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उत्तराखंड: दो नाबालिग बहनों से रेप के बाद हत्या के दोषी को सजा-ए-मौत, ऐसे साबित हुआ गुनाह

Fri, 24 Aug 2018 09:40 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 24 Aug 2018 09:40 AM IST
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Death Punishment for rape and murder with two minor sisters in rishikesh
सरदार परवान सिंह

ऋषिकेश में दो बहनों से दुराचार और उनकी हत्या करने वाले गुरुद्वारे के सेवादार को विशेष न्यायाधीश पोक्सो रमा पांडेय की अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। सेवादार को न्यायालय ने सोमवार को दुराचार और हत्या का दोषी ठहराया था। अभियोजन की ओर से मुकदमे में कुल 14 गवाह पेश किए गए।

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मामला 15 जून 2017 का है। शासकीय अधिवक्ता भरत सिंह नेगी ने बताया कि ऋषिकेश की श्यामपुर पुलिस चौकी के पास नेपाली मूल की एक महिला दो बेटियों (13 व तीन साल) और नौ वर्षीय बेटे के साथ रहती थी। घटना वाले दिन महिला रोज की तरह घरों में कामकाज के लिए गई थी और बेटा ताई के यहां।
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बेटा करीब साढ़े ग्यारह बजे घर आया तो देखा कि बाहर से कुंडी लगी हुई थी। दरवाजा खोला तो देखा कि दोनों बहने पलंग पर बेसुध पड़ी थीं। उसने सामने स्थित गुरुद्वारे के सेवादार के फोन से मां को फोन किया, जिसके कुछ देर बाद वह वहां आ गई।
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ऐसे साबित हुआ सेवादार का गुनाह

Death Punishment for rape and murder with two minor sisters in rishikesh
सरदार परवान सिंह

उन्होंने पड़ोस से ही चिकित्सक को बुलाकर दोनों बच्चियों की जांच कराई तो चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने बताया था कि बच्चियों की गला घोंटकर हत्या की गई है।

इसके बाद पुलिस ने कई साक्ष्य एकत्र किए और घटना वाले दिन देर शाम ही सेवादार सरदार परवान सिंह को गिरफ्तार कर लिया था। पूछताछ में परवान सिंह ने बताया था कि वह दोनों बच्चियों को अकेला देखकर घर में घुसा था। उसने पहले बड़ी बेटी के साथ दुराचार किया और गला घोंटकर उसे मार डाला।

इसके बाद उसे लगा कि छोटी लड़की ने उसे देख लिया है। इसके बाद उसने छोटी लड़की से भी दुराचार किया और उसे भी मार डाला। पुलिस को बड़ी बच्ची के हाथों से कुछ बाल मिले थे। इनका आरोपी के साथ डीएनए मिलान कराया गया। ये बाल परवान सिंह की दाढ़ी के थे।
 

Death Punishment for rape and murder with two minor sisters in rishikesh
child rape

अधिवक्ता भरत सिंह नेगी ने बताया कि अदालत ने इस साक्ष्य को ही सबसे बड़ा साक्ष्य माना है। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने सरदार परवान सिंह को दोषी करार दिया था। इसके बाद बृहस्पतिवार को दोषी की सजा पर बहस हुई।

न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद परवान सिंह को दुराचार (आईपीसी 376) और पोक्सो अधिनियम के तहत आजीवन कारावास और हत्या (आईपीसी 302) के तहत फांसी की सजा सुनाई है।

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