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किडनैप प्रॉपर्टी डीलर को मौत के मुंह से बचाकर लाई पुलिस
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 06 Nov 2015 03:10 PM IST
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देहरादून में बालावाला गुल्लरघाटी से चार नवंबर की रात अगवा किए गए प्रॉपर्टी डीलर को पुलिस सात घंटे के ऑपरेशन के बाद मौत के मुंह से बचा लाई।
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जबरन हलक में शराब उलटने के बाद अपहरणकर्ताओं ने उसके ऊपर कार चढ़ा दी थी, जिससे डीलर की पसली की हड्डियां टूट गईं। अर्द्धनग्न अवस्था में उसे कार में डालकर सुनसान इलाके में फेंक ने जा रहे चार अपहरणकर्ताओं को पुलिस ने दबोच लिया। गंभीर घायल प्रॉपर्टी डीलर को फिलहाल जौलीग्रांट अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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पुलिस का दावा है कि डेढ़ करोड़ रुपये की रकम डकारने की रंजिश में डीलर का अपहरण कर जानलेवा हमला किया गया है।
रायपुर थाना क्षेत्र के बालावाला गुल्लरघाटी निवासी ललित पाल (42) को बुधवार रात आठ बजे करीब कुछ लोग घर से बुलाकर कार में डालकर ले गए। भाई बिजेंद्र पाल की सूचना पर पुलिस सक्रिय हो गई।
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सैकड़ों ग्रामीणों ने ललित की बरामदगी की मांग पर हंगामा कर दिया। पुलिस अधीक्षक नगर अजय सिंह और कई थानों की पुलिस ने मौके पर आकर ग्रामीणों को कार्रवाई का भरोसा दिया। सक्रिय हुई पुलिस ने ललित पाल को घर से बुलाने वाले पड़ोसी राहुल रावत को पकड़ लिया।
पूछताछ में राहुल ने बताया कि लेन-देन के विवाद में रामकुमार अपने साथियों के साथ उसे कार में डालकर ले गया है। इसी आधार पर पुलिस ने अपनी जांच को आगे बढ़ाया।
एसपी सिटी अजय सिंह और एसपी देहात जीसी ध्यानी की नेतृत्व में नेहरू कालोनी, रायपुर, डालनवाला, डोईवाला आदि थानों की पुलिस ने सात घंटे के ऑपरेशन के बाद तड़के भानियावाला चौक के पास आरोपियों के साथ कार में अर्द्धनग्न अवस्था में डाले गए ललित को बरामद कर लिया।
गंभीर चोट और अत्यधिक नशे की वजह से उसकी हालत बिगड़ी थी। 108 के जरिए तत्काल उसे जौलीग्रांट भेजा गया। एसपी सिटी ने बताया कि अपहरण में शामिल रामकुमार के अलावा राहुल रावत निवासी गुल्लरघाटी, मनोज निवासी राजपुर खुर्द और प्रभात थापा निवासी प्रेमनगर को गिरफ्तार कर लिया गया है। मुख्य आरोपी रामकुमार और ललित पाल एक -दूसरे के काफी करीबी थे।
डेढ़ करोड़ रुपये का था विवाद
एसपी देहात ने बताया कि डेढ़ करोड़ के विवाद में यह घटना हुई है। कुछ समय पहले ललित ने बिहारीगढ़ में रामकुमार को छह बीघा जमीन दिलाई थी, जो ललित ने धोखे से अपनी पत्नी के नाम करा ली थी। लाखों की नकदी पर भी विवाद था।
इस मसले पर कई बार पंचायत भी हो चुकी हैं। ललित ने चेक के जरिए दो लाख रुपये का भुगतान भी किया, लेकिन अब रकम देने में आनाकानी कर रहा था। इसी खुन्नस में रामकुमार ने सबक सिखाने के लिए तीन दिन पहले ललित पाल को अगवा करने की योजना बनाई।
ऐसे अंजाम दिया अपहरण का घटनाक्रम
राहुल रावत के बुलावे पर घर से बाहर आते ही ललित को रामकुमार आदि ने जबरन रावत की कार में डाल लिया। बैठते ही जबरन उसके मुंह में शराब की बोतल ठूंस दी गई। अत्यधिक शराब पिलाए जाने से ललित कुछ देर बाद निढाल हो गया। तुनवाला के पास ललित को कार से निकालकर दूसरी कार में डाल दिया गया। इसके बाद उसे डोईवाला क्षेत्र में हिमालयन इंस्टीट्यूट के पीछे के जंगल में ले जाया गया।
सड़क पर फें ककर उसके ऊपर से कार चढ़ाई गई, जिससे उसकी पसली टूट गई। बाद में कपड़े निकालकर उसे अर्द्धनग्न कर दिया गया। पुलिस के सक्रिय होने के कारण कई घंटे उसे वहीं पर रखा गया।
बृहस्पतिवार तड़के अपहरणकर्ता उसे कार में डालकर सुनसान इलाके की तरफ फेंकने ले जा रहे थे, ताकि कोई उसके पास न पहुंच सके। इस बीच पुलिस ने अपरहणकर्ताओं को पकड़ लिया। एसपी का कहना है कि यदि सही समय पर उपचार नहीं मिलता तो ललित का बचाना बेहद मुश्किल होता।
शातिराना अंदाज में पुलिस को छकाया
प्रॉपर्टी डीलर ललित को अगवा करने वाला रामकुमार बुधवार रातभर पुलिस को छकाता रहा। शातिराना अंदाज में धरपकड़ से बचने को आरोपी ने अपने साथी तक को ठिकाना बताने का रिस्क नहीं लिया। अपहृत की जान बचाने के लिए पुलिस ने सीधी कार्रवाई से परहेज किया। यही वजह रही कि पुलिस को जाल बिछाने के लिए सरकारी वाहन छोड़कर डंपर आदि का प्रयोग करना पड़ा।
गुल्लरघाटी के प्रॉपर्टी डीलर का अपहरण सुनियोजित साजिश का परिणाम था। ललित को शायद अनहोनी का अहसास था, इसलिए वह दिन छिपने के बाद घर से निकलने का रिस्क नहीं लेता था। रामकुमार ने राहुल रावत के जरिए अपने शिकार को बाहर निकाला। ललित को उठाने के बाद रामकुमार ने दो कारें बदलीं, ताकि पकड़ में न आ सके।
पुलिस ने सबसे पहले ललित को घर से बुलाने वाले राहुल को दबोचा। राहुल को भी रामकुमार ने अपने ठिकाने का राजदार नहीं बनाया। पुलिस दबाव में राहुल ने मोबाइल पर संपर्क साधा तो रामकुमार उसे घुमाता रहा। स्कूटी से अपने साथी के साथ आने की बात कही तो रामकुमार ने उन्हें डोईवाला पहुंचने के लिए कहा।
पुलिस ने रायपुर थाने से स्कूटी उपलब्ध कराकर राहुल को अकेले रवाना कर दिया। उसका साथी पुलिस के पास रहा। रास्ते में रामकुमार ने पहले स्कूटी की आवाज सुनी। फिर राहुल से दूसरे साथी से बात कराने के लिए कहा। मामला बिगड़ने लगा तो पुलिस साथी को लेकर राहुल के पास पहुंची। साथी से बातकर पूरी तसल्ली हुई तो आगे का रास्ता बताया।
जहां राहुल को रुकने के लिए कहा गया था, वहां दूर से ही दूसरे वाहनों का पता चल जाता था। कई पुलिस टीम बनाकर प्राइवेट वाहन में भेजी गई। एक टीम डंपर में घूमती रही। रामकुमार ने लोकेशन छिपाने के लिए कई बार मोबाइल से सिम भी निकाला। कई घंटे तक वह साथियों और पुलिस को घुमाता रहा। अपने ठिकाने से रामकुमार बाहर भी आया, लेकिन दो के बजाए तीन लोग देखकर वह वापस हो गया।
ठिकाने से बृहस्पतिवार तड़के रामकुमार अपने साथी के साथ ललित को कार में डालकर निकला तो पुलिस ने ओवरटेक कर उसकी कार को रुकवा लिया, तब जाकर अपहरणकर्ता कानूनी जकड़न में आ सके।
धन ऐंठकर बन गया अमीर
पुलिस हिरासत में आए रामकुमार का कहना है कि ललित ने उसकी पीठ में छुरा घोंपा है। ललित धोखे पर धोखा देता रहा। उसकी मोटी रकम ऐंठकर वह खुद अमीर बन गया, जबकि वह कंगाल हो गया। मारने का इरादा नहीं था। सिर्फ उसे दंडित करना चाहता था।
कागजात पर लगवाए हस्ताक्षर
जौलीग्रांट अस्पताल में होश में आए ललित ने बताया कि आरोपी ने यातनाएं देने के दौरान कुछ कागजातों पर उसके अंगूठे भी लगवाए हैं। अंगूठे पर स्याही के निशान इस बात की गवाही दे रहे हैं।
पुलिस टीम पुरस्कृत
कप्तान ने एसपी सिटी अजय सिंह, एसपी देहात जीसी ध्यानी, सीओ अरुण पांडेय, डालनवाला इंस्पेक्टर अनिल जोशी, एसएसआई कमल कुमार लुंठी, डोईवाला निरीक्षक संदीप नेगी, रायपुर थानाध्यक्ष अबुल कलाम, उपनिरीक्षक संजीत कुमार, उपनिरीक्षक बृजपाल सिंह, उपनिरीक्षक संत सिंह आदि को पुरस्कृत करने की घोषणा की है।