जीजा ने साले को चाकुओं से गोदकर निकाली भड़ास, शव को झाड़ियों में फेंका, ये हुआ अंजाम
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प्रॉपर्टी के लालच में जीजा अपने साले से इस कदर नफरत करने लगा कि उसने साले को चाकुओं से ही गोद डाला। इसके बाद उसने शव को झाड़ियों में फेंक दिया। घटना को अंजाम देने के बाद वह फरार हो गया। लेकिन उसकी इस करनी का ये उसे ये सजा मिली।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रदीप पंत की अदालत ने साले की हत्या के दोषी अभियुक्त को आजीवन कारावास और बीस हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। घटना अगस्त 2011 की है।
पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक हुसैनपुरा, पटियाला (पंजाब) निवासी रेशम सिंह 24 अगस्त 2011 को अपने साले गुरुजीत सिंह को मोटर साइकिल से हेमकुंड साहिब की यात्रा के बहाने लाया था। 25 अगस्त को उसने कर्णप्रयाग के समीप गुरुजीत सिंह की चाकुओं से गोदकर हत्या कर शव को झाड़ी में फेंक दिया था।
26 अगस्त को वन विभाग के कर्मियों ने बैरियर के नीचे झाड़ियों में शव पड़ा देखा तो इसकी सूचना थाना कर्णप्रयाग को दी। पुलिस ने शव कब्जे में लिया। मृतक के पिता हरवंश सिंह ने कपड़ों और फोटो से अपने बेटे की शिनाख्त की। शव के पास ही पुलिस ने चाकू भी बरामद किया। आरोपी को सहारनपुर से गिरफ्तार कर लिया गया।
ससुर से भी नहीं बनी
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता कुलदीप सिंह बर्त्वाल ने बताया कि मृतक के पिता हरवंश सिंह का कहना था कि अभियुक्त रेशम सिंह उसके कारोबार और प्रापर्टी की देखभाल कर रहा था, लेकिन जब उसका पुत्र गुरुजीत सिंह कारोबार व प्रापर्टी का काम संभालने लगा तो रेशम सिंह यह मानने लगा कि अब उसे ससुर हरवंश सिंह के कारोबार और प्रापर्टी से कुछ हासिल होने वाला नहीं है।
इसी बात को लेकर उसने साले गुरुजीत सिंह को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। वह गुरुजीत को हेमकुंड साहिब की यात्रा पर लाया और कर्णप्रयाग के पास उसकी हत्या कर दी। मामले में हरवंश सिंह ने 29 अगस्त को थाना कर्णप्रयाग में नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में बीस गवाह पेश किए गए। सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने अभियुक्त रेशम सिंह को हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अभियुक्त अभी तक जमानत पर था।