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सतपाल महाराज के शिविर में संत की निर्मम हत्या

Wed, 21 Jan 2015 03:24 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून- इलाहाबाद
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून- इलाहाबाद Updated Wed, 21 Jan 2015 03:24 PM IST
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murder in satpal maharaj magh mela camp.

इलाहाबाद में आयोजित माघ मेला में काली सड़क पर सरस्वती चौराहा स्थित पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा नेता सतपाल महाराज की मानव उत्थान सेवा समिति के मानव धर्म शिविर के पंडाल में सोमवार रात संत रत्नेश्वरानंद (65) का बेरहमी से कत्ल कर दिया गया।

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हत्यारे ने उनके सिर और गले पर फावड़े से कई वार किए थे। हत्या का आरोप सेवक राजेश गौड़ (23) पर लगा है। हत्या के बाद वह शिविर में ताला लगाकर भाग निकला। मंगलवार सुबह जब आरती के वक्त संत शिविर से बाहर नहीं निकले तो सेवक जौहरी उनको बुलाने पहुंचा।
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शिविर में ताला लटकता देख उसका माथा ठनका। जौहरी ने संत अजयानंद को जानकारी दी। चिंता होने पर ताला तोड़ा गया तो भीतर तख्ते पर खून से लथपथ संत का शव पड़ा मिला।
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पास ही खून से सना फावड़ा भी पड़ा था। शिविर के मुख्यालय दिल्ली और हरिद्वार में खबर देने के बाद पुलिस को बुलाया गया।

अब तक पुलिस के हाथ नहीं आया आरोपी

murder in satpal maharaj magh mela camp.

मौके पर डीएम भवनाथ, एडीएम समेत कई थानों की फोर्स भी पहुंच गई। फील्ड यूनिट के प्रभारी प्रेम नारायण भारती को भी बुलाया गया। हत्या का आरोपी अब तक पुलिस के हाथ नहीं आया है।

माघ मेला शिविर के प्रधान संचालक रत्नेश्वरानंद सोमवार रात 7.30 बजे ही मथुरा से लौटे थे। हत्यारोपी राजेश आजमगढ़ का रहने वाला है। शिविर के लोगों के मुताबिक राजेश 15 वर्ष से समिति से जुड़ा था।

दो दिन पूर्व उसका एक अन्य सेवक उमेश से झगड़ा हो गया था। उमेश ने फोन कर संत रत्नेश्वरानंद को इसकी जानकारी दी थी। झगड़े की वजह स्पष्ट नहीं है।

रत्नेश्वरानंद ने उमेश को खामोश रहने की सलाह दी थी। वह सोमवार रात पहुंचे और झगड़े पर राजेश को फटकार लगाई थी।

रात डेढ़ से दो बजे के बीच की गई हत्या

murder in satpal maharaj magh mela camp.

इसके बाद वह मौनी अमावस्या के भंडारे की तैयारी में जुट गए। रात एक बजे के आसपास वह अपने शिविर में चले गए। उन्होंने सेवक आशीष से कहा था कि उनके पांव में दर्द है। वह आकर मालिश कर दे।

आशीष की जगह राजेश तेल का कटोरा लेकर उनके शिविर में चला गया। इसके बाद शिविर में क्या हुआ, किसी को कुछ पता नहीं। आशंका है कि हत्या रात डेढ़ से दो बजे के बीच की गई।

लूटपाट के सुबूत नहीं मिले हैं। शिविर में 40 हजार रुपए और संत के वस्त्र में 38 हजार रुपए मिले। राजेश के खिलाफ फआईआर राजरूपपुर के रहने वाले समिति के सदस्य अनुराग गौतम ने दर्ज करवाई।

चीख भी नहीं पाए
हत्या उस वक्त की गई जब संत बाईं ओर करवट करके गहरी नींद में थे। शिविर में देर रात तक लोग जागे हुए थे, लेकिन किसी को उनकी चीख नहीं सुनाई दी। फावड़े के कई वार से सिर के साथ ही गला और जबड़ा भी कट गया था।

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