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अपराध की दुनिया के उस्तादों से आगे निकला भूरा
राकेश शर्मा/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 26 Dec 2014 11:04 AM IST
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उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार के सीधे जुड़ने के बाद भूरा की गिरफ्तारी इन दोनों राज्यों के लिए नाक का सवाल बन गई है।
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भूरा का सुराग तलाशने की कोशिश में दोनों प्रदेश सरकारों ने उस पर पांच-पांच लाख का इनाम भी घोषित कर दिया है। लेकिन दस लाख का यह इनाम अपराध की दुनिया में भूरा का दुस्साहस बढ़ा सकता है।
अब खुद का गिरोह भी बना सकता है भूरा
माना जा रहा है कि इतनी बड़ी रकम की घोषणा और तीन राज्यों में वांछित बनने के बाद भूरा अपने ‘नाम’ को रंगदारी या दूसरे अपराधों में भुना सकता है। अलग-अलग गिरोहों से जुड़ा रहा भूरा अब खुद का गिरोह भी बना सकता है।
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मुजफ्फरनगर के सरनावली गांव का अमित उर्फ भूरा 14 साल पहले अपराध की दुनिया से जुड़ा था। हाईस्कूल में पढ़ाई के दौरान मोबाइल विवाद में उसने एक दुकानदार की हत्या कर दी थी।
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हालांकि, उसका नाम इसके करीब दो साल बाद पहली बार मोटरसाइकिल लूट में सामने आया। कुछ समय जेल में रहने के बाद भूरा वर्ष 2003 में दिल्ली चला गया और पुलिस के लिए मुखबिरी करने लगा। लेकिन, अंदरखाने अपराध से उसने नाता नहीं तोड़ा। हालांकि, वह खुद सीधे जुर्म करने के बजाय अलग-अलग बड़े बदमाशों से जुड़ता रहा।
पुलिस सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2003 में दिल्ली में रहने के दौरान भूरा उस वक्त के बदमाश संदीप उर्फ नीटू कैल से जुड़ गया। नीटू गिरोह ने शामली में रेलवे पुलिस बल (आरपीएफ) के जवानों से दो कारबाइन लूटकर पुलिस को खुली चुनौती दी थी।
वर्ष 2004 में नीटू के मारे जाने के बाद उसका भाई बिट्टू कैल गिरोह का मुखिया बना। उसने मुजफ्फरनगर के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) नवनीत सिकेरा और उनकी पुलिस टीम को बम से उड़ाने की धमकी तक दे डाली थी।
भूरा का सुनील राठी गैंग से जुड़ाव उजागर हुआ
बिट्टू भी मुठभेड़ में मारा गया तो भूरा ने धनौरा के एक गिरोह से तार जोड़ लिए। इस वक्त तक भूरा का नाम सामने नहीं आया था। तीन नवंबर 2010 को दून के विशाल मेगा मार्ट में डकैती में अमित का नाम बड़े अपराध में पहली बार खुला।
इसके बाद कुछ माह पूर्व रामपुर में 75 लाख की डकैती में भी उसका नाम इनामी राहुल खट्टर के साथ सामने आया। पांच अगस्त को रुड़की जेल के बाहर चीनू पंडित पर जानलेवा हमले में भूरा का सुनील राठी गैंग से जुड़ाव उजागर हुआ।
पुलिस सूत्र बताते हैं कि अब तक भूरा का तरीका बड़े गिरोहों से मिलकर काम करने का ही रहा है। लेकिन, बागपत में फरारी के बाद जिस तरह उस पर दस लाख का इनाम घोषित हो चुका है, उसके बाद भूरा का अपराधियों के बीच ‘कद’ बढ़ा है।
नीटू, बिट्टू, राहुल और सुनील राठी जैसे उसके पुराने उस्तादों में सिर्फ राहुल ही दो लाख का इनामी रहा है। अब इनाम के मामले में उस्तादों से आगे निकलने के बाद भूरा बड़ी वारदातें कर सकता है।
उस्तादों के नक्शेकदम पर
सूत्रों के मुताबिक भूरा अपने उस्तादों के तरीके ही अपराध में इस्तेमाल करता रहा है। नीटू कैल ने पहली बार सरकारी हथियार लूटे थे। भूरा ने बागपत में फरारी के दौरान नीटू का ही तरीका अपनाया। हत्या करने, ताबड़तोड़ फायरिंग करने का भी उसका अंदाज इन उस्तादों का ही सिखाया हुआ बताया जाता है।