इन खतरनाक मंसूबों के साथ उत्तराखंड में घुसे थे दो माओवादी, पास में मिली कई प्रतिबंधित चीजें
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पुलिस ने प्रतिबंधित संगठन भाकपा माओवादी के दो सक्रिय सदस्यों को किच्छा से गिरफ्तार किया है। दोनों के कब्जे से प्रतिबंधित साहित्य भी बरामद हुआ है। इनमें से एक आरोपी पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित था। आठ महीने पूर्व चोरगलिया से पकड़े गए माओवादी देवेंद्र चमियाल से मिली अहम जानकारी के बाद दोनों की गिरफ्तारी हुई है। कोर्ट में पेशी के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
कोतवाली में सोमवार को पत्रकार वार्ता में एसएसपी डॉ. सदानंद दाते ने बताया कि तीन जून को मुखबिर की सूचना पर सीओ हिमांशु शाह के नेतृत्व में किच्छा और नानकमत्ता थाना पुलिस ने किच्छा के आनंदपुर मोड़ के पास आम के बगीचे में दबिश दी। टीम ने वहां बैठे रमेश भट्ट उर्फ मनीष मास्टर उर्फ दिवाकर उर्फ भट्ट निवासी ग्राम दुमकाबंगर हल्दूचौड़ (लालकुआं) और मनोज कुमार सिंह उर्फ अरविंद निवासी ग्राम हल्दुआ पोस्ट ऑफिस गेरेही थाना सैयदरजा जिला चंदौली (यूपी) को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से प्रतिबंधित माओवादी साहित्य, किताबें और पंफलेट बरामद हुए। दोनों को तराई क्षेत्र में संगठित और असंगठित मजदूरों को उकसाने की जिम्मेदारी दी गई थी।
पूछताछ में पुलिस को पता चला कि रमेश और मनोज भाकपा माओवादी के जोनल कमेटी के सदस्य रह चुके हैं और वर्ष 2004 में हंसपुर खत्ता (चोरगलिया) में माआवोदी कैंप में शामिल रहे थे। कैंप में रमेश ने लोगों को माओवादी विचारधारा के प्रति जागृत, उकसाने और भड़काने का काम किया, जबकि अरविंद कैंप का संयोजक और व्यवस्थापक था।
इसके अलावा, यूपी के बलिया, फर्रुखाबाद और नैनीताल के शहरफाटक में हुई जोनल कमेटी की बैठक में दोनों ने शिरकत की थी। रमेश वर्ष 2004 और 2007 में माओवादी गतिविधियों को लेकर दर्ज मुकदमों में वांछित था और उस पर 10 हजार रुपये का इनाम भी घोषित है। पुलिस अब उनके अन्य साथियों की तलाश कर रही है।
तराई में सशस्त्र संघर्ष छेड़ने की थी साजिश
प्रतिबंधित संगठन भाकपा माओवादी सिडकुल में उपजने वाले श्रमिक आंदोलनों में घुसपैठ कर सशस्त्र संघर्ष के लिए माहौल बनाने का मंसूबा पाले था। पहाड़ में लोगों को भ्रमित करने में नाकाम रहने के बाद संगठन का मानना था कि तराई में फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों के साथ ही शोषित लोगों की बड़ी संख्या है। इसके तहत जोनल कमेटी के सदस्यों को मजदूरों के बीच संगठन की विचारधारा का प्रचार-प्रसार करने का कार्य सौंपा गया था।
गिरफ्तार दोनों माओवादियों से जब्त किए गए दस्तावेज में इसका खुलासा हुआ है। कुमाऊं में माओवादियों ने वर्ष 2004 से गतिविधियां शुरू करते हुए संगठन की मजबूती के लिए जमीन तैयार करनी शुरू कर दी थी। इसकी भनक लगते ही हरकत में आई पुलिस ने सकैनिया (गदरपुर) से अनिल चौड़ाकोटी, जीवन और नीलू बल्लभ को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद अन्य सक्रिय सदस्य भूमिगत हो गए थे।
इधर, नानकमत्ता के जंगलों में माओवादी शिविर लगाने के आरोप में वर्ष 2007 में प्रशांत राही की गिरफ्तारी के बाद भी कई सदस्य भूमिगत हो गए थे। पुलिस ने प्रशांत की पत्नी चंद्रकला राही की गिरफ्तारी भी की थी। इसके बाद अचानक अल्मोड़ा के नानीसार में जमीन के खिलाफ उपजे लोगों के अंसतोष की आड़ में माओवादियों ने आगजनी और वॉल राइटिंग (दीवारों पर संदेश लिखकर) से दहशत फैलाई थी। बीती 23 सितंबर को चोरगलिया से पुलिस ने माओवादी देवेंद्र चमियाल और उसकी साथी भगवती भोज को गिरफ्तार किया था। देवेंद्र पर नानकमत्ता में प्रशिक्षण शिविर चलाने का आरोप था।
देवेंद्र से पूछताछ में मिली जानकारियों के बाद पुलिस के हत्थे रमेश और मनोज चढ़ गए। एसएसपी डॉ. सदानंद दाते ने बताया कि भाकपा माओवादी संगठन की जोनल कमेटी को मजदूर आंदोलनों में घुसकर सशस्त्र संघर्ष के लिए परिस्थितियां तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। दोनों गिरफ्तार आरोपी इसी जिम्मेदारी का निर्वहन कर मजदूर अंसतोष को चिंगारी देने का काम कर रहे थे।
सिडकुल में सक्रिय मजदूर नेताओं पर भी नजर
सिडकुल की विभिन्न फैक्ट्रियों में उपजने वाले श्रमिक आंदोलनों के अगुवाई करने वाले मजदूर नेताओं पर पुलिस की खास नजर है। सूत्रों के अनुसार पुलिस खासतौर पर वामपंथी रुझान वाले नेताओं की गतिविधियों पर नजर रख रही है। पुलिस का मानना है कि कई लोग आंदोलन के नाम पर मजदूरों को भटकाने की कोशिश में जुटे रहते हैं। इससे फैक्ट्रियों में माहौल खराब होता है।
रमेश अकाउंटेंट तो मनोज है निजी स्कूल में शिक्षक
पुलिस की गिरफ्त में आया रमेश उर्फ मनीष मास्टर किच्छा की एक सरिया फैक्ट्री में अकाउंटेंट पद पर कार्य रहा था। वहीं, मनोज कुमार बरेली के एक निजी स्कूल में शिक्षक था। पुलिस के मुताबिक वर्ष 2005 से 2007 में अनिल चौड़ाकोटी, नीलू बल्लभ, प्रशांत राही और चंद्रकला की गिरफ्तारी के बाद सभी सक्रिय लोग भूमिगत हो गए थे।
पुलिस टीम पर इनाम की बौछार
एसएसपी डॉ. सदानंद दाते ने बताया कि दोनों माओवादियों को पकड़ने वाली टीम को डीजीपी और डीआईजी ने 10-10 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है। एसएसपी ने बताया कि उनकी तरफ से भी टीम को पांच हजार का इनाम दिया जाएगा। टीम में सीओ हिमांशु शाह, थाना प्रभारी किच्छा मोहन चंद्र पांडे, नानकमत्ता थाना प्रभारी अशोक कुमार, संजय धौनी, लक्ष्मण गोस्वामी और राजेंद्र अधिकारी शामिल रहे।