फिर फेल हुए मैगी नूडल्स और टेस्टमेकर के सैंपल, नेस्ले पर 35 लाख का जुर्माना
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दो साल पहले सैंपल फेल होने के कारण चर्चा में आई मैगी के सैंपल एक बार फिर फेल हो गए। बहुराष्ट्रीय कंपनी नेस्ले पर 35 लाख का जुर्माना लगाया गया है। कंपनी पर यह जुर्माना मैगी ब्रांड के कई उत्पादों के नमूनों की राजकीय जन विश्लेषक प्रयोगशाला में जांच कराए जाने पर उनमें एश कंटेट (धातु भस्म) की मात्रा निर्धारित मानक से कई गुना अधिक पाए जाने पर लगाया गया है।
मैगी के जो नमूने जांच में फेल हुए, वे नेस्ले कंपनी की पंजाब के मोगा शहर और उत्तराखंड में पंतनगर स्थित फैक्ट्रियों में निर्मित पाए गए। इस संबंध में मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमों की सुनवाई करके सोमवार को न्याय निर्णायक अधिकारी/एडीएम जितेंद्र कुमार शर्मा ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 51 के तहत नेस्ले कंपनी को 35 लाख रुपये और उसकी दो निर्माण इकाइयों के संचालकों को पांच-पांच लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। इसके अतिरिक्त इन्हीं मामलों में विक्रेताओं और वितरकों पर एडीएम शर्मा ने 17 लाख रुपये जुर्माना लगाया है।
मैगी उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर दो साल पहले देश के विभिन्न राज्यों में संदेह गहराने पर नेस्ले ने वितरकों के जरिए बाजार से मैगी के तमाम उत्पाद वापस मंगा लिए थे। इसके बावजूद यूपी के शहरों में उनकी खुदरा बिक्री जारी रहने पर शासन ने मैगी उत्पादों की सैंपलिंग कराने को विशेष अभियान शुरू कराया था।
विशेष सैंपलिंग अभियान में लिए गए थे सात नमूने
इसी अभियान के तहत मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी डीपी सिंह और एफएसओे आरपी गंगवार ने वर्ष 2015 में 29 व 30 मई और आठ व 12 जून को जिले में विभिन्न स्थानों से नेस्ले के वितरकों और विक्रेताओं से मैगी छोटू, मैगी टू मिनट्स नूडल, मैगी मसाला, मैगी वेज आटा नूडल्स, मैगी मीट्रिलिटियस, मैगी पास्ता पैनी आदि उत्पादों के सात नमूने सील किए थे।
नूडल्स, टेस्ट मेकर पाउच जांच में पाए गए गुणवत्ताहीन
सील किए गए सभी नमूने जांच के लिए लखनऊ स्थित राजकीय जन विश्लेषक प्रयोगशाला भेजे गए थे। सीएफएसओ डीपी सिंह के अनुसार गत जनवरी और मार्च में प्राप्त हुईं इन नमूनों की जांच रिपोर्ट से पता चला कि मैगी नूडल्स और उनमें स्वाद लाने के लिए पैकेट में रखे गए टेस्ट मेकर पाउच गुणवत्ताहीन हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि सभी नमूनों में टोटल एश कंटेंट की मात्रा तय मानक से कई गुना अधिक है।
खाद्य पदार्थ में अखाद्य राख की भारी मिलावट को गंभीरता से लेते हुए सीएफएसओ ने एडीएम कोर्ट में विक्रेता रिंकू गुप्ता पुत्र रामप्रकाश गुप्ता निवासी मीरानपुर कटरा, निगोही स्थित बालाजी ट्रेडर्स के प्रोपराइटर रवि किशोर पुत्र नंद किशोर, पुवायां के मोहल्ला गढ़ी निवासी आदेश गुप्ता पुत्र राम औतार गुप्ता, नेस्ले के वितरक अनिल कपूर पुत्र रामकृष्ण कपूर निवासी बहादुरगंज और प्रमोद लखौरिया पुत्र शंभू दयाल लखौरिया निवासी माधौबाड़ी बरेली के विरुद्ध मुकदमें दर्ज कराए।