60 हजार रुपए के लिए चाय वाले को उतार दिया मौत के घाट, आखिरी सांस तक हाथौड़े से करता रहा वार
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उत्तराखंडमें काशीपुर के कुंडा थाना पुलिस ने चाय विक्रेता मो. शफी उर्फ शफिया हत्याकांड का खुलासा कर मुख्य आरोपी और उसके सहयोगी दिव्यांग व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया। मुख्य आरोपी ने हिसाब करने के बहाने से उसे बुलाया था। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त तीन हथियार बरामद किए हैं। आरोपी ने पुलिस को बताया कि ट्राली के 60 हजार रुपये को लेकर उसने शफिया की हत्या की है, जबकि सहयोगी ने हथियार छिपाने में उसकी मदद की।
ग्राम कुंडा निवासी मो. शफी उर्फ शफिया के मोबाइल पर मंगलवार शाम किसी व्यक्ति का फोन आया। वह अपना मोबाइल दुकान पर ही छोड़कर चला गया। अगली सुबह उसका शव लालपुर टीला माइनर में बरामद हुआ। पुलिस ने नंबर सर्विलांस पर लगाकर जांच की तो उस समय की कॉल रिकार्ड में आया नंबर ग्राम टीला निवासी इकबाल सिंह उर्फ मुखी का पाया गया। पुलिस ने मुखी को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने शफिया की हत्या करने का जुर्म कबूल कर लिया।
मुखी ने बताया कि एक वर्ष पूर्व उसने अस्सी हजार रुपये में ट्राली खरीदी थी और 60 हजार रुपये उसे नकद दे दिए थे। बकाया 20 हजार रुपये उसे देने थे, लेकिन बाद में उसने शफिया को ट्राली लौटा दी। बार-बार तकादा करने के बाद भी शफिया ने 60 हजार की रकम उसे नहीं लौटाई तो वह ट्राली उठा ले गया। इसी विवाद को लेकर एक सितंबर को उसका शफिया के साथ झगड़ा भी हुआ था। इसी विवाद के चलते उसने हिसाब करने के बहाने शफिया को नहर किनारे बुलाया।
वहां वह अपने साथ गढ़ीनेगी निवासी दिव्यांग कुलदीप उर्फ गोल्डी को साथ लेकर पहुंचा, जहां उसने शफिया पर कार की टामी (लोहे की छड़ीनुमा), हथौड़ी व काते से वार कर उसकी हत्या कर दी। एएसपी डॉ. जगदीश चंद्र ने बताया कि हत्याकांड में मुख्य आरोपी इकबाल सिंह के अलावा विकंलाग कुलदीप को भी गिरफ्तार कर लिया। कुलदीप ने शफिया की हत्या में प्रयुक्त हथियार छिपाने में मदद की थी। टीम में थाना प्रभारी सुधीर कुमार, एसआई मदन सिंह बिष्ट, कांस्टेबल अवधेश कुमार, विजय डसीला व विजय राणा आदि थे।
मुद्दई के आरोपों से मेल नहीं खाती मुल्जिम की कहानी
मो. शफी की हत्या के खुलासे के बाद जो कहानी हत्यारोपी ने पुलिस को बताई है। वह मुकदमे के वादी के बयानों से एकदम अलग है। आरोपी जहां ट्राली के साठ हजार रुपये न लौटाने पर हत्या करने की बात कह रहा है। वहीं, मृतक के पुत्र का कहना है कि ट्राली का किराया मांगने पर उसके पिता की हत्या की गई है।
उसने सवाल किया कि जब ट्राली आरोपी के कब्जे में है, तो उन पर रकम बकाया कैसे हो सकती है। शफी हत्याकांड में गिरफ्तार किए गए इकबाल सिंह मुखी का कहना है कि डेढ़ वर्ष पूर्व दोनों साझे में एक पेपर मिल में भाड़े पर ट्राली चलाते थे। उसका खुद का ट्रैक्टर था और शफी की ट्राली थी। काम बंद होने के बाद उसने शफी से 80 हजार रुपये में ट्राली खरीदकर 60 हजार रुपये दे दिए। बकाया 20 हजार मांगने पर उसने ट्राली वापस कर दी, लेकिन शफी ने उसकी रकम नहीं लौटाई।
उधर, मृतक के पुत्र कासिम उर्फ रोहिल का कहना है कि उसके पिता ने कभी मुखी के साथ साझे में काम नहीं किया। उनका अपना ट्रैक्टर-ट्रॉली है। फसल के दौरान मुखी उसकी ट्राली किराए पर ले लेता था। एक वर्ष पूर्व भी उसने 30 हजार रुपये भाड़े पर दो माह के लिए ट्राली किराए पर ली थी। बाद में उसने ट्राली लौटा दी। धान के सीजन के चलते मुखी ने जुलाई के लिए फिर उनसे ट्राली किराए पर ले ली। लेकिन दो माह का किराया नहीं दिया। किराया मांगने के विवाद में उसके पिता की हत्या की गई है। कासिम का कहना है आरोपी मुखी पुलिस को मनगढ़त कहानी सुना रहा है।