बेखौफ साइबर क्रिमिनल्स, पुलिस की नाक के नीचे से फिर उड़ा ले गए लाखों रुपए
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
14 जुलाई से शुरू हुआ बैंक खातों से रकम निकालने का सिलसिला रविवार को भी जारी रहा। बेखौफ साइबर क्रिमिनल्स ने जयपुर में दून पुलिस की मौजूदगी में भी कई खातों से रकम उड़ा ली।
नेहरू कॉलोनी के कई लोगों के खातों से रविवार को भी रकम निकाली गई है। पीड़ितों ने थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई है। लेकिन पुलिस कर्मियों ने जयपुर गई पुलिस टीम से संपर्क करने के बजाय तहरीर पर मोहर लगाकर पीड़ितों को चलता कर दिया। वहीं, अब तक की जांच में जयपुर के तीन एटीएम से सबसे ज्यादा रकम निकालने की बात सामने आई है।
शनिवार को 30 से अधिक खातों से लाखों रुपये निकालने का खुलासा हुआ तो केस दर्ज कर पुलिस टीम को जयपुर रवाना कर दिया गया। पीड़ितों की संख्या बढ़ने की आशंका पहले ही थी।
उससे गंभीर बात यह है कि पुलिस के जयपुर पहुंचने के बाद भी वहां से रकम निकलने का सिलसिला थमा नहीं। राजीव नगर निवासी मोहित के खाते से तीन किश्तों में करीब 23 हजार रुपये निकाले गए।
यह रकम जयपुर के एटीएम से उड़ाई गई है। कुलदीप के खाते से सात हजार रुपये सुबह के समय निकाले गए। गंभीर बात यह है कि पुलिस ने जयपुर गई टीम को विश्वास में लेना भी जरू री नहीं समझा। पीड़ितों की तहरीर पर मोहर लगाकर उन्हें चलता कर दिया।
पुलिस ने मांगी 14 एटीएम की फुटेज
साइबर क्रिमिनल्स तक पहुंचने के लिए पुलिस को एटीएम में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की दरकार है। इसके लिए जयपुर से चार और देहरादून के 10 एटीएम की फुटेज की डिमांड की गई है।
इनमें अधिकांश भारतीय स्टेट बैंक के एटीएम शामिल है। अब यह देखने वाली बात होगी कि पुलिस को इन सीसीटीवी फुटेज से कितनी मदद मिल पाती है।
एटीएम क्लोन के मास्टर पुलिस के लिए अरसे से चुनौती बने हैं।
राजधानी में पहले भी एमटीएम क्लोन कर लोगों के बैंक खातों से रकम उड़ाई गई, लेकिन पहली बार व्यापक स्तर पर खातेदारों के शिकार होने से पुलिस पर भारी दबाव है। एटीएम क्लोन की आशंका में शनिवार रात शहर के एटीएम को चेक किया गया था।
हालांकि , वहां कुछ आपत्तिजनक नहीं मिला है। पुलिस को अब सीसीटीवी फुटेज से उम्मीद है। इसी कड़ी में देहरादून के दस और जयपुर के चार एटीएम की सीसीटीवी फुटेज पाने की कवायद शुरू की गई है।
ताकि, यह साफ हो सके कि किसी एटीएम में कहीं कोई डिवाइस तो नहीं लगाई गई है। इसके लिए पुलिस ने अपना पत्र बैंक अधिकारियों तक पहुंचा दिया है, लेकिन रविवार होने के कारण फुटेज नहीं मिल सका है।
पुलिस मान रही है कि डेट और समय के हिसाब से क्रिमिनल्स पकड़ में आ सकते है। लेकिन अभी यह साफ नहीं है कि उस तिथि में कैमरा सही था या नहीं। हालांकि, साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि फुटेज से कामयाबी मिलने की उम्मीद कम ही है, क्योंकि फ्राड करने वाले साइबर तकनीक से काफी हद तक वाकिफ हैं।