन का इंजेक्शन जबरन लगाया। कुछ देर बाद दोनों बेहोश हो गए। तब आशीष धस्माना और इदरीस ने एक बड़े छुरे और चापड़ से पहले दोनों की गर्दन काट दी, इससे दोनों की मौत हो गई।
बाद में इदरीस ने शवों को ठिकाने लगाने के लिए लाश के हाथ-पैर व सिर काटकर उसके टुकड़े कर दिए। साथ ही दोनों लाशों को अलग-अलग बारेरयों और सिरों को काली पॉलीथिन में भर दिया। बाद में अर्टिगा कार से नानकमत्ता डैम में दोनों बोरियों और पॉलीथिन के बैग को ठिकाने लगाने चल दिए।
रास्ते में चकरपुर रोड पर पहले जगबुड़ा पुल और मंदिर के बीच पुलिया से चापड़ और चाकू फेंक दिए। नानकमत्ता डैम पहुंचकर ऊपर से दोनों बोरे फेंक दिए। फिर आगे बढ़कर सितारगंज रोड में खकरा पुल से पहले मृतक विजय और मृतका निशा का काला बैग फेंक दिया था और खकरा पुल पर पहुंचकर दोनों काली पॉलीथिनों जिनमें मृतकों के सिर थे, को पुल से नीचे फेंक दिया।
एसएसपी अग्रवाल ने बताया कि पुलिस ने उनकी निशानदेही पर जगपुड़ा पुल के नीचे से हत्या में प्रयुक्त खून से सना चापड़ और चाकू बरामद किया। धस्माना अस्पताल से अर्टिगा कार जिसमें दोनों मृतकों के शवों को डालकर ले जाया गया था, को भी कब्जे में ले लिया। कार की डिग्गी में खून के दाग भी मिले।
यही नहीं, पैंटल फार्म जहां पर दोनों हत्याएं की गईं, की तलाशी लेने पर घटनास्थल के नीचे के कमरे से दो इंजेक्शन एंपुल फिनार्गन, फोर्टविन के और एक प्रयोग की गई सीरिंज और फोर्टविन और फिनार्गन के दो खाली एंपुल टूटे हुए मिले। इसके अलावा, शंकर ब्रांड चोकर का एक प्लास्टिक का बैग और चार काली पॉलीथिन भी बरामद हुए। यही लाशों के पास भी मिले थे।